डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी (तस्वीर क्रेडिट@pranaybharat)

भारत ट्रंप 2.0 में ग्लोबल सप्लाई चेन में स्थिति को मजबूत कर सकता है

नई दिल्ली,23 नवंबर (युआईटीवी)- डोनाल्ड ट्रंप के अगले अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में वापस आने की संभावना के साथ,भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में एआई और सेमीकंडक्टर जैसे तकनीकी क्षेत्रों में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ (एमओपीडब्ल्यू) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत को ‘चीन + 1’ रणनीति और पिछले वर्षों में किए गए निवेशों का लाभ मिलेगा, जिससे यह अपनी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक,ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी कॉर्पोरेट कर कटौती की संभावना है,जिससे आईटी खर्च में बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा लाभ भारतीय आईटी कंपनियों को मिल सकता है। इसके अलावा,फार्मास्युटिकल और डिफेंस सेक्टर में भी भारत को नए अवसर मिल सकते हैं,खासकर अगर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग मजबूत होता है। यह भारत के फार्मा और रक्षा व्यवसायों को वैश्विक बाजार में बेहतर स्थिति प्रदान कर सकता है।

ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है,विशेष रूप से चीन से। इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। उभरते बाजारों के लिए यह स्थिति अवसर और चुनौतियों का मिश्रण ला सकती है।

मजबूत अमेरिकी डॉलर और उच्च टैरिफ के कारण कई देशों को निर्यात लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। यह विशेष रूप से आईटी और फार्मा सेक्टर जैसे क्षेत्रों पर असर डाल सकता है,जहाँ लागत-संवेदनशीलता ज्यादा होती है।

‘चीन + 1’ रणनीति के तहत भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को विनिर्माण और व्यापार संचालन में नई भूमिका मिल सकती है। मैक्सिको जैसे देश,जो चीन से हटकर विनिर्माण संचालन का विकल्प दे सकते हैं,इन परिस्थितियों से लाभ उठा सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप के प्रशासन के दौरान चीन के साथ तनाव बढ़ने की संभावना है। इसका असर वैश्विक गठबंधनों पर पड़ेगा। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर सकते हैं,जबकि यूरोपीय संघ अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र से हटकर अधिक आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर सकता है।

भारत के पास अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत करने का अवसर है। तकनीकी क्षेत्र, विशेष रूप से एआई और सेमीकंडक्टर में,भारत अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। ‘पीएलआई (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव)’ जैसी सरकारी योजनाओं के साथ,भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में नई भूमिका निभाने का मौका मिलेगा।

डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल आर्थिक विकास और व्यापार तनावों का मिश्रण ला सकता है। भारत को इन परिस्थितियों में सतर्क और सक्रिय रहना होगा। ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियाँ और चीन के साथ बढ़ते तनाव के चलते भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। हालाँकि, अमेरिकी नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन और भारत पर उनके दीर्घकालिक प्रभावों पर निगरानी रखना जरूरी होगा।