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भारत का सेवा निर्यात अक्टूबर में 22.3 प्रतिशत बढ़कर 34.3 अरब डॉलर हो गया : आरबीआई

नई दिल्ली,2 दिसंबर (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए ताजे आँकड़ों के अनुसार,भारत का सेवा निर्यात अक्टूबर 2023 में लगातार दूसरे महीने बढ़ा और 34.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि सालाना आधार पर 22.3 प्रतिशत रही,जो देश की सेवा क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। इससे यह साबित होता है कि भारत की सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत हो रही है।

सेवा निर्यात में अगस्त 2023 में मामूली गिरावट देखी गई थी,जब यह जुलाई के 30.58 अरब डॉलर से घटकर 30.34 अरब डॉलर पर आ गया था। हालाँकि,यह सितंबर माह में बढ़कर 32.57 अरब डॉलर तक पहुँच गया और इसमें अक्टूबर के माह में और अधिक वृद्धि दर्ज की गई। सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2024 में 339.62 अरब डॉलर तक पहुँच गया,जो पिछले वित्त वर्ष के 325.33 अरब डॉलर की तुलना में अधिक है। यह आँकड़ा भारत के सेवा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को उजागर करता है और यह दर्शाता है कि भारतीय सेवा क्षेत्र का वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान बन चुका है।

भारत का सेवा निर्यात बढ़ने के साथ-साथ देश के सेवा आयात में भी अक्टूबर में वृद्धि दर्ज की गई। सेवा आयात सालाना आधार पर 27.9 प्रतिशत बढ़कर 17.21 अरब डॉलर हो गया,जबकि सितंबर में यह आँकड़ा 16.50 अरब डॉलर था। सेवा आयात में यह वृद्धि देश की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुधार को दर्शाती है,जो भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को प्रमाणित करती है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार,भारत का सेवा निर्यात 2030 तक देश के वस्तु निर्यात को पीछे छोड़ सकता है। भारत के सेवा निर्यात के बारे में रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2030 तक यह 618.21 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है,जो माल निर्यात के अनुमानित 613.04 अरब डॉलर से अधिक होगा। यह आँकड़ा भारत की सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है तथा वैश्विक व्यापार में इसके बढ़ते योगदान को दिखाता है।

भारत के सेवा क्षेत्र की मजबूती का प्रमुख कारण आईटी और सॉफ़्टवेयर सेवाओं में उत्कृष्टता है। ‘दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाएँ’ श्रेणी में आने वाली सॉफ़्टवेयर और आईटी सेवाओं ने वित्त वर्ष 2024 में सेवा निर्यात में 190.7 अरब डॉलर या 56.2 प्रतिशत का योगदान किया। इसके अलावा सेवा निर्यात को अन्य व्यावसायिक सेवाएँ (ओबीएस) तथा आधुनिक तकनीकों जैसे-एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस),इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में भारत की विशेषज्ञता ने भी गति प्रदान की है। ये तकनीकी नवाचार भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार,वित्त वर्ष 2019 से 2024 तक सेवा निर्यात में 10.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रही,जो माल निर्यात की 5.8 प्रतिशत सीएजीआर की तुलना में लगभग दोगुनी है। यह तेज़ वृद्धि दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर भारत की सेवा आधारित क्षमताओं की माँग निरंतर बढ़ रही है। विशेष रूप से,आईटी,सॉफ़्टवेयर और आधुनिक तकनीकी सेवाओं में भारत की विशेषज्ञता ने इसे वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी स्थान दिलाया है।

भारत का सेवा निर्यात न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दे रहा है,बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न कर रहा है। इस वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था में विविधता और स्थिरता भी मजबूत हो रही है। भारत का सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी और सॉफ़्टवेयर सेवाएँ,वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं,जिससे भारत का व्यापारिक नेटवर्क और विश्व में स्थिति और मजबूत हो रही है।

इस बढ़ती सेवा निर्यात की प्रवृत्ति से यह भी संकेत मिलता है कि भारत अपने आर्थिक ढाँचे को सेवा आधारित क्षेत्र पर अधिक केंद्रित कर रहा है,जो भविष्य में और भी अधिक विकास की संभावना उत्पन्न करेगा। इसके साथ ही, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और व्यापारिक स्थिति को भी यह सुनिश्चित करेगा कि देश भविष्य में विश्व अर्थव्यवस्था में एक मजबूत खिलाड़ी बने रहे।

इस प्रकार,भारत का सेवा निर्यात न केवल अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है,बल्कि यह देश की वैश्विक व्यापार में प्रमुख भूमिका को और सुदृढ़ कर रहा है,साथ ही रोजगार और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रहा है।