वाशिंगटन,2 मार्च (युआईटीवी)- इजरायल और अमेरिका की ओर से किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए,जिसके बाद अमेरिका और छह खाड़ी देशों ने संयुक्त रूप से इन हमलों की कड़ी निंदा की है। सात देशों ने इसे “खतरनाक बढ़ोतरी” बताते हुए कहा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और संप्रभुता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी संयुक्त बयान में अमेरिका के साथ बहरीन,जॉर्डन, कुवैत,कतर,सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों ने कई संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने की निंदा की। बयान में कहा गया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से बिना सोचे-समझे और लापरवाही से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं,बल्कि क्षेत्र में अस्थिरता को भी बढ़ा रहे हैं।
संयुक्त बयान के अनुसार इन हमलों का असर बहरीन,इराक जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र भी शामिल है, जॉर्डन,कुवैत,ओमान,कतर,सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा। इन देशों ने आरोप लगाया कि हमलों ने संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाया,नागरिकों को खतरे में डाला और आम बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाया। बयान में कहा गया कि आम लोगों और उन देशों को निशाना बनाना जो सीधे तौर पर दुश्मनी में शामिल नहीं थे,एक लापरवाह और अस्थिर करने वाला कदम है।
ईरान की कार्रवाइयों को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन बताते हुए बयान में कहा गया कि यह व्यवहार क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ सकता है। सातों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे अपने नागरिकों और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि हमलों के सामने आत्मरक्षा का उनका अधिकार सुरक्षित है और वे आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
संयुक्त बयान में क्षेत्रीय एयर डिफेंस सहयोग की भी सराहना की गई। इसमें कहा गया कि प्रभावी एयर और मिसाइल डिफेंस समन्वय की बदौलत जान-माल के बड़े पैमाने पर नुकसान को रोका जा सका। अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच वर्षों से रक्षा सहयोग मौजूद है,जिसके तहत साझा खुफिया जानकारी,संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा प्रणालियों का एकीकरण किया जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में यह समन्वय और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ईरान की ओर से हाल के वर्षों में मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। पश्चिमी और खाड़ी देशों के अधिकारियों का कहना है कि तेहरान की यह सैन्य तैयारी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही है। हालाँकि,ईरान लगातार यह कहता आया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है और उसका उद्देश्य अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करना है।
अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य ठिकाने हैं और बहरीन,कतर,कुवैत,सऊदी अरब तथा यूएई के साथ उसकी लंबे समय से रक्षा साझेदारी है। संयुक्त राज्य अमेरिका की रणनीति का एक अहम हिस्सा क्षेत्रीय एयर डिफेंस इंटीग्रेशन रहा है,जिसका मकसद ईरान और उसके सहयोगी समूहों से संभावित मिसाइल और ड्रोन खतरों का मुकाबला करना है। इस ढाँचे के तहत रडार सिस्टम,इंटरसेप्टर मिसाइलें और साझा कमांड एंड कंट्रोल संरचना विकसित की गई है।
बहरीन और कतर में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पाँचवां बेड़ा तैनात है,जबकि कतर में अल उदैद एयर बेस क्षेत्र का प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डा है। इन ठिकानों के कारण किसी भी बड़े टकराव का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है,जब क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन युद्ध टकराव का मुख्य हिस्सा बन गया है। हाल के वर्षों में पारंपरिक युद्ध की जगह सीमित,लेकिन तकनीकी रूप से उन्नत हमलों ने ले ली है,जिनमें बिना पायलट वाले ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे न केवल सैन्य ठिकानों,बल्कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर भी खतरा बढ़ा है।
खाड़ी देशों ने इस बयान के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वे किसी भी प्रकार की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़े रहेंगे। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और कूटनीतिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर भी बल दिया। हालाँकि,बयान में यह संकेत भी दिया गया कि यदि ऐसे हमले दोहराए गए तो वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
मौजूदा घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। किसी भी व्यापक सैन्य टकराव का असर तेल बाजारों,व्यापार मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर ईरान अपनी कार्रवाइयों को रक्षात्मक बता रहा है,वहीं दूसरी ओर अमेरिका और खाड़ी देश इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास और सैन्य तैयारियाँ दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ सकती हैं। पश्चिम एशिया की स्थिरता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष तनाव कम करने के लिए किस प्रकार के कदम उठाते हैं और क्या संवाद की कोई नई पहल सामने आती है।
