एयर इंडिया

ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद लौटी एयर इंडिया की दिल्ली–न्यूयॉर्क फ्लाइट,कोहरे में टैक्सी के दौरान इंजन में फँसा बैगेज कंटेनर

नई दिल्ली, 16 जनवरी (युआईटीवी)- दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की एक अंतर्राष्ट्रीय उड़ान उस वक्त गंभीर तकनीकी घटना का शिकार हो गई,जब ईरानी एयरस्पेस अचानक बंद होने के कारण रास्ता बदलकर विमान को वापस दिल्ली लौटना पड़ा और लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट पर टैक्सी करते समय उसके इंजन में एक बैगेज कंटेनर फँस गया। इस घटना के बाद विमान के दाहिने इंजन को नुकसान पहुँचा, हालाँकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित रहे। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पूरे मामले की जाँच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्र में इस तरह की चूक कैसे हुई।

एयर इंडिया के अनुसार,दिल्ली से न्यूयॉर्क के जॉन एफ.केनेडी एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट एआई101 ने जैसे ही टेकऑफ किया,उसी दौरान ईरानी एयरस्पेस के अचानक बंद होने की सूचना मिली। अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह एयरस्पेस एक अहम मार्ग माना जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्लाइट के पायलटों ने सुरक्षा के लिहाज से विमान को वापस दिल्ली लाने का फैसला किया। कुछ ही समय बाद विमान सुरक्षित रूप से इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर आया।

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली में लैंडिंग के बाद विमान को पार्किंग एरिया की ओर ले जाया जा रहा था। इस दौरान एयरपोर्ट पर घना कोहरा छाया हुआ था,जिससे दृश्यता काफी कम थी। टैक्सी करते समय विमान किसी बाहरी वस्तु से टकरा गया,जिससे उसके दाहिने इंजन को नुकसान हुआ। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि यह बाहरी वस्तु एक बैगेज कंटेनर था,जो टैक्सीवे के पास पड़ा रह गया था और विमान के नंबर दो इंजन में चला गया।

एयरलाइन ने कहा कि घटना के तुरंत बाद सभी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया। विमान को सुरक्षित रूप से तय पार्किंग स्थान पर खड़ा किया गया और यात्रियों को बिना किसी घबराहट के विमान से उतारा गया। किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को चोट नहीं आई। एयर इंडिया ने विमान को एहतियातन ग्राउंडेड कर दिया है और पूरी तकनीकी जाँच तथा आवश्यक मरम्मत के बाद ही इसे दोबारा उड़ान के लिए तैयार किया जाएगा।

डीजीसीए ने इस घटना को गंभीर मानते हुए औपचारिक जाँच शुरू कर दी है। जाँच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि टैक्सीवे जैसे संवेदनशील इलाके में कोई बैगेज कंटेनर कैसे मौजूद था और वह विमान के इंजन के इतने करीब कैसे पहुँच गया। विमानन सुरक्षा मानकों के अनुसार,टैक्सीवे और रनवे के आसपास किसी भी तरह का ग्राउंड इक्विपमेंट छोड़ा जाना बेहद खतरनाक माना जाता है।

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि टर्मिनल 3 के बैगेज मेक-अप एरिया में एक बर्ड वर्ल्डवाइड फ्लाइट सर्विसेज का टग बैगेज कंटेनर ले जा रहा था। इसी दौरान कथित तौर पर एक कंटेनर डॉली का पहिया निकल गया,जिससे कंटेनर टैक्सीवे इंटरसेक्शन के पास पलट गया। अधिकारियों के अनुसार,जब ग्राउंड इक्विपमेंट ऑपरेटर ने टैक्सी करता हुआ विमान देखा,तो वह बाकी कंटेनरों के साथ वहाँ से हट गया,लेकिन पलटा हुआ कंटेनर वहीं रह गया। घने कोहरे और कम दृश्यता के कारण यह कंटेनर समय पर हटाया नहीं जा सका और बाद में वह सीधे विमान के इंजन के रास्ते में आ गया।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग में लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। हालाँकि,एयरपोर्ट पर कई स्तरों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था होती है,फिर भी कोहरे जैसी परिस्थितियों में जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में ग्राउंड स्टाफ की जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है कि वे रनवे और टैक्सीवे को पूरी तरह साफ रखें।

एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा है कि इस घटना के कारण ए350 विमान से जुड़े कुछ रूट्स पर अस्थायी रुकावटें आ सकती हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन यात्रियों की यात्रा प्रभावित हुई है,उनके लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है या फिर उनकी इच्छा के अनुसार पूरा रिफंड दिया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताते हुए कहा कि सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है,जब अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव का असर साफ दिखने लगा है। ईरानी एयरस्पेस के अचानक बंद होने से न केवल एयर इंडिया,बल्कि कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस को भी अपने रूट बदलने पड़े हैं। इससे उड़ानों की अवधि बढ़ रही है और ऑपरेशनल चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं।

फिलहाल,डीजीसीए की जाँच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है,जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अत्याधुनिक विमानों और आधुनिक हवाई अड्डों के बावजूद,छोटी सी चूक भी कितनी बड़ी सुरक्षा चुनौती बन सकती है।