वॉशिंगटन,27 फरवरी (युआईटीवी)- ईरान को लेकर अमेरिकी राजनीति में तीखा मतभेद सामने आ रहा है। एक ओर रिपब्लिकन नेतृत्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त विदेश नीति का समर्थन कर रहा है,वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता संभावित सैन्य कार्रवाई को सीमित करने और कांग्रेस की भूमिका सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं। सीनेट मेजोरिटी लीडर जॉन थ्यून ने राष्ट्रपति की नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बताया है,जबकि हाउस डेमोक्रेट्स ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करने के लिए प्रस्ताव लाने की पहल की है।
फॉक्स न्यूज पर बातचीत के दौरान जॉन थ्यून ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सुरक्षित सड़कों, अमेरिकी लोगों की जेब में अधिक धन और देशवासियों के लिए नए अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विदेश नीति के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति अमेरिका के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं। थ्यून ने कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इस मुद्दे पर अमेरिकी जनता का बड़ा बहुमत राष्ट्रपति के साथ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप “शक्ति के माध्यम से शांति” की नीति अपना रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका के पास सही समय और सही स्थान पर उचित संसाधन उपलब्ध हों। हालाँकि,उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि यदि ईरान वार्ता की मेज पर आता है तो सैन्य टकराव से बचा जा सकता है।
दूसरी ओर,डेमोक्रेटिक नेतृत्व इस मुद्दे पर अधिक सतर्क रुख अपना रहा है। हाउस में डेमोक्रेट नेताओं ने घोषणा की है कि जब कांग्रेस अगले सप्ताह फिर से बैठक करेगी,तो वे द्विदलीय खन्ना-मासी ईरान वॉर पावर्स प्रस्ताव पर मतदान कराएँगे। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग से पहले कांग्रेस के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए बाध्य करेगा। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि संविधान के तहत युद्ध संबंधी निर्णयों में कांग्रेस की भूमिका स्पष्ट है और उसकी अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई असंवैधानिक मानी जाएगी।
संयुक्त बयान में डेमोक्रेट नेताओं ने कहा कि हर सदस्य को यह दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए कि वे कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं या नहीं। उनका तर्क है कि अमेरिका को किसी संभावित संघर्ष में धकेलने से पहले व्यापक बहस और विधायी स्वीकृति आवश्यक है। यह कदम ट्रंप प्रशासन पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने भी प्रशासन से अधिक स्पष्टता की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अमेरिकी जनता को यह बताना चाहिए कि ईरान में उसका स्पष्ट लक्ष्य क्या है। शूमर ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का सामना करने के लिए रणनीति,स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है,लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से इन पहलुओं पर पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है। उनके अनुसार,अमेरिकी जनता इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर स्पष्ट जवाब की हकदार है।
इस बीच,ईरान को लेकर एक अन्य विधायी पहल भी सामने आई है। सीनेटर जैकी रोसेन और डेव मैककॉर्मिक ने एक द्विदलीय विधेयक पेश किया है,जिसका उद्देश्य तेहरान पर मानवाधिकार और इंटरनेट स्वतंत्रता के मुद्दों को लेकर दबाव बढ़ाना है। यह प्रस्तावित कानून ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद लाया गया है। रोसेन ने कहा कि ईरान के लोगों को एक दमनकारी शासन के तहत रहने के लिए मजबूर किया गया है,जिसने सेंसरशिप और इंटरनेट प्रतिबंधों का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान का भविष्य उसके लोगों को तय करना चाहिए और उन्हें अपने अधिकारों की सुरक्षा तथा सूचना तक स्वतंत्र पहुँच का अधिकार है।
मैककॉर्मिक ने भी इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह आर्थिक, सैन्य और नैतिक रूप से कमजोर शासन के खिलाफ ईरानी लोगों के साथ खड़े होने की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार,यह कानून मानवाधिकारों के समर्थन और दमनकारी नीतियों के विरोध में एक स्पष्ट संदेश देगा।
ईरान के मुद्दे पर यह राजनीतिक विभाजन ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी जिनेवा में वार्ता कर रहे हैं। एक ओर प्रशासन कूटनीतिक समाधान की संभावना बनाए रखने की बात कर रहा है,वहीं सैन्य विकल्प को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। यही स्थिति कांग्रेस के भीतर बहस को और तीखा बना रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान नीति पर यह मतभेद अमेरिकी राजनीति में व्यापक वैचारिक अंतर को दर्शाता है। रिपब्लिकन नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और सख्त रुख पर जोर दे रहा है,जबकि डेमोक्रेट्स संवैधानिक प्रक्रिया,पारदर्शिता और कांग्रेस की भूमिका को प्राथमिकता दे रहे हैं। आगामी दिनों में जब वॉर पावर्स प्रस्ताव पर मतदान होगा,तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि कांग्रेस में समर्थन और विरोध का संतुलन किस ओर झुकता है।
फिलहाल,अमेरिका की ईरान नीति पर घरेलू राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति,कांग्रेस की संवैधानिक भूमिका और मध्य पूर्व में संभावित टकराव की आशंकाएँ—इन सभी ने मिलकर इस मुद्दे को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले सप्ताह इस बात के लिए निर्णायक हो सकते हैं कि अमेरिका ईरान के साथ टकराव की राह पर आगे बढ़ेगा या कूटनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
