सिलिकॉन वैली में भारत-इजरायल की बड़ी पहल (तस्वीर क्रेडिट@CGISFO)

सिलिकॉन वैली में भारत-इजरायल की बड़ी पहल: एआई और साइबर सुरक्षा सहयोग को नई दिशा

वाशिंगटन,14 फरवरी (युआईटीवी)- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत और इजरायल ने तकनीकी सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से सिलिकॉन वैली में एक महत्वपूर्ण पहल की है। 11 फरवरी को कैलिफोर्निया के पैलो आल्टो में आयोजित “इंडिया-इजरायल एआई-साइबरसिक्योरिटी कनेक्ट” कार्यक्रम में 130 से अधिक स्टार्टअप संस्थापक,निवेशक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। इस कार्यक्रम ने न केवल दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने का संदेश दिया,बल्कि अमेरिका को भी इस त्रिपक्षीय सहयोग का अहम स्तंभ बताया।

कार्यक्रम की मेजबानी सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास,सैन फ्रांसिस्को में इज़राइल का वाणिज्य दूतावास और वेंचर डॉक ने संयुक्त रूप से की। इसका उद्देश्य भारत, अमेरिका और इजरायल के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,साइबर सुरक्षा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को संस्थागत रूप देना था। चर्चा का केंद्रीय विषय था—एआई के लिए साइबर सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के लिए एआई। यह थीम इस बात को रेखांकित करती है कि तकनीकी प्रगति और सुरक्षा अब एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।

भारत के सैन फ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्यदूत डॉ. के. श्रीकर रेड्डी ने अपने संबोधन में भारत और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और तकनीकी संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीनों देश—भारत, अमेरिका और इजरायल नवाचार के वैश्विक केंद्र हैं और जिम्मेदार एआई तथा मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र का विकास केवल राष्ट्रीय हित का प्रश्न नहीं है,बल्कि यह वैश्विक कल्याण से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल युग में सहयोग ही स्थायी और सुरक्षित प्रगति की कुंजी है।

रेड्डी ने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी एआई इम्पैक्ट समिट का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है। इस सम्मेलन का फोकस ‘लोग, ग्रह और प्रगति’ पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि इसका लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं,शिक्षा और सामाजिक समावेशन में व्यापक सुधार लाना होना चाहिए। भारत का प्रयास है कि एआई तकनीक को समावेशी विकास के साधन के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

इजरायल के पैसिफिक नॉर्थवेस्ट क्षेत्र के महावाणिज्यदूत मार्को सेरमोनेटा ने 1990 के दशक की शुरुआत में स्थापित भारत-इजरायल कूटनीतिक संबंधों की प्रगति को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। एआई,शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में संयुक्त बूट कैंप,हैकाथॉन और स्टार्टअप एक्सचेंज कार्यक्रमों के माध्यम से युवा नवप्रवर्तकों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार,सिलिकॉन वैली संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए स्वाभाविक मंच है,क्योंकि यहाँ वैश्विक तकनीकी कंपनियों और निवेशकों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता,साइबर सुरक्षा कंपनी ज़स्केलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जय चौधरी ने एआई को परिवर्तनकारी लेकिन संभावित रूप से खतरनाक तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की भूमिका दिल के सर्जन की तरह होती है,जिन्हें गहरी विशेषज्ञता और सूक्ष्म समझ की आवश्यकता होती है। एआई जहाँ उत्पादकता और स्वचालन को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है,वहीं यह साइबर अपराधियों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है।

चौधरी ने चेतावनी दी कि एआई इंटरनेट, मोबाइल और क्लाउड कंप्यूटिंग से भी बड़ी तकनीकी लहर साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कंपनियां प्रत्येक कर्मचारी के लिए 50 से 100 एआई एजेंट तैनात कर सकती हैं,जो निर्णय लेने,डेटा विश्लेषण और स्वचालन में मदद करेंगे,लेकिन यदि इन एआई एजेंटों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई और वे हैक हो गए,तो पूरा एंटरप्राइज सिस्टम गंभीर खतरे में पड़ सकता है। इसीलिए एआई आधारित सुरक्षा समाधानों को समानांतर रूप से विकसित करना अनिवार्य है।

स्टार्टअप संस्कृति पर बोलते हुए उन्होंने सफलता का मूल मंत्र कड़ी मेहनत और जुनून को बताया। उनके अनुसार,व्यक्ति वही बनता है,जो वह पढ़ता है,देखता है और जिन लोगों के साथ समय बिताता है। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अगर वे वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालना चाहते हैं,तो उन्हें निरंतर सीखने और जोखिम उठाने की मानसिकता विकसित करनी होगी।

एआई युग में साइबर सुरक्षा पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने डिजिटल परिवर्तन के साथ बढ़ते साइबर जोखिमों पर चिंता जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे कंपनियाँ अपने संचालन को क्लाउड और एआई प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर रही हैं,वैसे-वैसे हमलों की जटिलता और आवृत्ति भी बढ़ रही है। लाइटस्पीड वेंचर्स के पार्टनर गुरु चहल ने कहा कि साइबर सुरक्षा उद्योग की सबसे बड़ी समस्या कुशल पेशेवरों की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्यमी एआई मॉडल इस कौशल अंतर को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जो कंपनियाँ एआई की मदद से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता को स्केलेबल बनाएँगी,वे भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों में शामिल हो सकती हैं।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत और इजरायल दोनों ही साइबर सुरक्षा और रक्षा प्रौद्योगिकी में मजबूत क्षमताएँ रखते हैं। भारत का विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार और इजरायल की नवाचार-प्रधान स्टार्टअप संस्कृति मिलकर एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बना सकती है,जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित समाधान विकसित कर सके। अमेरिका इस सहयोग में निवेश और अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में मौजूद है।

पैलो आल्टो में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सम्मेलन नहीं था,बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी था कि एआई और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग समय की आवश्यकता है। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में अवसरों और खतरों दोनों का सामना करने के लिए साझा दृष्टिकोण और सामूहिक प्रयास ही आगे का रास्ता है। भारत और इजरायल की यह पहल भविष्य की तकनीकी साझेदारी का मजबूत आधार बन सकती है,जो न केवल तीन देशों बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी।