राष्ट्रपति मुर्मू से मिले एंटोनियो गुटेरेस (तस्वीर क्रेडिट@rashtrapatibhvn)

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: राष्ट्रपति मुर्मू से मिले एंटोनियो गुटेरेस,संयुक्त राष्ट्र सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका पर जोर

नई दिल्ली,21 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मौके पर वैश्विक कूटनीति और प्रौद्योगिकी के संगम का एक अहम दृश्य देखने को मिला,जब एंटोनियो गुटेरेस भारत पहुँचे और राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग से लेकर बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार तक कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

राष्ट्रपति भवन में हुई इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एआई इम्पैक्ट समिट के सफल आयोजन के लिए भारत के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे तेजी से उभरते क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका न केवल विकासशील देशों के लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। गुटेरेस ने अलग-अलग क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को भी रेखांकित किया और इसे वैश्विक साझेदारी का सशक्त उदाहरण बताया।

प्रेसिडेंट सेक्रेटेरिएट के अनुसार,राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एआई पर एक ग्लोबल साइंटिफिक पैनल गठित करने की गुटेरेस की पहल का स्वागत किया। यह पैनल इस उद्देश्य से प्रस्तावित है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास और उपयोग मानवता की सेवा के लिए हो तथा इसके जोखिमों को संतुलित ढंग से संबोधित किया जा सके। राष्ट्रपति ने कहा कि एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहमति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण समय की माँग है,ताकि तकनीक का लाभ सभी देशों और समाजों तक समान रूप से पहुँचे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में मल्टीलेटरलिज्म यानी बहुपक्षवाद गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ते अविश्वास और जियो-पॉलिटिकल तनावों के बीच अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता बनाए रखना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढाँचे में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा परिषद का वर्तमान ढाँचा पुराना हो चुका है और यह आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ग्लोबल साउथ को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और प्रभाव बनाए रखने के लिए सुरक्षा परिषद में तत्काल और सार्थक सुधार अनिवार्य हैं।

‘यूनाइटेड नेशंस-80’ पहल का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह सुधारों के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान करती है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की विकासात्मक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखना आवश्यक है। विकासशील देशों की जरूरतों,संसाधनों और चुनौतियों को ध्यान में रखे बिना कोई भी सुधार अधूरा रहेगा।

मुलाकात के दौरान गुटेरेस ने भारत की भूमिका को वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में सराहा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन,सतत विकास,शांति स्थापना और डिजिटल समावेशन जैसे मुद्दों पर भारत ने हमेशा रचनात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एआई के क्षेत्र में भी भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा और विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से रखेगा।

राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के शेष कार्यकाल के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को अधिक लोकतांत्रिक,प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाने के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।

इससे एक दिन पहले गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। इस बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर विचार किया कि एआई का उपयोग शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में किस प्रकार किया जा सकता है,ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।

प्रधानमंत्री मोदी और गुटेरेस के बीच यह भी चर्चा हुई कि संयुक्त राष्ट्र एआई के नियमन और मानकीकरण में किस तरह रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। डिजिटल विभाजन को पाटने और तकनीक तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर दोनों नेताओं ने सहमति जताई।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन ऐसे समय में हुआ है,जब दुनिया एआई के अवसरों और चुनौतियों दोनों से जूझ रही है। एक ओर यह तकनीक नवाचार,उत्पादकता और सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है,वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग,डेटा सुरक्षा और नैतिकता से जुड़े प्रश्न भी सामने हैं। ऐसे में भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच इस विषय पर बढ़ता सहयोग वैश्विक नीति निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।

नई दिल्ली में हुई ये उच्चस्तरीय मुलाकातें केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में नई साझेदारियों और सुधारों की दिशा में एक संकेत मानी जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग,ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका और एआई के जिम्मेदार उपयोग पर जोर—ये सभी मुद्दे आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे के केंद्र में रहेंगे।

भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच यह संवाद न केवल तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाता है, बल्कि एक अधिक संतुलित,समावेशी और प्रभावी वैश्विक व्यवस्था की दिशा में भी कदम माना जा रहा है।