अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

“अब बहुत देर हो चुकी है”—ईरान पर हमलों के बीच ट्रंप का दावा,भारी नुकसान के बाद बातचीत को तैयार तेहरान

वाशिंगटन,6 मार्च (युआईटीवी)- मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारी सैन्य नुकसान झेलने के बाद अब ईरान बातचीत की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने ईरान की मिसाइल,ड्रोन और वायु रक्षा क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है,जिसके बाद तेहरान अब समझौते के रास्ते तलाश रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के प्रतिनिधि संपर्क कर रहे हैं और यह जानना चाह रहे हैं कि समझौता किस तरह संभव हो सकता है,लेकिन उनके मुताबिक यह प्रयास काफी देर से शुरू हुआ है।

यह बयान उस समय आया जब व्हाइट हाउस में 2025 एमएलएस चैंपियन क्लब इंटर मियामी सीएफ को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान की सैन्य ताकत को तेजी से कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि संयुक्त सैन्य अभियान उम्मीद से कहीं अधिक तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इसके परिणाम भी जल्द दिखाई दे रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि ईरान अब लगातार संपर्क कर रहा है और समझौते का रास्ता तलाश रहा है। उनके शब्दों में, “वे फोन कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि समझौता कैसे किया जाए। मैंने उनसे कहा कि अब आप थोड़ा देर से आए हैं।” अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन मौजूदा सैन्य दबाव को ईरान के खिलाफ एक रणनीतिक लाभ के रूप में देख रहा है।

ट्रंप के अनुसार अमेरिका और इजरायल की सेनाएँ ईरान की मिसाइल क्षमताओं को व्यवस्थित तरीके से निशाना बना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही ईरान की ओर से किसी मिसाइल को लॉन्च किया जाता है,कुछ ही मिनटों के भीतर उस लॉन्च सिस्टम को पहचानकर नष्ट कर दिया जाता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली सैन्य तकनीक इतनी उन्नत है कि मिसाइल लॉन्च होने के चार मिनट के भीतर ही संबंधित लॉन्चर को तबाह कर दिया जाता है। उनके मुताबिक इस रणनीति ने ईरान की मिसाइल क्षमता को तेजी से कमजोर किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में ईरान की नौसैनिक ताकत को भी बड़ा झटका लगा है। ट्रंप के अनुसार केवल तीन दिनों के भीतर ईरान के 24 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और विमानन क्षमता को भी भारी नुकसान हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के अधिकांश एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार खत्म हो चुके हैं,जिससे उसकी वायु सुरक्षा प्रणाली लगभग निष्क्रिय हो गई है।

ट्रंप के मुताबिक ईरान की लगभग 60 प्रतिशत मिसाइल प्रणाली और करीब 64 प्रतिशत लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही नष्ट किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर झटका लगा है और यही वजह है कि अब तेहरान बातचीत की ओर झुकाव दिखा रहा है। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है,लेकिन यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था के भीतर मौजूद अधिकारियों से भी सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के सुरक्षा तंत्र के भीतर मौजूद लोग मौजूदा नेतृत्व से अलग होने का फैसला करते हैं,तो अमेरिका उनके लिए एक अलग भविष्य का रास्ता खोलने के लिए तैयार है। ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड,सेना और पुलिस बल के सदस्यों से हथियार डालने की अपील की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दुनिया भर में तैनात ईरानी राजनयिकों को भी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से अलग होकर नए राजनीतिक बदलाव का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने विदेशों में मौजूद ईरानी राजनयिकों से अपील करते हुए कहा कि वे शरण मांगें और एक नए तथा बेहतर ईरान के निर्माण में सहयोग दें। ट्रंप ने संकेत दिया कि जो लोग अमेरिका के साथ सहयोग करेंगे,उन्हें सुरक्षा और कानूनी संरक्षण दिया जा सकता है।

ट्रंप ने इस संदर्भ में यह भी कहा कि सहयोग करने वाले लोगों को पूर्ण इम्यूनिटी दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो लोग सहयोग करेंगे वे पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे,लेकिन जो लोग विरोध करेंगे उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के इस बयान को कई विश्लेषक मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति के रूप में देख रहे हैं,जिसका उद्देश्य ईरान की आंतरिक राजनीतिक और सैन्य संरचना में दरार पैदा करना हो सकता है।

ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इस सैन्य अभियान के दीर्घकालिक परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक हो सकते हैं। उनके मुताबिक अमेरिका की कार्रवाई से मध्य-पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी और इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय में इस अभियान से तेल की कीमतों,शेयर बाजार और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

हालाँकि,इस संघर्ष को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ती जा रही है। मध्य-पूर्व दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक क्षेत्रों में से एक है और यहाँ होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है। खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि दुनिया के कई प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग इसी इलाके से होकर गुजरते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और गहराता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव,समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे इस संघर्ष से सीधे जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि कई देश इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को भी तलाश रहे हैं।

अमेरिका लंबे समय से ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह क्षेत्र में सक्रिय कई सशस्त्र संगठनों को समर्थन देता है और परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ईरान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

फिलहाल अमेरिका और इजरायल की ओर से जारी सैन्य दबाव ने मध्य-पूर्व की स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। ट्रंप के ताजा बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि वाशिंगटन इस सैन्य अभियान को अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने के लिए निर्णायक मोड़ पर मान रहा है। हालाँकि,यह देखना अभी बाकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है—क्या वास्तव में बातचीत की राह खुलेगी या क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा।