नई दिल्ली,16 जनवरी (युआईटीवी)- इजरायल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते का संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और भारत ने स्वागत किया है। एंटोनियो गुटेरेस ने इसे ‘एक महत्वपूर्ण पहला कदम’ बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते के पक्षों से फलस्तीनियों,इजरायलियों और व्यापक क्षेत्र के बेहतर भविष्य के लिए एक विश्वसनीय राजनीतिक मार्ग स्थापित करने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
गुटेरेस ने कहा कि, “मैं गाजा में युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए एक समझौते की घोषणा का स्वागत करता हूँ।” इस प्रक्रिया में मध्यस्थों-मिस्र,कतर और अमेरिका के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने इसे “एक महत्वपूर्ण पहला कदम” बताते हुए कहा कि अब हमें व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए सभी जरूरी प्रयास करने चाहिए,जिसमें कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र की एकता और अखंडता का संरक्षण शामिल है। गुटेरेस ने फलस्तीनी एकता को स्थायी शांति और स्थिरता प्राप्त करने के लिए आवश्यक बताया और इस बात पर जोर दिया कि एकीकृत फलस्तीनी शासन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारत ने भी गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के फैसले का स्वागत किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि यह समझौता गाजा में सुरक्षित और निरंतर मानवीय सहायता का मार्ग प्रशस्त करेगा। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने हमेशा बंधकों की रिहाई,युद्ध विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की वकालत की है। मंत्रालय ने इस दिशा में इस कदम को सकारात्मक और महत्वपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि इससे गाजा के लोगों को निरंतर मानवीय सहायता मिलेगी।
दोहा में कई सप्ताहों तक कतर,मिस्र और अमेरिका द्वारा चली बातचीत के बाद यह समझौता सम्पन्न हुआ। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल-थानी ने घोषणा की कि 33 इजरायली बंधकों को पहले 42-दिवसीय चरण में रिहा किया जाएगा। यह चरण संभावित रूप से स्थायी युद्ध विराम की ओर बढ़ सकता है। इस पहले चरण में महिलाओं,बच्चों, बुजुर्गों और बीमार या घायल लोगों की रिहाई को प्राथमिकता दी गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि, “आज का दिन बहुत अच्छा है! जल्द ही,बंधक अपने परिवारों के पास घर लौट आएँगे।” उन्होंने कहा कि इजरायल भी बदले में फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। बाइडेन ने यह भी बताया कि इजरायल और हमास के बीच युद्ध के स्थायी अंत के लिए दूसरे चरण में आवश्यक व्यवस्थाओं पर बातचीत होगी।
इजरायल और हमास के बीच जारी 15 महीने के हिंसक संघर्ष के बाद इस समझौते को महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इस संघर्ष में गाजा में आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए गए लोग और इजरायल में सैकड़ों फलस्तीनी कैदी शामिल थे और अब इस समझौते से इन बंधकों और कैदियों की रिहाई की संभावना पैदा हुई है। 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुए इस संघर्ष के कई विनाशकारी परिणाम सामने आए हैं। दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोग बंधक बना लिए गए थे।
इसके बाद इजरायल ने सैन्य कार्रवाई शुरू की,जिसमें गाजा में 46,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए और एक लाख से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापक नुकसान उठाया है और यह समझौता दोनों के बीच युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई का एक प्रयास है,जिससे स्थिति में कुछ स्थिरता आ सकती है।
युद्धविराम का यह समझौता रविवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:15 बजे प्रभावी होगा,लेकिन इसे इजरायल के मंत्रिमंडल और सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी मिलनी बाकी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय दोनों पक्षों के लिए एक ठहराव का संकेत हो सकता है,जिससे दोनों पक्षों को आगे की बातचीत और कूटनीति के लिए एक मंच मिलेगा।
भारत,संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय समुदायों ने इस समझौते का स्वागत किया है, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति के लिए एक आशा की किरण प्रस्तुत करता है। गुटेरेस ने इस संघर्ष के अंत के लिए एक राजनीतिक समाधान की आवश्यकता को रेखांकित किया और इस समझौते को उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना।
यह घटनाक्रम न केवल इजरायल और फिलिस्तीनी के लिए,बल्कि पूरी मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यदि यह समझौता स्थायी शांति की ओर बढ़ता है,तो यह एक ऐतिहासिक घटना बन सकती है। हालाँकि,इस समझौते की स्थिरता और प्रभावशीलता भविष्य में हुई बातचीत और कूटनीति पर निर्भर करेगी।
इसलिए,यह जरूरी है कि सभी पक्ष इस अवसर का लाभ उठाते हुए व्यापक शांति के लिए एक संयुक्त प्रयास करें। युद्ध के समाप्ति के साथ-साथ मानवाधिकारों की रक्षा, मानवीय सहायता का प्रवाह और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत और अन्य देशों को इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभानी होगी, ताकि यह संघर्ष स्थायी शांति की ओर बढ़ सके।