नई दिल्ली,4 फरवरी (युआईटीवी)- टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले विश्व क्रिकेट में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 15 फरवरी 2026 को खेले जाने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के बीच संभावित आर्थिक नुकसान और टूर्नामेंट की साख को लेकर चिंता गहराती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,इस मुद्दे पर अब ‘बैक-चैनल बातचीत’ शुरू हो चुकी है,ताकि किसी तरह समाधान निकाला जा सके और टूर्नामेंट को बड़े झटके से बचाया जा सके।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जाना है। पाकिस्तान की टीम अपने सभी मुकाबले श्रीलंका में खेलेगी और उसे ग्रुप ए में भारत, नामीबिया,नीदरलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रखा गया है। इसी ग्रुप में 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान मुकाबला प्रस्तावित था,जिसे कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाना था,लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने रविवार को आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया कि उसकी राष्ट्रीय टीम इस मैच में हिस्सा नहीं लेगी।
पाकिस्तान के इस फैसले को केवल खेल से जुड़ा कदम नहीं माना जा रहा,बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों की भी चर्चा हो रही है। हालाँकि,सरकार और पीसीबी की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत वजहें सामने नहीं रखी गई हैं। इस फैसले के बाद आईसीसी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है,क्योंकि भारत-पाकिस्तान मुकाबला किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार,अगर यह मैच नहीं होता है,तो विश्व क्रिकेट को 250 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो सकता है। इसमें ब्रॉडकास्ट राइट्स,विज्ञापन, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से जुड़ी भारी कमाई शामिल है। यही वजह है कि आईसीसी इस मसले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और पीसीबी से किसी तरह का बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक,आईसीसी इस मुद्दे पर पीसीबी से समझौता करना चाहता है और इसके लिए कुछ अन्य क्रिकेट बोर्डों ने भी आईसीसी का समर्थन किया है। इन बोर्डों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान मैच का बहिष्कार केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसका असर पूरे ग्लोबल क्रिकेट इकोसिस्टम पर पड़ेगा।
आईसीसी ने पाकिस्तानी सरकार के ऐलान के बाद रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया था। इसमें पीसीबी से आपसी सहमति के साथ समाधान खोजने की अपील की गई थी। आईसीसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी वैश्विक टूर्नामेंट में चुनिंदा भागीदारी या मैचों का बहिष्कार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। संगठन ने यह भी साफ किया कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता है,तो इसके व्यापक और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले के लिए पाकिस्तान पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाया जाएगा या नहीं। आईसीसी ने फिलहाल सीधे तौर पर बैन की बात नहीं कही है,लेकिन पीसीबी को यह जरूर आगाह किया है कि वह इस कदम के लंबे समय तक चलने वाले असर पर गंभीरता से विचार करे। आईसीसी का मानना है कि पाकिस्तान खुद भी ग्लोबल क्रिकेट सिस्टम का हिस्सा और लाभार्थी है, इसलिए ऐसे फैसले से उसे भी भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्रिकेट जगत के जानकारों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान मुकाबला केवल एक खेल नहीं,बल्कि विश्व क्रिकेट की आर्थिक रीढ़ में से एक है। किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में यह मैच न केवल सबसे ज्यादा देखा जाता है,बल्कि इससे होने वाली कमाई से अन्य छोटे बोर्डों को भी फायदा मिलता है। ऐसे में पाकिस्तान का बहिष्कार पूरे सिस्टम के लिए झटका साबित हो सकता है।
इस बीच,आईसीसी और पीसीबी के बीच चल रही बैक-चैनल बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि राजनीतिक स्तर पर भी संवाद हो और कोई ऐसा समाधान निकले,जिससे पाकिस्तान की टीम मैच खेले और टूर्नामेंट की साख बनी रहे। अगर यह प्रयास नाकाम रहता है,तो आने वाले दिनों में आईसीसी को कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान अपने फैसले पर कायम रहता है या आईसीसी के साथ किसी समझौते पर पहुँचता है। यह विवाद न सिर्फ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के भविष्य को प्रभावित करेगा,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में राजनीति और खेल के रिश्ते पर भी एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर देगा।
