शुभांशु शुक्ला (तस्वीर क्रेडिट@pankajdubey79)

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की वापसी को लेकर परिवार में उत्साह,आईएसएस से वापसी का काउंटडाउन शुरू

लखनऊ,14 जुलाई (युआईटीवी)- भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के 15 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से भारत लौटने की खबर से उनके परिवार और पूरे देश में गर्व,उत्साह और भावुकता का माहौल है। जैसे ही उनके सकुशल लौटने की आधिकारिक पुष्टि हुई,उत्तर प्रदेश के उनके पैतृक घर में सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ एक विशेष आस्था और गर्व का रंग देखने को मिला।

शुभांशु के पिता शंभु दयाल शुक्ला,माँ आशा शुक्ला और बहन शुचि मिश्रा ने इस ऐतिहासिक क्षण पर जहाँ ईश्वर का आभार जताया,वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की नेतृत्व क्षमता की भी जमकर सराहना की।

शुभांशु के पिता शंभु दयाल शुक्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा,”आज सावन का पहला सोमवार था। हमने मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और घर में भी विशेष पूजा की। भोलेनाथ की कृपा से यह मिशन सफल हुआ है। हमें पूरा विश्वास है कि उन्हीं की कृपा से शुभांशु सकुशल लौट आएँगे।”

उन्होंने यह भी बताया कि शुभांशु ने इस मिशन में दिए गए सभी वैज्ञानिक और तकनीकी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है,जो पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने उत्साहपूर्वक कहा, “सारे जहाँ से अच्छा हमारा हिंदुस्तान अब और भी बेहतर हो गया है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और राष्ट्र के संकल्प के बिना संभव नहीं थी। मैं उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद देता हूँ।”

शुभांशु की माँ आशा शुक्ला ने अपने बेटे की उपलब्धि और सुरक्षित वापसी की खबर पर भावुक होते हुए कहा,“घर में खुशी और गर्व का माहौल है। जब से हमें पता चला कि शुभांशु 15 जुलाई को लौट रहा है,हमने भगवान शिव से उसकी रक्षा और शुभ वापसी की प्रार्थना शुरू कर दी थी।”

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हिंदुस्तान पहले से ही महान है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह और भी बेहतर बन गया है। उनके विजन और सहयोग से ही यह ऐतिहासिक मिशन सफल हो सका।”

शुभांशु की बहन शुचि मिश्रा ने कहा,“हम सभी बहुत उत्साहित हैं,लेकिन थोड़ा नर्वस भी महसूस कर रहे हैं। यह मिशन का अंतिम और सबसे नाजुक चरण है-स्प्लैशडाउन। एक बार जब यह सफलतापूर्वक हो जाएगा,तब हमारी साँसे पूरी तरह से राहत पाएँगी।”

शुचि ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को परिवार ने मंदिर जाकर विशेष पूजा की और अब तक की सफलता के लिए भगवान का धन्यवाद किया। उन्होंने साझा किया कि शुभांशु ने अंतरिक्ष से संपर्क में रहते हुए बताया था कि उन्होंने मिशन के सभी वैज्ञानिक प्रयोग पूरे कर लिए हैं और वह इस बात से संतुष्ट हैं।

हालांकि,शुचि ने यह भी कहा कि, “भाई थोड़े उदास थे क्योंकि वे और कुछ दिन अंतरिक्ष में रहना चाहते थे,लेकिन वे जानते हैं कि यह मिशन एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ जुड़ा है और उसकी समयसीमा और सुरक्षा सर्वोपरि है।”

शुभांशु की बहन ने बताया कि अंतरिक्ष से भारत को देखने के बाद उनका भाई बेहद भावुक हो गया था। “उन्होंने कहा कि ऊपर से देखा जाए तो भारत की विविधता और एकता बेहद सुंदर दिखती है। यह अनुभव ही उन्हें भारत की महानता का वास्तविक एहसास कराता है।”

शुचि ने यह भी बताया कि इस मिशन में शुभांशु को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष प्रेरणा मिली। “यह मिशन प्रधानमंत्री मोदी के विजन का हिस्सा था। उन्होंने हमेशा भारतीय युवाओं और वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।”

शुचि ने गर्व से कहा, “140 करोड़ भारतीयों का समर्थन और प्रार्थना शुभांशु के साथ है। यह एक ऐसी शक्ति है,जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हमें विश्वास है कि ईश्वर और देश की शुभकामनाएँ हमारे भाई को सुरक्षित भारत वापस लाएँगी।”

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इस गौरवशाली क्षण में जहाँ वैज्ञानिक उपलब्धि और राष्ट्रभक्ति का संगम है,वहीं एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की आस्था,पूजा और संस्कारों का भी योगदान स्पष्ट दिखता है।

शुभांशु शुक्ला केवल एक अंतरिक्ष यात्री नहीं,बल्कि आज के भारत का प्रतीक बन चुके हैं,जो वैज्ञानिक सोच,सांस्कृतिक आस्था और राष्ट्रीय गर्व तीनों को एक साथ लेकर चलता है।

अब पूरे देश की निगाहें 15 जुलाई पर टिकी हैं,जब शुभांशु की वापसी होगी और देश एक बार फिर ‘जय विज्ञान,जय भारत’ के नारे के साथ उसका स्वागत करेगा।