नई दिल्ली,31 मार्च (युआईटीवी)- भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूरोपीय संसद की वरिष्ठ सदस्य एंजेलिका नीबलर कर रही थीं। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के नए अध्याय,बढ़ते सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को लेकर व्यापक चर्चा की।
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि एंजेलिका नीबलर के नेतृत्व में आए यूरोपीय संसद के सदस्यों के साथ बातचीत बेहद सकारात्मक और सार्थक रही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं,जहाँ सहयोग का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। जयशंकर ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में यूरोपीय संसद इस साझेदारी को और मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगी।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों,नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और आर्थिक विकास के साझा दृष्टिकोण को लेकर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। ऐसे में इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों को दोनों पक्षों के बीच भरोसा और समझ बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है।
इससे पहले दिन में संसद भवन में भारत-यूरोपीय संसद संसदीय मित्रता समूह की पहली बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में यूरोपीय संसद के भारत के साथ संबंधों के प्रतिनिधिमंडल,जिसे डी-आईएन (भारत के साथ संबंधों के लिए प्रतिनिधिमंडल) कहा जाता है, ने भाग लिया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी एंजेलिका नीबलर ने ही किया। इस मौके पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस समूह की स्थापना संसदीय कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अनुराग ठाकुर,जो इस संसदीय मित्रता समूह के अध्यक्ष हैं,ने कहा कि वह भविष्य में इस तरह की और बैठकों की उम्मीद करते हैं,ताकि भारत और यूरोपीय संघ के बीच संवाद को और अधिक गहराई दी जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का मार्गदर्शन मिलने के लिए आभार भी व्यक्त किया। ठाकुर ने कहा कि दोनों पक्ष मिलकर एक मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए काम करेंगे,जो वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी है। इस महीने की शुरुआत में जयशंकर ने ब्रुसेल्स की यात्रा की थी,जहाँ उन्होंने यूरोपीय संघ के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ विस्तृत चर्चा की थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने एफटीए के तहत मौजूद “विशाल आर्थिक संभावनाओं” पर विचार किया था।
इस समझौते के माध्यम से व्यापार,निवेश,प्रौद्योगिकी,सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचाएगा,बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी अधिक स्थिर और मजबूत बनाएगा। इसके अलावा,डिजिटल तकनीक,हरित ऊर्जा और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी के नए अवसर खुल रहे हैं।
जयशंकर ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे-जैसे सहयोग का एजेंडा विस्तृत होगा,वैसे-वैसे भारत और यूरोपीय संघ के बीच आपसी सहजता और समझ भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सहमति इस बात का संकेत है कि वे वैश्विक चुनौतियों का सामना मिलकर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में यह नई ऊर्जा ऐसे समय में देखने को मिल रही है,जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव,आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ का एक साथ आना न केवल दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है,बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जयशंकर और यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई यह बैठक भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को एक नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। यह स्पष्ट संकेत है कि दोनों पक्ष आने वाले समय में अपने सहयोग को और अधिक गहरा और व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं,जिससे वैश्विक मंच पर उनकी भूमिका और भी मजबूत हो सके।
