ग्रेटर नोएडा,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खान चंद सिंह का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से लीवर कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी हालत पिछले कुछ दिनों से लगातार नाजुक बनी हुई थी। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार उन्हें चौथे स्टेज का लीवर कैंसर था और इलाज के बावजूद उनकी सेहत में सुधार नहीं हो पा रहा था। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजकर 36 मिनट पर उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली।
बताया गया है कि 21 फरवरी को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था। अस्पताल प्रशासन की ओर से सुबह लगभग 5 बजे उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की गई। यह खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन तुरंत अस्पताल पहुँचे और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उनका पार्थिव शरीर घर ले जाया गया,जहाँ अंतिम दर्शन के लिए रिश्तेदारों और परिचितों का तांता लग गया।
पिता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह राष्ट्रीय टीम का साथ छोड़कर तुरंत घर लौट आए थे। उस समय वह चेन्नई में टीम इंडिया के साथ अभ्यास सत्र में शामिल थे। टी-20 विश्वकप के दौरान उन्हें परिवार के पास आने के लिए टीम कैंप छोड़ना पड़ा था। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने और पिता की देखभाल में समय बिताने के बाद वह 25 फरवरी को दोबारा चेन्नई लौटे और टीम से जुड़ गए। हालाँकि,26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए सुपर-8 मुकाबले में वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे और सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के रूप में टीम के साथ मौजूद रहे।
खान चंद सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वे सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। रिंकू सहित उनके पाँचों बेटे पिता का हाथ बँटाते थे। परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए वे बाइक पर दो-दो गैस सिलेंडर रखकर घरों और होटलों तक पहुँचाया करते थे। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। रिंकू सिंह ने कई मौकों पर अपने पिता के संघर्ष और त्याग का जिक्र किया है,यह कहते हुए कि उनकी सफलता के पीछे पिता का आशीर्वाद और मेहनत की सीख ही सबसे बड़ी ताकत रही।
क्रिकेट की दुनिया में पहचान बनाने से पहले रिंकू को भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुरुआती दिनों में मोहल्ले के दोस्तों के साथ मिलकर पैसे जुटाए जाते थे,ताकि गेंद और अन्य सामान खरीदा जा सके। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अपने खेल को निखारा। आज वह भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा बन चुके हैं,लेकिन उनके जीवन की यह यात्रा आसान नहीं रही। उनके पिता ने हमेशा उन्हें हिम्मत दी और कठिन परिस्थितियों में भी सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी।
खान चंद सिंह के निधन की खबर फैलते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के जरिए रिंकू और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने भी उनके परिवार के संघर्ष को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी का कहना है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार को एकजुट रखा और अपने बच्चों को ईमानदारी और मेहनत का रास्ता दिखाया।
रिंकू सिंह के लिए यह समय बेहद भावुक और कठिन है। एक ओर वह देश के लिए खेल रहे हैं,वहीं दूसरी ओर पिता के निधन का गहरा आघात झेल रहे हैं। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि रिंकू अपने पिता से बेहद जुड़े हुए थे और उनकी तबीयत को लेकर लगातार चिंतित रहते थे। अब उनके जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं।
खान चंद सिंह का अंतिम संस्कार पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किया जाएगा। उनके निधन से न केवल परिवार,बल्कि पूरे इलाके में शोक का माहौल है। रिंकू सिंह की सफलता की कहानी में उनके पिता का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देने वाले इस पिता को खेल जगत और समाज हमेशा सम्मान के साथ याद करेगा।
