नई दिल्ली,8 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने विश्वसनीय साझेदार के रूप में एक बार फिर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए द्वीपीय देश सेशेल्स को 250 मीट्रिक टन खाद्यान्न की सहायता भेजी है। यह कदम दोनों देशों के बीच गहराते द्विपक्षीय संबंधों और भारत की ‘पड़ोसी पहले’ तथा ‘सागर’ नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने इस सहायता की पुष्टि करते हुए बताया कि यह 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज के तहत भेजी गई पहली खेप है। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में सेशेल्स को और भी सहायता प्रदान की जाएगी। इस घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत इस द्वीपीय देश के विकास और स्थिरता के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रखता है।
यह सहायता ऐसे समय में दी गई है,जब वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। छोटे द्वीपीय देशों के लिए इस तरह की सहायता बेहद अहम होती है,क्योंकि वे अक्सर बाहरी आयात पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भारत का यह कदम सेशेल्स की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
फरवरी में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया गया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और विकास,सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में भारत के सहयोग की सराहना की। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी को और मजबूत करने वाली साबित हुई।
भारत और सेशेल्स ने डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। भारत ने सेशेल्स में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में सहायता देने का आश्वासन दिया है,जिसमें विशेष रूप से डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह पहल सेशेल्स की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगी।
दोनों देशों के बीच ‘सस्टेनेबिलिटी, इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सिक्योरिटी थ्रू एन्हांस्ड लिंकज’ (सेशेल) नामक संयुक्त विजन के तहत सहयोग को और व्यापक बनाने की योजना बनाई गई है। इस विजन में सतत विकास,समुद्री सुरक्षा,रक्षा सहयोग,क्षमता निर्माण और समावेशी विकास जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर यह भी दोहराया कि भारत सेशेल्स के विकास एजेंडा में एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार बना रहेगा।
भारत द्वारा घोषित 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज में 125 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट और 50 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता शामिल है। यह पैकेज सेशेल्स में बुनियादी ढाँचा विकास,विभिन्न परियोजनाओं के वित्तपोषण,नागरिक और रक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण तथा समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए उपयोग किया जाएगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह सहयोग भारत की क्षेत्रीय भूमिका को भी मजबूत करता है।
भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों का इतिहास भी काफी पुराना और मजबूत रहा है। सेशेल्स की स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1976 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग लगातार गहराता गया है। रक्षा,समुद्री सुरक्षा,पर्यटन और विकास परियोजनाओं के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेशेल्स जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश के साथ भारत का सहयोग केवल विकास तक सीमित नहीं है,बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की दृष्टि से भी अहम है। हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत इस तरह के सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है।
सेशेल्स को भेजी गई खाद्यान्न सहायता केवल मानवीय पहल नहीं,बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। यह कदम दर्शाता है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ हर परिस्थिति में खड़ा रहने और उनके विकास में भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस सहयोग के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है,जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
