अमेरिका में डेमोक्रेट उम्मीदवार भारतीय मूल के जोहरान ममदानी (तस्वीर क्रेडिट@DrSrinubabu)

भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने रचा इतिहास: न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बने,ट्रंप और मस्क की आलोचनाओं के बावजूद दर्ज की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली,5 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने इतिहास रच दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ममदानी ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर पद का चुनाव जीतकर न केवल डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत दिलाई,बल्कि न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनने का गौरव भी हासिल किया। बुधवार को घोषित हुए परिणामों में ममदानी ने निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू कुओमो को कड़े मुकाबले में हराकर जीत दर्ज की। अब वे 1 जनवरी, 2026 को अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली महानगर न्यूयॉर्क का नेतृत्व संभालेंगे।

जोहरान ममदानी की जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। एक ओर यह अमेरिका की राजनीति में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है,वहीं दूसरी ओर यह मुस्लिम समुदाय के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। ममदानी की इस जीत ने उन तमाम आलोचनाओं और राजनीतिक हमलों को भी पीछे छोड़ दिया,जो चुनाव प्रचार के दौरान उन पर किए गए थे।

जोहरान ममदानी का जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। वे प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर और युगांडा के जाने-माने विद्वान महमूद ममदानी के पुत्र हैं। उनका परिवार मूल रूप से भारतीय है,जो पीढ़ियों पहले युगांडा में बस गया था। ममदानी का बचपन युगांडा और दक्षिण अफ्रीका में बीता,जिसके बाद उनका परिवार अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में बस गया। यहीं से जोहरान ने अपनी शिक्षा पूरी की और धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय होते चले गए।

ममदानी न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में पहले से ही सक्रिय थे और अपनी सामाजिक पहलों के लिए काफी लोकप्रिय भी थे। उन्होंने आवास,शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई थी। अपने चुनाव प्रचार में उन्होंने न्यूयॉर्क को “सबके लिए समान अवसरों वाला शहर” बनाने का वादा किया था। ममदानी ने कहा था कि “न्यूयॉर्क को केवल अमीरों का शहर नहीं,बल्कि मेहनतकश लोगों का भी शहर बनाना होगा।” यही संदेश आम मतदाताओं के बीच गूँजा और उन्हें भारी समर्थन मिला।

चुनाव के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में जोहरान ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में सिटी हॉल में खुलती हुई न्यूयॉर्क मेट्रो ट्रेन दिखाई दे रही थी,जिसकी दीवार पर लिखा था — “जोहरान फॉर न्यू यॉर्क सिटी ”। वीडियो के माध्यम से उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि न्यूयॉर्क शहर अब एक नई दिशा में आगे बढ़ने जा रहा है। सिटी हॉल वही जगह है,जहाँ से मेयर पूरे शहर का प्रशासन चलाते हैं।

जोहरान ममदानी ने इस साल जून में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में भी बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। उस समय उन्होंने पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को मात दी थी,जिन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मेयर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की थी। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार कर्टिस स्लीवा ने हालाँकि,कुओमो के खिलाफ बढ़ते दबाव के बावजूद चुनाव से अपना नाम वापस नहीं लिया,जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। इसके बावजूद ममदानी ने अपने प्रगतिशील एजेंडे,जमीनी अभियान और जनसंपर्क के दम पर मतदाताओं का विश्वास जीत लिया।

हालाँकि,यह चुनाव विवादों से भी घिरा रहा। चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उद्योगपति एलन मस्क ने ममदानी पर खुलकर निशाना साधा। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कई पोस्ट लिखे,जिनमें उन्होंने ममदानी को “कम्युनिस्ट उम्मीदवार” बताया और दावा किया कि अगर वह चुने गए तो न्यूयॉर्क शहर की संघीय फंडिंग कम कर दी जाएगी।

ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा, “अगर कम्युनिस्ट उम्मीदवार जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुने जाते हैं,तो बहुत कम संभावना है कि मैं इस शहर को न्यूनतम आवश्यक राशि से अधिक कोई संघीय फंड दूँ। अगर कोई यहूदी व्यक्ति ममदानी को वोट देता है,तो वह मूर्ख है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ममदानी यहूदी विरोधी हैं और उनके नेतृत्व में न्यूयॉर्क शहर “कम्युनिस्ट प्रयोगशाला” बन जाएगा।

ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि “यदि यह कम्युनिस्ट मेयर चुना जाता है,तो यह महान शहर कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। यह शहर की बर्बादी की शुरुआत होगी।” ट्रंप के इन बयानों की काफी आलोचना हुई और कई डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे धार्मिक और नस्लीय भेदभाव का उदाहरण बताया।

एलन मस्क ने भी चुनाव के दौरान ममदानी की आलोचना की। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दावा किया कि न्यूयॉर्क सिटी के बैलेट पेपर में ममदानी का नाम दो बार छपा है,जिसे उन्होंने “बैलेट स्कैम” कहा। मस्क ने लिखा, “यह लोकतंत्र का मजाक है। यहाँ आईडी की कोई जरूरत नहीं है और एक ही उम्मीदवार का नाम दो बार है। यह चुनाव पारदर्शी नहीं है।” हालाँकि,न्यूयॉर्क सिटी इलेक्शन कमीशन ने बाद में इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि बैलेट पेपर में कोई त्रुटि नहीं थी।

इन तमाम विवादों,आलोचनाओं और राजनीतिक हमलों के बावजूद जोहरान ममदानी ने अपनी सादगी,दूरदर्शी सोच और सामाजिक सरोकारों के दम पर जनता का दिल जीत लिया। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है,जहाँ विविधता,समावेश और समानता जैसे मूल्य केंद्र में हैं।

न्यूयॉर्क सिटी की आबादी विविध सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि से आती है और ममदानी की जीत इस बात का संकेत है कि यह शहर अभी भी अपने उदार और प्रगतिशील विचारों पर कायम है। विश्लेषकों का कहना है कि ममदानी की यह सफलता दक्षिण एशियाई मूल के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी,जो अमेरिकी राजनीति में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि जोहरान ममदानी अपने चुनावी वादों को कितनी मजबूती से जमीन पर उतार पाते हैं। वे जनवरी 2026 में जब न्यूयॉर्क सिटी के सिटी हॉल में पदभार ग्रहण करेंगे,तो यह न केवल उनके लिए,बल्कि भारतीय मूल के हर अमेरिकी के लिए गर्व का क्षण होगा — एक ऐसा पल जब भारतवंशियों ने फिर से दुनिया के सबसे प्रभावशाली शहरों में से एक की दिशा तय करने का अवसर प्राप्त किया है।