व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (तस्वीर क्रेडिट@ArianaAriana65)

भारत-अमेरिका ऊर्जा और व्यापार समझौता: रूसी तेल पर ब्रेक,अमेरिकी निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार

वाशिंगटन,4 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा और व्यापार को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक समझौता सामने आया है,जिसने वैश्विक भू-राजनीति और ऊर्जा बाजारों में हलचल मचा दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने मंगलवार (स्थानीय समय) को दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और नए व्यापार समझौते के तहत अब वह अमेरिका से और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है,जब यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कैरोलिन लीविट ने कहा कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। लीविट के मुताबिक,भारत ने न सिर्फ रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति जताई है,बल्कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों के आयात को बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीदने पर विचार कर सकता है,जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

लीविट ने कहा, “जैसा कि आप सभी ने कल देखा,राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ एक और बड़ा व्यापार समझौता किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की। दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से अधिक तेल खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। संभव है कि भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीदे,जिससे अमेरिका और अमेरिकी जनता को सीधा लाभ होगा।” उनके इस बयान को व्हाइट हाउस की ओर से एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में पेश किया गया।

ऊर्जा के साथ-साथ निवेश के मोर्चे पर भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। कैरोलिन लीविट के अनुसार,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिवहन,ऊर्जा और कृषि जैसे क्षेत्रों में अमेरिका में करीब 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निवेश दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगा। व्हाइट हाउस ने इसे “एक और शानदार व्यापार समझौता” करार दिया है।

इस समझौते की पृष्ठभूमि में सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप का वह बयान भी अहम माना जा रहा है,जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के तहत वाशिंगटन ने भारत के प्रति “दोस्ती और सम्मान” दिखाते हुए पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्हें अपने “सबसे करीबी दोस्तों में से एक” और “भारत के शक्तिशाली और सम्मानित नेता” बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करेगा,जिससे द्विपक्षीय व्यापार को और गति मिलेगी। ट्रंप के इन बयानों को अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

हालाँकि,भारत की ओर से इस पूरे मसले पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि भारत वास्तव में रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करता है,तो यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव होगा। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा था,जिससे उसे घरेलू बाजार में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली। ऐसे में रूस से तेल आयात बंद करने या कम करने का फैसला आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने का विकल्प भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का अवसर हो सकता है,लेकिन इसकी लागत और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ भी होंगी। अमेरिकी तेल आमतौर पर रूसी तेल की तुलना में महँगा माना जाता है,जबकि वेनेजुएला पर भी लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंध रहे हैं। ऐसे में इस त्रिपक्षीय ऊर्जा समीकरण का व्यावहारिक स्वरूप आने वाले समय में और स्पष्ट होगा।

कूटनीतिक दृष्टि से यह समझौता भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव,रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव के बीच अमेरिका भारत को एक अहम साझेदार के रूप में देख रहा है। वहीं भारत भी अमेरिका के साथ व्यापार,रक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखा रहा है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के दावों और राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए अध्याय की तस्वीर पेश की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ये घोषणाएँ जमीन पर किस हद तक उतरती हैं और भारत अपनी ऊर्जा नीति तथा व्यापार रणनीति में किस तरह के ठोस बदलाव करता है। आने वाले दिनों में इस समझौते के वास्तविक प्रभाव और दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होंगी।