नई दिल्ली,27 मार्च (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने दो दिवसीय फ्रांस दौरे के दौरान जी7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अहम बैठक में हिस्सा लेते हुए वैश्विक कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया। इस दौरान उन्होंने न केवल विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से द्विपक्षीय मुलाकातें कीं,बल्कि वैश्विक संपर्क,सप्लाई चेन और रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर भी जोर दिया।
फ्रांस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे सत्र में बोलते हुए जयशंकर ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी ) को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया को अधिक मजबूत,सुरक्षित और विश्वसनीय व्यापारिक मार्गों की आवश्यकता है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के दौर में आईएमईसी जैसी पहल वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चितताओं के इस दौर में मजबूत सप्लाई चेन का निर्माण अब केवल आर्थिक जरूरत नहीं,बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे सत्र में उन्होंने साझेदार देशों के साथ आईएमईसी को लेकर चर्चा की और यह बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने इस पहल की प्रासंगिकता को और बढ़ा दिया है।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौते इस आर्थिक गलियारे की उपयोगिता को और मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) और यूनाइटेड किंगडम के साथ भारत के एफटीए इस पहल में अतिरिक्त मूल्य जोड़ते हैं और इसे वैश्विक व्यापार के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनाते हैं।
इस दौरान जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के बीच इस परियोजना को लेकर बढ़ते उत्साह की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आईएमईसी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बहुपक्षीय सहयोग बेहद जरूरी है और यह देखकर संतोष होता है कि कई देश इस दिशा में सकारात्मक रुख अपना रहे हैं।
जी7 बैठक के दौरान जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब समय की माँग बन चुकी है,ताकि यह संस्था वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके।
उन्होंने वैश्विक दक्षिण यानी “ग्लोबल साउथ” के सामने आने वाली चुनौतियों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट,उर्वरक की आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे विकासशील देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इन समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर काम करना होगा।
जयशंकर ने शांति अभियानों को आसान बनाने और मानवीय सहायता की सप्लाई चेन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच मानवीय सहायता का प्रभावी और समय पर पहुँचना बेहद जरूरी है,ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुँचाई जा सके।
इस कूटनीतिक दौरे के दौरान जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई पहलुओं पर बातचीत हुई।
इसके अलावा,उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ भी चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच हालिया संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया।
गौरतलब है कि जयशंकर गुरुवार को फ्रांस पहुँचे थे,जहाँ उन्होंने दक्षिण कोरिया,कनाडा और जापान के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ उनकी बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के लिए उपयोगी रही और भविष्य में सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ड्यून के साथ उनकी मुलाकात भी काफी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने इस बैठक को सफल बताते हुए कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
जापान के विदेश मंत्री के साथ उनकी मुलाकात ने भी भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने का संकेत दिया। इन सभी बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता को लगातार बढ़ा रहा है और विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी साफ है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। आईएमईसी जैसी पहल और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है,जब दुनिया कई संकटों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में भारत का संतुलित और सक्रिय रुख वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की भागीदारी और जयशंकर की सक्रिय कूटनीति यह दर्शाती है कि देश वैश्विक मुद्दों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आईएमईसी पर दिया गया उनका जोर,संयुक्त राष्ट्र में सुधार की माँग और ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाना इस बात का संकेत है कि भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी एक जिम्मेदार भागीदार के रूप में उभर रहा है।
