संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव,क्षितिज त्यागी (तस्वीर क्रेडिट@anku_chahar)

भारत ने पाकिस्तान को कश्मीर टिप्पणी पर अंतर्राष्ट्रीय मंच में फटकार लगाते हुए कहा ‘अंतर्राष्ट्रीय मदद पर जिंदा विफल देश न दे उपदेश’

न्यूयॉर्क,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र की सातवीं बैठक में पाकिस्तान पर तीखा हमला किया और उसे अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर निर्भर एक असफल राष्ट्र करार दिया। भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि वह भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय अपनी असफलताओं पर ध्यान केंद्रित करे और अपने नागरिकों की समस्याओं का समाधान करे।

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव,क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के खिलाफ यह बयान दिया। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसके नेता अपनी सैन्य-आतंकवादी संरचनाओं से झूठ फैलाने का काम करते हैं और यह कोई नई बात नहीं है। त्यागी ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कोई टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है,क्योंकि पाकिस्तान खुद एक असफल राष्ट्र है,जो अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर निर्भर है और इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए वह लगातार अस्थिरता फैलाता है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत के रुख की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे। त्यागी ने इन क्षेत्रों में हुई प्रगति का जिक्र किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक बदलाव आए हैं।

भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद इन क्षेत्रों में जो बदलाव आए हैं,वह पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठ के विपरीत हैं। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सुधारों और विकास की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं,जो सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाते हैं। ये बदलाव केवल सशक्तीकरण,विकास और समृद्धि की ओर बढ़ने के संकेत नहीं हैं,बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश भी है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग बने रहेंगे।

त्यागी ने कहा, “यहाँ पर पाकिस्तान की तरफ से फैलाए जा रहे झूठ को ध्यान में रखते हुए,इन क्षेत्रों में भारत ने आतंकवाद को नकारा है और स्थिरता की दिशा में कई कदम उठाए हैं।” उनका कहना था कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने की वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई दशकों तक अस्थिरता रही है, लेकिन अब वहाँ की जनता को बेहतर भविष्य की उम्मीद है।

भारत ने पाकिस्तान द्वारा बार-बार किए गए झूठे आरोपों और निराधार बयानबाजी को लेकर भी अपनी चिंता जताई। पाकिस्तान के नेताओं द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ गलत सूचनाएँ फैलाना भारत के लिए अस्वीकार्य था। इस संदर्भ में, भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अपनी गलत नीतियों से बाहर निकले और अपने देश की आंतरिक समस्याओं का समाधान करे।

त्यागी ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान जैसे असफल राष्ट्र द्वारा इस मंच का उपयोग अपनी असफलताओं को छिपाने और भारत के खिलाफ गलत बयानबाजी करने के लिए किया जा रहा है।” पाकिस्तान ने हाल ही में ओआईसी (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) जैसे मंचों का इस्तेमाल करके अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया,लेकिन भारत ने इसका कड़ा विरोध किया।

भारत ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि उसे अपनी अस्वस्थ सनक से बाहर निकलकर ऐसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए,जो उसके अपने नागरिकों को प्रभावित करते हैं। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि भारत लोकतंत्र,प्रगति और अपने नागरिकों के सम्मान की दिशा में काम कर रहा है और यही ऐसे मूल्य हैं,जिन्हें पाकिस्तान को सीखने की जरूरत है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि,राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने 19 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बयान दिया था,जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए गलत सूचना अभियानों की कड़ी निंदा की थी और कहा था कि पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख गलत था। भारत ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपनी नीतियों और आतंकवादी गतिविधियों के बजाय अपने नागरिकों के लिए काम करे।

भारत का रुख स्पष्ट है कि पाकिस्तान को अपने आंतरिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। भारत ने यह साबित किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक प्रगति केवल भारत के राष्ट्रवाद और समृद्धि की ओर बढ़ते कदम का परिणाम है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तान को इस असफलता से बाहर निकलने के लिए अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा और भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने होंगे।