पणजी,8 नवंबर (युआईटीवी)- गोवा में जारी फिडे विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट में भारतीय दल का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के शीर्ष रैंकिंग खिलाड़ी अर्जुन एरिगैसी और अनुभवी ग्रैंडमास्टर पेंटाला हरिकृष्णा ने अपने-अपने मुकाबले शानदार ढंग से जीतकर अगले दौर में जगह पक्की कर ली है। वहीं मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश,आर. प्रज्ञानंदा और विदित गुजराती ने अपने मुकाबले ड्रॉ खेलकर संघर्ष को अगले दौर तक जीवित रखा है।
फिडे विश्व कप की यह प्रतियोगिता इस बार भारत में आयोजित हो रही है और इसमें कुल 82 देशों के 206 शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। टूर्नामेंट का आयोजन गोवा में 31 अक्टूबर से शुरू हुआ है और यह 27 नवंबर तक चलेगा। इस बार विश्व कप ट्रॉफी का नाम भारत के महानतम शतरंज खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद के सम्मान में “विश्वनाथन आनंद ट्रॉफी” रखा गया है। टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि 17.58 करोड़ रुपये रखी गई है,जो इसे अब तक के सबसे प्रतिष्ठित शतरंज आयोजनों में से एक बनाती है।
भारतीय खिलाड़ी इस विश्व कप में अब तक अपने प्रदर्शन से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। शीर्ष रैंकिंग वाले युवा ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी ने उज्बेकिस्तान के मजबूत खिलाड़ी शमसिद्दीन वोखिदोव को मात्र 30 चालों में मात देकर चौथे दौर में प्रवेश किया। अर्जुन ने अपने इस मुकाबले में शुरू से ही बेहद शांत और संयमित खेल दिखाया। उन्होंने बोर्ड पर ऐसी रणनीति अपनाई कि उनके प्रतिद्वंदी वोखिदोव किसी भी चाल में उन्हें चुनौती नहीं दे सके। अर्जुन ने इस मुकाबले में मध्य खेल के दौरान ही पहल अपने हाथों में ले ली और लगातार दबाव बनाते हुए विरोधी को रक्षात्मक खेलने पर मजबूर कर दिया।
अर्जुन को पहले दौर में ‘बाई’ मिला था,यानी उन्हें शुरुआती मुकाबला खेले बिना ही दूसरे दौर में जगह मिल गई थी। दूसरे दौर में उन्होंने अपने दोनों मुकाबले शानदार ढंग से जीतकर अगले चरण में कदम रखा। तीसरे दौर में उन्होंने अपनी लय को कायम रखते हुए एक बार फिर जीत हासिल की और यह साबित किया कि वे इस टूर्नामेंट के सबसे खतरनाक दावेदारों में से एक हैं।
वहीं,भारत के अनुभवी ग्रैंडमास्टर पेंटाला हरिकृष्णा ने बेल्जियम के खिलाड़ी डैनियल दर्धा को केवल 25 चालों में हराकर चौथे दौर में जगह बनाई। हरिकृष्णा ने अपने क्लासिकल वेरिएशन से खेलते हुए अपने विपक्षी खिलाड़ी को शुरुआत से ही दबाव में रखा। उनकी आक्रामक चालों और गहरी रणनीति के सामने डैनियल ज्यादा देर टिक नहीं सके और जल्दी ही पराजय स्वीकार कर ली।
जीत के बाद हरिकृष्णा ने अपने प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए कहा, “मैं इस टूर्नामेंट के लिए खुद को नए तरीके से तैयार करके आया था। इसका मुझे फायदा मिला। हालाँकि,मैं हर चाल याद नहीं रख पाया,लेकिन खेल के दौरान कई अच्छी चालें चलीं। मेरे विपक्षी खिलाड़ी कुछ मौकों पर खेल की स्थिति को ठीक से नहीं समझ पाए और वही मेरे लिए निर्णायक साबित हुआ।”
वहीं मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने अपने मुकाबले में काले मोहरों से खेलते हुए ड्रॉ खेला। इसी तरह युवा सितारे आर. प्रज्ञानंदा और विदित गुजराती ने भी अपने-अपने मैचों में काले मोहरों से ड्रॉ खेला। अब इन तीनों खिलाड़ियों को अगले दौर में प्रवेश के लिए सफेद मोहरों से जीत दर्ज करनी होगी।
भारतीय दल के लिए यह विश्व कप अब तक ऐतिहासिक साबित हो रहा है। अब तक 10 भारतीय खिलाड़ी टूर्नामेंट के तीसरे दौर में जगह बना चुके हैं,जो किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। भारत की ओर से खेल रहे ज्यादातर युवा खिलाड़ियों ने अपने विदेशी प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी है और कई अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया है।
शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का विश्व कप भारतीय खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत शतरंज का नया गढ़ बनकर उभरा है। विश्वनाथन आनंद की विरासत को आगे बढ़ाने वाले कई युवा खिलाड़ी अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना दबदबा बना रहे हैं। डी. गुकेश ने हाल ही में विश्व चैंपियन बनने के बाद भारतीय शतरंज को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। वहीं प्रज्ञानंदा,एरिगैसी और विदित जैसे खिलाड़ी भी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए अपनी पहचान बना रहे हैं।
गोवा में जारी इस विश्व कप में दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भारतीय दर्शक हर मुकाबले में अपने खिलाड़ियों को समर्थन दे रहे हैं। आयोजकों ने बताया कि इस टूर्नामेंट की मेजबानी भारत के लिए गर्व का विषय है क्योंकि यह पहली बार है जब फिडे विश्व कप इस स्तर पर भारतीय धरती पर आयोजित किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में टूर्नामेंट और भी रोमांचक होने वाला है। भारतीय प्रशंसकों की नजर अब अर्जुन एरिगैसी,हरिकृष्णा,गुकेश, प्रज्ञानंदा और विदित पर टिकी हुई है। अगर भारतीय खिलाड़ी अपनी मौजूदा लय बरकरार रखते हैं,तो इस बार फिडे विश्व कप की “विश्वनाथन आनंद ट्रॉफी” भारत में ही रह सकती है।
भारतीय शतरंज के इस सुनहरे युग में खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन न केवल देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा रहा है,बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि भारत अब शतरंज की नई विश्व राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।
