नई दिल्ली,24 नवंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के सभी कार्यक्रमों और विश्व नेताओं के साथ अपनी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों को सफलतापूर्वक संपन्न करने के बाद दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग से भारत के लिए रवाना हो गए। तीन दिनों के इस आधिकारिक दौरे में प्रधानमंत्री ने न केवल वैश्विक मुद्दों पर भारत की निर्णायक भूमिका को स्पष्ट रूप से रखा,बल्कि तकनीकी विकास,नवाचार,प्रतिभा गतिशीलता और मानव-केंद्रित प्रगति पर भी जोर दिया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और अब वह स्वदेश लौट रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार से शुरू हुए इस दौरे में कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की,जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों,जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज,विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला,इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी,इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली,अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा सहित कई प्रमुख वैश्विक हस्तियाँ शामिल थीं। इन मुलाकातों में आपसी सहयोग,वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा सुरक्षा,तकनीकी सहयोग,व्यापार संबंधों और नवाचार जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। इन वार्ताओं के जरिए भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत और सक्रिय भूमिका को फिर से स्थापित किया।
रविवार को शिखर सम्मेलन के तीसरे सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य की तकनीक और डिजिटल नवाचार पर केंद्रित एक नई वैश्विक सोच का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वित्त-केंद्रित और विशिष्ट तकनीक की जगह मानव-केंद्रित,वैश्विक और ओपन-सोर्स तकनीक को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली,अंतरिक्ष तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में भारत का समावेशी मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है,जहाँ तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने पर बल दिया जाता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि भारत फरवरी 2026 में ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ की मेजबानी करेगा और दुनिया को इस महत्वपूर्ण मंच का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने ‘सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय’ को अपनी तकनीकी सोच का आधार बनाया है,जहाँ विकास सभी के लिए और सभी की भागीदारी से हो। उन्होंने एआई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कहा कि अब दुनिया को केवल वर्तमान में रोजगार सृजन के बजाय भविष्य की क्षमताओं के निर्माण की दिशा में ध्यान देना होगा,ताकि युवा पीढ़ी आने वाली तकनीकी चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में जी-20 प्रतिभा गतिशीलता के लिए एक वैश्विक ढाँचा तैयार करेगा,जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और दुनिया भर के युवाओं को व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिभाओं का मुक्त प्रवाह न केवल आर्थिक प्रगति को तेज करेगा,बल्कि देशों के बीच तकनीकी सहयोग को भी मजबूत बनाएगा। उनकी यह दृष्टि तेजी से बदलते डिजिटल युग में एक नई दिशा प्रदान करती है,जहाँ नवाचार,कौशल विकास और तकनीकी साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका द्वारा प्रस्तुत जी-20 घोषणापत्र को भी स्वीकार किया,जिसमें आपदा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने,ऋण स्थिरता सुनिश्चित करने,न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करने और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। भारत ने इन सभी विषयों पर रचनात्मक भूमिका निभाते हुए वैश्विक दक्षिण के देशों की जरूरतों,चिंताओं और विकास लक्ष्यों को मजबूती से रखा।
जोहान्सबर्ग में हुई यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई,जब दुनिया आर्थिक मंदी,ऊर्जा संकट,जलवायु परिवर्तन और तकनीकी असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व और भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण संदेश देती है कि भारत विश्व मंच पर स्थिरता,सहयोग,नवाचार और संतुलित विकास का विश्वसनीय साझेदार है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे ने न केवल भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को मजबूत किया,बल्कि भारत की वैश्विक सहभागिता को भी और व्यापक बनाया। भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन बहुपक्षीय सहयोग,तकनीकी नेतृत्व और मानव-केंद्रित विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

