यूपीआई (तस्वीर क्रेडिट@kuch_nya03)

वैश्विक मंच पर भारत का डिजिटल दबदबा,आठ से अधिक देशों में लाइव हुआ यूपीआई

नई दिल्ली,7 फरवरी (युआईटीवी)- भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई अब वैश्विक पहचान बना चुकी है। सरकार ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि यूपीआई आठ से अधिक देशों में सफलतापूर्वक लाइव हो चुका है,जिनमें संयुक्त अरब अमीरात,सिंगापुर,भुटान,नेपाल, श्रीलंका,फ्रांस,कतर और मॉरीशस शामिल हैं। यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है,बल्कि वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका का भी प्रमाण है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि यूपीआई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही स्वीकृति से रेमिटेंस को बढ़ावा मिल रहा है और वित्तीय समावेशन को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म ने सीमापार भुगतान को सरल,तेज और कम लागत वाला बना दिया है,जिससे प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ स्थानीय उपभोक्ताओं को भी सीधा लाभ मिल रहा है। मंत्री के अनुसार,इससे वैश्विक फिनटेक इकोसिस्टम में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यूपीआई की सफलता भारत के व्यापक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी डीपीआई मॉडल का हिस्सा है,जिसे अब दुनिया के कई देश अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। इसी दिशा में भारत ने 23 देशों के साथ भारत स्टैक या डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करने और उस पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों और द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारत के डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स को वैश्विक स्तर पर अपनाने को प्रोत्साहित करना है।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इन एमओयू का फोकस डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान,डेटा के सुरक्षित आदान-प्रदान और सेवा वितरण प्लेटफॉर्म जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर है। यह पहल भारत स्टैक के तहत भारत की डिजिटल कूटनीति के अनुरूप है,जिसमें तकनीक को विकास,पारदर्शिता और समावेशन का माध्यम बनाया गया है। भारत का अनुभव यह दिखाता है कि मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह शासन को अधिक प्रभावी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बना सकता है।

डिजिटल सहयोग के तहत डिजिलॉकर को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने बताया कि क्यूबा,केन्या,संयुक्त अरब अमीरात और लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के साथ डिजिलॉकर के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। डिजिलॉकर नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप में संग्रहीत और साझा करने की सुविधा देता है,जिससे कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होती है। कई देशों ने इसे अपनी प्रशासनिक प्रणालियों के लिए उपयोगी मॉडल के रूप में देखा है।

भारत सरकार ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए ‘इंडिया स्टैक ग्लोबल’ पहल भी शुरू की है। यह मंच भारत के डीपीआई समाधानों को प्रदर्शित करता है और मित्र देशों को इन्हें अपनाने में तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करता है। इस पोर्टल के माध्यम से 18 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है,जिससे देशों को भारत के अनुभव से सीखने का अवसर मिलता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान 2023 में शुरू किया गया ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी एक वैश्विक ज्ञान मंच के रूप में कार्य कर रहा है। इस रिपॉजिटरी में विभिन्न देशों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जानकारी,सर्वोत्तम प्रथाएँ और केस स्टडी उपलब्ध हैं। मंत्री के अनुसार,इस मंच पर भारत ने सबसे अधिक संख्या में डीपीआई समाधानों का योगदान दिया है,जो यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

भारत के प्रमुख डीपीआई और डिजिटल समाधानों में आधार,यूपीआई,कोविन,एपीआई सेतु,डिजिलॉकर,आरोग्य सेतु,गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस यानी जीईएम,उमंग,दीक्षा,ई-संजीवनी और पीएम गतिशक्ति जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में शासन,स्वास्थ्य,शिक्षा,व्यापार और बुनियादी ढाँचे को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन मॉडलों की सराहना हो रही है और कई देश इन्हें अपनी जरूरतों के अनुसार अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

यूपीआई की घरेलू सफलता भी इसकी वैश्विक स्वीकार्यता की मजबूत नींव है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हालिया आँकड़ों के अनुसार,जनवरी महीने में यूपीआई लेनदेन की संख्या में साल-दर-साल 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 21.70 अरब तक पहुँच गई। वहीं,लेनदेन की कुल राशि में भी 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई और यह 28.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई। ये आँकड़ें दर्शाते हैं कि यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई और भारत स्टैक जैसी पहलों ने भारत को डिजिटल नवाचार के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कम लागत, ओपन आर्किटेक्चर और स्केलेबल मॉडल के कारण यह प्रणाली विकासशील और विकसित,दोनों तरह के देशों के लिए आकर्षक साबित हो रही है। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे और देश यूपीआई और भारत के डीपीआई मॉडल को अपनाएँगे,भारत की डिजिटल कूटनीति और वैश्विक प्रभाव और मजबूत होने की उम्मीद है।