पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट@ndtvindia)

इस्लामाबाद में एससीओ शिखर सम्मेलन में पाक पीएम शहबाज शरीफ ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का किया स्वागत,भारतीय उच्चायोग में विदेश मंत्री ने पौधा लगाया

इस्लामाबाद,16 अक्टूबर (युआईटीवी)- इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर का स्वागत किया। इससे पहले विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने पाकिस्तान स्थित इंडियन हाई कमीशन कैंपस में सुबह की सैर की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को बढ़ावा देते हुए एक पौधा लगाया।

भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) की 23वीं बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान की यात्रा की। यह यात्रा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह 9 सालों में पहली बार थी,जब किसी भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया। पिछली बार, 2015 में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अफगानिस्तान पर एक सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद गई थीं। इस बार जयशंकर की यात्रा विशेष रूप से एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थी, लेकिन इसके साथ कुछ और भी महत्वपूर्ण घटनाएँ जुड़ी हुई थीं।

मंगलवार दोपहर को विदेश मंत्री जयशंकर के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर पहुँचा। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एससीओ शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर जयशंकर का स्वागत किया। यह स्वागत किसी औपचारिकता से कम नहीं था,क्योंकि जयशंकर का पाकिस्तान आगमन कई राजनीतिक और कूटनीतिक संदेशों से भरा हुआ था। जयशंकर ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के कैंपस में सुबह की सैर की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक पौधा भी लगाया। इस तरह उन्होंने न सिर्फ पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई बल्कि भारत के सामाजिक अभियानों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।


विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग की टीम के सहकर्मियों के साथ हमारे हाई कमीशन कैंपस में सुबह की सैर।” इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “कैंपस में अर्जुन का पौधा #प्लांट फॉर मदर के प्रति एक और प्रतिबद्धता। #एक_पेड़_माँ _के_नाम”।

एससीओ एक महत्वपूर्ण संगठन है, जिसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं। यह संगठन व्यापार, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देता है। इस बार के शिखर सम्मेलन में चीन, रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के साथ-साथ ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति भी शामिल हो रहे हैं।

मंगोलिया के प्रधानमंत्री (जो एक पर्यवेक्षक राज्य है) और तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री (जो विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित थे) भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर था और विदेश मंत्री जयशंकर का वहाँ होना यह दर्शाता है कि भारत एससीओ फ्रेमवर्क में अपनी भूमिका को कितनी गंभीरता से लेता है।

हालाँकि,यह यात्रा केवल एससीओ बैठक के लिए थी,लेकिन पाकिस्तान में जयशंकर की उपस्थिति ने स्थानीय राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल को भी बढ़ा दिया है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई। फिर भी, पाकिस्तान के सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने उनके आगमन पर अपने-अपने राजनीतिक लाभ के लिए ध्यान केंद्रित किया।

विशेष रूप से, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के सूचना सलाहकार बैरिस्टर मुहम्मद अली सैफ ने जयशंकर को पीटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने का आमंत्रण दिया,जो इस्लामाबाद में एक विरोध रैली कर रहे थे। सैफ ने कहा कि, “हमारे विरोध को देखकर एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद आने वाले सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडल खुश होंगे और हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रथाओं और ताकत की सराहना करेंगे।” उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शन को संबोधित करने के लिए जयशंकर को निमंत्रण भी दिया,ताकि वह खुद पाकिस्तान के लोकतंत्र की मजबूती को देख सकें।

जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए केवल 24 घंटे की थी। इस दौरान उनकी पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों या नेताओं के साथ कोई विशेष द्विपक्षीय बैठक तय नहीं थी। लेकिन फिर भी, यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि यह भारत-पाकिस्तान संबंधों के वर्तमान स्थिति को दर्शाती है, जहाँ बातचीत और कूटनीति अभी भी सावधानीपूर्वक सँभाली जा रही है।

जयशंकर की इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है,लेकिन पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के मुद्दे पर अभी भी स्थिति जटिल बनी हुई है। इस यात्रा ने यह भी दर्शाया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंध भले ही ठंडे हों,लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग की संभावनाएँ अभी भी जीवित हैं।