तेहरान,17 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आंतरिक परिस्थितियों के बीच ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट का सिलसिला लगातार जारी है। सोमवार को यह स्थिति 17वें दिन में पहुँच गई,जिससे आम नागरिकों के लिए बाहरी दुनिया से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। देश के कई हिस्सों में लोग न तो अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइटों तक पहुँच पा रहे हैं और न ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर पा रहे हैं। इससे संचार,व्यापार और सूचना के आदान-प्रदान पर गहरा असर पड़ा है।
इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से काफी नीचे गिर चुकी है। संस्था ने बताया कि देश में इंटरनेट ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई है,जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुँच लगभग ठप हो गई है। इस स्थिति के चलते लोग ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने और विदेशों में रहने वाले परिवार या दोस्तों से संपर्क करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
इस इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण देश में केवल कुछ चुनिंदा सेवाएँ ही सीमित रूप से काम कर पा रही हैं। इनमें वे सेवाएँ शामिल हैं,जिन्हें सरकार की ओर से विशेष अनुमति दी गई है। इसके अलावा ईरान का राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क भी सक्रिय है,जिसके माध्यम से कुछ आंतरिक ऑनलाइन सेवाओं को चालू रखा गया है। हालाँकि,इस नेटवर्क के जरिए केवल देश के भीतर की सीमित डिजिटल गतिविधियाँ ही संभव हो पा रही हैं।
ईरान का यह नेटवर्क नेशनल इंफॉर्मेशन नेटवर्क कहलाता है,जिसे आम तौर पर ‘हलाल इंटरनेट’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक घरेलू इंट्रानेट प्रणाली है,जिसे सरकार ने इस उद्देश्य से विकसित किया है कि यदि अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट बंद भी हो जाए,तो देश के भीतर आवश्यक डिजिटल सेवाएँ जारी रह सकें। इस प्रणाली के माध्यम से बैंकिंग सेवाएँ,सरकारी वेबसाइटें और कुछ स्थानीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सीमित रूप से काम करते रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह नेटवर्क सरकार को यह क्षमता देता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट से देश को अस्थायी रूप से अलग कर सके,जबकि घरेलू स्तर पर डिजिटल सेवाओं को बनाए रखे। हालाँकि,इसका मतलब यह भी होता है कि आम नागरिक वैश्विक सूचना और संचार के अधिकांश साधनों से कट जाते हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में जब देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, तब भी इसी तरह का व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया था। उस समय भी लोगों को राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क पर स्विच कर दिया गया था। इससे आम जनता का अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट से संपर्क लगभग पूरी तरह टूट गया था और वे केवल सरकार द्वारा नियंत्रित डिजिटल सेवाओं का ही उपयोग कर पा रहे थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य इंटरनेट प्रणाली आमतौर पर ‘ब्लैकलिस्ट’ के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मतलब यह होता है कि इंटरनेट पर अधिकतर वेबसाइटें और सेवाएँ खुली रहती हैं,जबकि केवल कुछ विशेष वेबसाइटों या प्लेटफॉर्म पर ही प्रतिबंध लगाया जाता है। यह प्रतिबंध भी अक्सर स्थानीय स्तर पर होता है,जिससे दूसरे देशों में मौजूद लोग उन सेवाओं तक पहुँच बना सकते हैं।
इसके विपरीत ‘हलाल इंटरनेट’ या राष्ट्रीय नेटवर्क ‘व्हाइटलिस्ट’ के सिद्धांत पर आधारित होता है। इसमें लगभग सभी वेबसाइटें और सेवाएँ बंद रहती हैं और केवल वही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होते हैं,जिन्हें सरकार सुरक्षित या स्वीकृत मानती है। इसका परिणाम यह होता है कि उपयोगकर्ता केवल उन्हीं वेबसाइटों और ऐप्स तक पहुँच सकते हैं,जिन्हें सरकार ने अनुमति दी है।
नेटब्लॉक्स के विश्लेषकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ईरान के भीतर है,तो वह राष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए कुछ बुनियादी ऑनलाइन गतिविधियाँ कर सकता है। उदाहरण के लिए स्थानीय बैंकिंग सेवाओं का उपयोग,सरकारी वेबसाइटों तक पहुँच या किसी स्थानीय डिजिटल सेवा का इस्तेमाल संभव है,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संचार करना लगभग असंभव हो जाता है।
इसका असर खास तौर पर सोशल मीडिया और वैश्विक संचार प्लेटफॉर्म पर देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुँच पूरी तरह बंद हो गई है। इसी तरह अन्य अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइटें और डिजिटल सेवाएँ भी अधिकांश लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय समाचार वेबसाइटों और स्वतंत्र सूचना स्रोतों तक पहुँच भी लगभग बंद हो चुकी है। इसके कारण लोग केवल वही समाचार और सूचनाएँ देख पा रहे हैं,जिन्हें सरकार की ओर से स्वीकृति दी गई है या जो राष्ट्रीय नेटवर्क के भीतर उपलब्ध हैं। इस स्थिति ने सूचना की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला इंटरनेट ब्लैकआउट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था,शिक्षा और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। ऑनलाइन व्यापार,डिजिटल भुगतान और दूरस्थ कामकाज जैसी गतिविधियाँ इस स्थिति में गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।
फिलहाल ईरान में स्थिति सामान्य होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी कब बहाल होगी,इस बारे में सरकार की ओर से भी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है। ऐसे में आम नागरिकों को सीमित डिजिटल सेवाओं के सहारे ही अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना पड़ रहा है,जबकि बाहरी दुनिया से उनका संपर्क लगभग टूट चुका है।
