एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@narendramodi)

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में जुटे वैश्विक नेता: एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस दिल्ली पहुँचे,मैक्रों भी होंगे शामिल

नई दिल्ली,17 फरवरी (युआईटीवी)- राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली इन दिनों वैश्विक प्रौद्योगिकी और कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने के लिए एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस भारत पहुँचे,जहाँ एयरपोर्ट पर उनका स्वागत केंद्रीय युवा और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने किया। विदेश मंत्रालय ने इस आगमन को भारत और एस्टोनिया के बीच मजबूत होते डिजिटल और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक बताया है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति कारिस का यह दौरा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण संबंधों को और सुदृढ़ करेगा। एस्टोनिया को दुनिया में डिजिटल गवर्नेंस और ई-गवर्नेंस मॉडल के लिए अग्रणी देश माना जाता है,ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में भारत और एस्टोनिया के बीच सहयोग की अपार संभावनाएँ देखी जा रही हैं।

रक्षा खडसे ने भी अपने संदेश में कहा कि यह दौरा डिजिटल गवर्नेंस,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन आधारित विकास में दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देगा। उन्होंने जोर दिया कि भारत और एस्टोनिया के बीच तकनीकी सहयोग भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एस्टोनिया के अनुभव और भारत की विशाल प्रतिभा और स्टार्टअप इकोसिस्टम का संगम वैश्विक स्तर पर नई मिसाल पेश कर सकता है।

इस समिट का उद्घाटन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में नवाचारों,शोधकर्ताओं और टेक्नोलॉजी के प्रति उत्साही युवाओं की मौजूदगी भारत की अपार क्षमता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत न केवल अपने लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने इंडियन टैलेंट और इनोवेशन की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट को केवल एक तकनीकी आयोजन नहीं,बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी के नए मंच के रूप में देखा जा रहा है। विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और उद्योग जगत के नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वैश्विक सहयोग का प्रमुख आधार बनता जा रहा है। एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर,साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस जैसे विषयों पर गहन चर्चा की संभावना है।

इसी क्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी भारत पहुँच चुके हैं। वे 19 फरवरी को समिट में हिस्सा लेंगे। मुंबई एयरपोर्ट पर उनका स्वागत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया। भारत रवाना होने से पहले मैक्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ बिजनेस लीडर्स और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी आए हैं,जो दोनों देशों के रिश्तों को ठोस आधार देने में योगदान देंगे।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता भारत-फ्रांस ‘ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की भी शुरुआत करेंगे। इसे दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक,तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा,अंतरिक्ष,परमाणु ऊर्जा और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में पहले से ही गहरा सहयोग है,जिसे अब एआई और उभरती तकनीकों तक विस्तारित किया जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार,एस्टोनिया और फ्रांस जैसे देशों की सक्रिय भागीदारी इस समिट को वैश्विक महत्व प्रदान करती है। एस्टोनिया जहाँ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का मॉडल प्रस्तुत करता है,वहीं फ्रांस यूरोप की अग्रणी तकनीकी और औद्योगिक ताकत है। भारत इन दोनों देशों के साथ मिलकर एआई इकोसिस्टम को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर सकता है।

नई दिल्ली और मुंबई में हो रहे इन उच्चस्तरीय कार्यक्रमों ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भारत की नीति,स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की रणनीति और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट न केवल तकनीकी साझेदारी का मंच है,बल्कि यह भारत की कूटनीतिक सक्रियता और भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रति उसकी दूरदर्शिता का भी प्रतीक है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन उच्चस्तरीय बैठकों और समझौतों से किस प्रकार ठोस परिणाम सामने आते हैं। फिलहाल इतना तय है कि इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को वैश्विक एआई विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है और डिजिटल युग में नई साझेदारियों के द्वार खोल दिए हैं।