नई दिल्ली,7 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देते हुए दोनों देशों ने व्यापार समझौते को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक साझा फ्रेमवर्क पर सहमति बना ली है,जो आगे चलकर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (बीटीए) की नींव बनेगा। दोनों देशों ने इस अंतरिम समझौते को आपसी संबंधों में एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” करार दिया है और कहा है कि यह डील न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा देगी,बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला और भरोसेमंद बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वे आपसी और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार से जुड़े एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। यह फ्रेमवर्क उन वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है,जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाजार पहुँच को बढ़ाना,व्यापार बाधाओं को कम करना और दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक स्थायी ढाँचा तैयार करना रहा है।
इस समझौते को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है,जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव,आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और संरक्षणवादी नीतियों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत और अमेरिका का यह कदम दुनिया को यह संकेत देता है कि दोनों देश खुले,नियम-आधारित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंतरिम समझौता केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं है,बल्कि यह व्यापक बीटीए की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक कदम है।
समझौते के तहत भारत ने यह सहमति जताई है कि वह अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों पर और अमेरिका से आने वाले कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर टैरिफ को पूरी तरह समाप्त करेगा या उसमें उल्लेखनीय कमी करेगा। इसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (डीडीजीएस),जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार,ट्री नट्स,ताजे और प्रोसेस्ड फल,सोयाबीन तेल,वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं पर शुल्क में कटौती से अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुँच मिलेगी,जबकि भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों को भी अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिल सकता है।
दूसरी ओर,अमेरिका ने भी इस समझौते के तहत भारत के कई मूल और श्रम-प्रधान उत्पादों पर 18 प्रतिशत की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करने पर सहमति जताई है। इस दायरे में कपड़ा और परिधान,चमड़ा और जूते,प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक रसायन,घर की सजावट से जुड़े सामान,हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारत की निर्यात क्षमता पहले से ही मजबूत मानी जाती है और अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की माँग भी लगातार बनी हुई है। ऐसे में यह टैरिफ व्यवस्था भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल सकती है।
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि अंतरिम समझौते की सफलता आगे चलकर भारतीय सामानों की एक और व्यापक श्रृंखला पर टैरिफ हटाने का रास्ता साफ कर सकती है। इसमें जेनेरिक दवाएँ,रत्न और हीरे तथा विमान के पुर्जे जैसे उत्पाद शामिल हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ भारत की वैश्विक हिस्सेदारी मजबूत है और अमेरिका में इनकी माँग लगातार बनी हुई है। खास तौर पर फार्मास्युटिकल सेक्टर में भारत को “दुनिया की फार्मेसी” के रूप में जाना जाता है और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की भूमिका बेहद अहम है।
बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वाशिंगटन कुछ भारतीय विमानों और विमान के पुर्जों पर लगाए गए टैरिफ को हटाएगा। ये शुल्क पहले एल्यूमीनियम,स्टील और तांबे के आयात से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा घोषणाओं के तहत लगाए गए थे। इस कदम से भारत के एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है और दोनों देशों के बीच उच्च तकनीक वाले उद्योगों में सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
ऑटोमोटिव सेक्टर के लिहाज से भी यह समझौता भारत के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। समझौते के अनुसार,भारत को ऑटोमोटिव पुर्जों के लिए एक विशेष रियायती शुल्क व्यवस्था दी जाएगी। ये पुर्जे आमतौर पर अमेरिका द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ के दायरे में आते हैं। इस रियायत से भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग को अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा,जबकि अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग को भी भरोसेमंद और किफायती सप्लाई चेन का लाभ मिल सकेगा।
फार्मास्युटिकल उद्योग को लेकर संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत को इस क्षेत्र में और भी लाभ हो सकता है। जेनेरिक दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री से जुड़े अंतिम निर्णय अमेरिकी धारा 232 की जाँच पर निर्भर करेंगे। इसके बावजूद यह स्पष्ट किया गया है कि ये उत्पाद अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा बाजार में भारत के प्रमुख निर्यातों में शामिल हैं और दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के इच्छुक हैं।
शुल्क से आगे बढ़ते हुए,भारत और अमेरिका ने कुछ अहम क्षेत्रों में एक-दूसरे को प्राथमिक बाजार पहुँच देने पर भी सहमति जताई है। दोनों देश “रूल्स ऑफ ओरिजिन” यानी मूल के नियम स्थापित करेंगे,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समझौते के लाभ मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को ही मिलें। इसके अलावा,दोनों पक्ष उन नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चर्चा करेंगे,जो लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार में अड़चन बनती रही हैं।
भारत ने अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति जताई है। यह मुद्दा अमेरिकी कंपनियों द्वारा लगातार उठाया जाता रहा है,खासकर कीमत नियंत्रण और नियामक प्रक्रियाओं को लेकर। इसके साथ ही दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति बनाई है कि प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को खत्म किया जाएगा,जिनके कारण अमेरिकी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी उत्पादों की भारतीय बाजार में पहुँच में देरी होती थी।
संयुक्त बयान के अनुसार,भारत ने यह वादा किया है कि समझौते के लागू होने के छह महीने के भीतर वह यह तय करेगा कि पहचाने गए सेक्टरों में अमेरिकी या अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं। इसमें टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से जुड़ी जरूरतें भी शामिल हैं। इसी तरह की प्रतिबद्धता उन पुरानी बाधाओं को लेकर भी जताई गई है,जो अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के भारतीय बाजार में प्रवेश को प्रभावित करती रही हैं।
इस समझौते में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को मिलकर हल करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया है। इसके तहत भारत ने अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के व्यापार में मौजूद नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर सहमति जताई है। बयान में यह भी कहा गया है कि यदि किसी भी देश द्वारा टैरिफ में कोई बदलाव किया जाता है,तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा और संशोधन कर सकता है। यह प्रावधान समझौते को लचीला बनाता है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार समायोजन की गुंजाइश देता है।
डील के अनुसार,भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की औपचारिक बातचीत के माध्यम से बाजार पहुँच के अवसरों का और विस्तार करने की दिशा में काम करेंगे। अमेरिका ने यह भी पुष्टि की है कि वह बीटीए वार्ताओं के दौरान भारत के इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार करेगा कि भारतीय सामानों पर टैरिफ को और कम किया जाए। यह संकेत देता है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध और अधिक गहरे तथा व्यापक हो सकते हैं।
भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की यह रूपरेखा दोनों देशों के रिश्तों में एक नई ऊर्जा का संचार करती है। यह न सिर्फ आर्थिक सहयोग को मजबूती देगी,बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नया आयाम प्रदान करेगी। वैश्विक मंच पर बदलते समीकरणों के बीच यह समझौता भारत और अमेरिका को भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जब इस अंतरिम समझौते को व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते में बदला जाएगा,तब इसके दूरगामी प्रभाव न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर,बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकते हैं।
