मुंबई,7 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तेल तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। शुक्रवार को अंजाम दिए गए एक साहसिक और उच्च तकनीक से लैस समुद्र–हवाई समन्वित ऑपरेशन में तटरक्षक बल ने तीन संदिग्ध जहाजों को पकड़कर अवैध तेल कारोबार की एक जटिल और संगठित श्रृंखला का खुलासा किया। यह कार्रवाई न केवल भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था को लागू करने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश के रूप में देखी जा रही है।
तटरक्षक बल की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार,यह तस्करी गिरोह संघर्षग्रस्त और अस्थिर देशों से सस्ता तेल और तेल आधारित कार्गो समुद्र के रास्ते लाकर अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में बेचता था। इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध और तकनीकी रूप से उन्नत थी। तस्कर मिड-सी ट्रांसफर की पद्धति का इस्तेमाल करते थे,जिसके तहत खुले समुद्र में एक जहाज से दूसरे मोटर टैंकर में तेल का अवैध हस्तांतरण किया जाता था। इस तरीके से वे न केवल भारी मुनाफा कमा रहे थे,बल्कि तटीय देशों को मिलने वाले शुल्क और करों से भी बच निकलते थे। भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा के लिए यह गतिविधियां गंभीर चुनौती बन चुकी थीं।
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत भारतीय तटरक्षक बल के तकनीक-सक्षम निगरानी तंत्र से हुई। निगरानी प्रणाली ने भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र में एक मोटर टैंकर की संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा। जहाज के मार्ग,गति और व्यवहार में असामान्य पैटर्न पाए गए,जिससे यह संदेह गहराया कि वह किसी अवैध गतिविधि में शामिल हो सकता है। इसके बाद तटरक्षक बल ने डिजिटल जाँच और डेटा पैटर्न विश्लेषण के जरिए उस जहाज के संपर्क में आ रहे दो अन्य पोतों की पहचान की। इन दोनों जहाजों की गतिविधियाँ भी एक ही समय और क्षेत्र में संदिग्ध रूप से मेल खा रही थीं,जिससे यह स्पष्ट होने लगा कि समुद्र में किसी बड़े अवैध ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है।
5 फरवरी को तटरक्षक बल ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में इन तीनों संदिग्ध जहाजों को रोका। यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें समुद्र तथा हवा दोनों से निगरानी और समन्वय किया गया। जैसे ही जहाजों को रोका गया,तटरक्षक बल की विशेषज्ञ बोर्डिंग टीम ने उन पर चढ़कर गहन तलाशी अभियान शुरू किया। जहाजों पर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक डेटा,नेविगेशन सिस्टम और संचार उपकरणों की बारीकी से जाँच की गई। साथ ही,शिपिंग दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और चालक दल के सदस्यों से लंबी पूछताछ की गई।
जाँच के दौरान धीरे-धीरे तस्करी की पूरी श्रृंखला और अपराधियों की कार्यप्रणाली सामने आने लगी। प्रारंभिक जाँच में यह खुलासा हुआ कि ये जहाज कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए बार-बार अपनी पहचान और विवरण बदलते थे। जहाजों के नाम,झंडे और पंजीकरण से जुड़े विवरणों में समय-समय पर बदलाव किए जाते थे,ताकि उनकी वास्तविक गतिविधियों को छिपाया जा सके। इसके अलावा,इन पोतों के मालिक विदेशों में स्थित बताए जा रहे हैं और यह तस्करी नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ है। अलग-अलग देशों में बैठे संचालक पूरे ऑपरेशन का समन्वय करते थे,जिससे यह नेटवर्क और भी जटिल बन जाता था।
तटरक्षक बल के अधिकारियों के अनुसार,यह गिरोह अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र का फायदा उठाकर लंबे समय से अवैध कारोबार कर रहा था। खुले समुद्र में होने वाले मिड-सी ट्रांसफर को ट्रैक करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है,लेकिन भारत की उन्नत डिजिटल निगरानी क्षमता और खुफिया विश्लेषण ने इस नेटवर्क को पकड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय तटरक्षक बल अब पारंपरिक गश्त के साथ-साथ आधुनिक तकनीक,डेटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस-आधारित रणनीतियों का प्रभावी इस्तेमाल कर रहा है।
फिलहाल,तटरक्षक बल इन तीनों जहाजों को आगे की विस्तृत जाँच के लिए मुंबई लाने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद इन्हें भारतीय कस्टम विभाग और अन्य संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंपा जाएगा,ताकि तस्करी से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की जाँच कर सख्त कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी सहयोग किया जा सकता है,क्योंकि नेटवर्क की जड़ें कई देशों तक फैली हुई हैं।
भारतीय तटरक्षक बल ने अपने बयान में कहा है कि यह अभियान देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्रवाई न केवल अवैध तेल कारोबार पर करारा प्रहार है,बल्कि उन अंतर्राष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क्स के लिए भी चेतावनी है,जो समुद्र को कानून से परे क्षेत्र मानकर इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। तटरक्षक बल ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि के खिलाफ कड़ी और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।
इस सफल ऑपरेशन के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को लागू करने में एक जिम्मेदार,सतर्क और सक्षम राष्ट्र की भूमिका निभा रहा है।
