इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@ocjain4)

इजरायल दौरे पर 25 फरवरी को रवाना होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,सामरिक और तकनीकी सहयोग को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली,23 फरवरी (युआईटीवी)- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इजरायल रवाना होंगे। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच गहराते सामरिक,आर्थिक और तकनीकी संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस दौरे की पुष्टि करते हुए कहा है कि यह प्रधानमंत्री मोदी की 2017 की ऐतिहासिक यात्रा के बाद उनका दूसरा इजरायल दौरा होगा। उस पहली यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को एक नए युग में प्रवेश कराया था।

रविवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के दौरान दिए गए अपने वक्तव्य और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा संदेशों में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को हाल के वर्षों में विकसित हुए “विशेष संबंधों” की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और ऐसे में इजरायल-भारत साझेदारी न केवल द्विपक्षीय बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेतन्याहू ने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद होता रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे एक ऐसे व्यापक रणनीतिक ढाँचे की कल्पना कर रहे हैं,जिसमें मध्य पूर्व और उसके आसपास समान विचारधारा वाले देशों का एक गठबंधन तंत्र विकसित किया जाए। उनके अनुसार,यह गठबंधन उन देशों को एक साथ लाएगा जो क्षेत्रीय चुनौतियों,सुरक्षा खतरों और कट्टरपंथी ताकतों के विरुद्ध साझा दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने इसे “हेक्सागन ऑफ अलायंस” जैसे एक व्यापक ढाँचे के रूप में रेखांकित किया,जो भविष्य में क्षेत्रीय स्थिरता को नई मजबूती दे सकता है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में अमेरिका के साथ इजरायल के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के बीच एक अनूठा और ऐतिहासिक गठबंधन है,जो न केवल राज्य स्तर पर बल्कि व्यक्तिगत नेतृत्व संबंधों के माध्यम से भी मजबूत हुआ है। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि इजरायल अन्य देशों के साथ गठबंधन नहीं चाहता। इसके विपरीत,उनका उद्देश्य समान विचारधारा वाले देशों के साथ साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ाना है और भारत इस रणनीतिक दृष्टिकोण में एक प्रमुख भागीदार है।

प्रधानमंत्री मोदी की 25-26 फरवरी की इस यात्रा का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। वे इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करेंगे,जो किसी भी विदेशी नेता के लिए सम्मान की बात मानी जाती है। इसके अतिरिक्त,वे नेतन्याहू के साथ यरुशलम स्थित होलोकॉस्ट स्मारक याद वाशेम का दौरा करेंगे और वहाँ श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह कार्यक्रम ऐतिहासिक स्मृति और मानवीय मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी एक उच्च-प्रौद्योगिकी नवाचार कार्यक्रम में भी भाग लेंगे,जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता,क्वांटम कंप्यूटिंग,साइबर सुरक्षा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष चर्चा होगी। भारत और इजरायल दोनों ही स्टार्टअप इकोसिस्टम और इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में तकनीकी सहयोग को और गहरा करने के लिए यह मंच अहम भूमिका निभा सकता है। रक्षा तकनीक,ड्रोन सिस्टम,कृषि प्रौद्योगिकी,जल प्रबंधन और साइबर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में पहले से मौजूद सहयोग को और विस्तार देने पर भी विचार होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा 2017 के ऐतिहासिक दौरे के लगभग नौ वर्ष बाद हो रही है। 2017 में वे इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उस यात्रा के दौरान रक्षा,कृषि,जल संरक्षण,नवाचार और अंतरिक्ष सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में समझौते हुए थे। उसी दौर में भारत और इजरायल के संबंधों ने पारंपरिक कूटनीतिक सीमाओं को पार करते हुए खुले और रणनीतिक साझेदारी का रूप लिया था। इसके बाद 2018 में नेतन्याहू की भारत यात्रा ने इस साझेदारी को और मजबूती दी थी।

मध्य पूर्व में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा विशेष महत्व रखता है। आतंकवाद-रोधी सहयोग,रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर भारत और इजरायल पहले से ही निकटता से काम कर रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इजरायल भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है,जबकि भारत इजरायली तकनीक और उपकरणों के लिए एक बड़ा बाजार है।

इस यात्रा के दौरान व्यापार विस्तार,निवेश के नए अवसर,साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं,बल्कि ठोस परिणाम देने वाला हो सकता है। विशेष रूप से हाई-टेक सेक्टर में संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं पर सहमति बन सकती है,जिससे दोनों देशों के स्टार्टअप और टेक उद्योग को लाभ मिलेगा।

इजरायल की आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा की घोषणा ने घरेलू स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। कुछ विपक्षी नेताओं ने कनेस्सेट में विदेशी नेता के संबोधन को लेकर प्रक्रियात्मक सवाल उठाए हैं। हालाँकि,सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा इजरायल की विदेश नीति और रणनीतिक हितों के अनुरूप है और इससे देश की वैश्विक छवि मजबूत होगी।

भारत की ओर से भी इस यात्रा को व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण के तहत देखा जा रहा है। भारत पश्चिम एशिया के साथ संतुलित और बहु-आयामी संबंध बनाए रखने की नीति पर काम कर रहा है। एक ओर भारत के अरब देशों के साथ मजबूत ऊर्जा और प्रवासी भारतीय संबंध हैं,वहीं दूसरी ओर इजरायल के साथ सुरक्षा और तकनीकी सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में यह दौरा भारत की बहुध्रुवीय कूटनीति का उदाहरण माना जा सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच व्यक्तिगत समीकरण भी इस साझेदारी को गति देने में सहायक रहे हैं। दोनों नेताओं ने कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे की सराहना की है और साझा हितों पर खुलकर बात की है। इस बार की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य,ईरान से जुड़े मुद्दे, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा को भारत-इजरायल संबंधों के अगले चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देगी,बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच सामरिक तालमेल को भी नई दिशा प्रदान करेगी। दोनों पक्ष साझा चुनौतियों का सामना करने और पारस्परिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।