पीयूष गोयल ने स्कॉट मो और स्टीफन हार्पर से की मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा: पीयूष गोयल ने स्कॉट मो और स्टीफन हार्पर से की मुलाकात,आर्थिक सहयोग पर जोर

नई दिल्ली,6 मार्च (युआईटीवी)- भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के प्रीमियर स्कॉट मो और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने,व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और भविष्य में नई संभावनाओं को तलाशने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह बातचीत बेहद सार्थक रही। उन्होंने बताया कि कनाडा के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस बैठक में भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। गोयल ने अपने पोस्ट में लिखा कि दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही दोनों देशों ने लगातार संवाद बनाए रखने और आपसी साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब भारत और कनाडा अपने आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के बीच करीब 2.6 अरब डॉलर का दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ है,जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत कनाडा भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति करेगा,जिससे भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने वाले दशकों में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार करना चाहता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत ने 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। परमाणु ऊर्जा को कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अहम विकल्प माना जाता है। ऐसे में यूरेनियम की स्थिर और दीर्घकालिक आपूर्ति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारत में यूरेनियम का घरेलू उत्पादन भविष्य की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई विश्लेषकों का कहना है कि देश में मौजूद यूरेनियम संसाधन सीमित हैं और तेजी से बढ़ रहे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यह पर्याप्त नहीं होंगे। इसलिए भारत को अपने परमाणु रिएक्टरों को लगातार संचालित रखने के लिए यूरेनियम के आयात पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

इसी संदर्भ में कनाडा के साथ हुआ दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कनाडा दुनिया के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है और वहाँ के खनिज संसाधन वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से सस्केचेवान प्रांत यूरेनियम उत्पादन के लिए जाना जाता है और यहाँ की खदानें विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के नेतृत्व के साथ भारत की बातचीत को ऊर्जा सहयोग के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध भी लगातार विस्तार कर रहे हैं। दोनों देश कृषि, ऊर्जा,खनिज,शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएँ सफल रहती हैं,तो इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

इस बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग के अलावा निवेश,तकनीकी साझेदारी और व्यापारिक संवाद को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलते हालात के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा। विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।

यह मुलाकात भारत और कनाडा के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच व्यापार और ऊर्जा सहयोग इसी तरह आगे बढ़ता रहा,तो आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत हो सकती है और दोनों देशों को आर्थिक तथा ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।