नई दिल्ली,24 जनवरी (युआईटीवी)- भारत 26 जनवरी को पूरे उत्साह और गौरव के साथ अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की राजधानी नई दिल्ली न सिर्फ सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाएगी,बल्कि भारत की बदलती वैश्विक कूटनीति और आर्थिक प्राथमिकताओं का भी संदेश देगी। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह को खास बनाने वाली बात यह है कि यूरोपीय यूनियन के दो शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के दौरे पर हैं। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 28 जनवरी तक भारत में रहेंगे। उनके इस दौरे को भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनयिक और आर्थिक हलकों में इस बात को लेकर मजबूत कयास लगाए जा रहे हैं कि गणतंत्र दिवस के आसपास भारत-ईयू एफटीए को लेकर बड़ी घोषणा हो सकती है। माना जा रहा है कि 27 जनवरी को होने वाली भारत-ईयू समिट के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जा सकती है। यदि ऐसा होता है,तो यह भारत के अब तक के सबसे बड़े और सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक होगा,जो न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलते हालात और अमेरिकी टैरिफ नीति के चलते यूरोप अब अपने बाजार और साझेदारों में विविधता लाना चाहता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दावोस में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा था कि दावोस के तुरंत बाद उनका भारत दौरा इसी दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा, “अभी भी कुछ काम बाकी है,लेकिन हम एक ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट के अंतिम चरण में हैं। कुछ लोग इसे सभी डील्स की माँ कहते हैं। यह ऐसा समझौता होगा,जो करीब दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा।”
वॉन डेर लेयेन के इस बयान से यह साफ हो गया है कि यूरोपीय यूनियन भारत को सिर्फ एक व्यापारिक साझेदार के तौर पर नहीं,बल्कि भविष्य के वैश्विक आर्थिक पावरहाउस के रूप में देख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे डायनामिक क्षेत्रों के साथ व्यापार करना चाहता है और भारत इसमें एक स्वाभाविक और रणनीतिक विकल्प है। उनके मुताबिक,यह समझौता यूरोप को “फर्स्ट-मूवर एडवांटेज” देगा,यानी भारत जैसे उभरते बाजार में सबसे पहले मजबूत पकड़ बनाने का मौका।
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए पर बातचीत लंबे समय से चल रही है और इसे कई बार जटिल और चुनौतीपूर्ण भी माना गया है। हालाँकि,अब दोनों पक्षों के संकेतों से साफ है कि वार्ता अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को होने वाली भारत-ईयू समिट में एफटीए पर बातचीत के सफलतापूर्वक पूरा होने की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। इस घोषणा के लिए दोनों पक्ष एक संयुक्त दस्तावेज को अपनाएँगे,जिसके बाद इस समझौते को कानूनी प्रक्रिया के तहत यूरोपियन संसद और यूरोपियन काउंसिल से मंजूरी दिलाई जाएगी।
इस एफटीए के तहत सिर्फ व्यापार ही नहीं,बल्कि कई अन्य अहम क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की संभावना है। दोनों पक्ष एक सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं,जो मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और यूरोप के रिश्तों को और मजबूत करेगा। इसके अलावा,भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोपीय यूनियन में रोजगार और काम के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से एक मोबिलिटी पैक्ट पर भी सहमति बनने की उम्मीद है। इससे आईटी,इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और अन्य प्रोफेशनल सेक्टर्स में काम करने वाले भारतीयों को सीधा फायदा मिल सकता है।
यह समझौता इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्तीय वर्ष 2024 में भारत और ईयू के बीच करीब 135 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। एफटीए के लागू होने के बाद इसमें और तेज वृद्धि की उम्मीद है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर और आसान पहुँच मिलेगी,वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
भारत इस समझौते के तहत खासतौर पर अपने लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए बेहतर शर्तें चाहता है। टेक्सटाइल,लेदर,अपैरल,जेम्स व ज्वेलरी और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे क्षेत्रों में भारत जीरो-ड्यूटी एक्सेस पर जोर दे रहा है,ताकि इन सेक्टर्स से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकें। वहीं, यूरोपीय यूनियन की कुछ चिंताएँ भी हैं,जिनमें कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। इन पर अभी भी बातचीत जारी है,लेकिन दोनों पक्ष समाधान की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही इस समझौते की अहमियत को रेखांकित करते हुए इसे “सभी समझौतों की मां” करार दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौते के लिए बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर पहुँच सकते हैं।
गणतंत्र दिवस जैसे प्रतीकात्मक अवसर पर यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और एफटीए को लेकर बनता माहौल यह संकेत देता है कि भारत अपनी वैश्विक आर्थिक भूमिका को नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है। यदि यह समझौता तय समय पर फाइनल होता है,तो यह न सिर्फ भारत-ईयू संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगा,बल्कि वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में भी भारत की बढ़ती अहमियत को मजबूती से स्थापित करेगा।
