नई दिल्ली,30 जनवरी (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय रिश्तों के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में अहम मुलाकात की। खास बात यह रही कि एक ही हफ्ते में दोनों नेताओं की यह दूसरी बैठक थी,जिससे साफ संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय लगातार गहराता जा रहा है। इस मुलाकात में द्विपक्षीय साझेदारी के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई और भविष्य के सहयोग को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया।
मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत किया। उन्होंने लिखा कि नई दिल्ली में उनसे मिलकर खुशी हुई और बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका साझेदारी के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श हुआ। जयशंकर ने विश्वास जताया कि सर्जियो गोर भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को और अधिक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएँगे। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब दोनों देश रणनीतिक,रक्षा,आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चों पर लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर हाल के दिनों में भारत के साथ संबंधों को लेकर बेहद सक्रिय नजर आए हैं। बुधवार को उन्होंने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को “मजबूत और गहराता हुआ” बताया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ मुलाकात के बाद गोर ने कहा कि 2025 में हस्ताक्षर किया गया 10 साल का रक्षा समझौता दोनों देशों के सैन्य और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊँचाई देगा। उन्होंने इस समझौते को दीर्घकालिक सहयोग का आधार बताते हुए कहा कि इससे संयुक्त सैन्य अभियानों,रक्षा उपकरणों की बिक्री और तकनीकी सहयोग को और गति मिलेगी।
सर्जियो गोर ने इस मुलाकात के बाद भी ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की,जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि पिछले साल दोनों देशों ने 10 साल का डिफेंस पैक्ट साइन किया था,जिससे रक्षा क्षेत्र में सहयोग काफी गहरा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी रहेंगे और अतिरिक्त रक्षा बिक्री की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। गोर के मुताबिक,यह साझेदारी दोनों देशों के बीच भरोसे और साझा हितों को दर्शाती है। उन्होंने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का धन्यवाद भी किया और भारत की मेजबानी की सराहना की।
इससे पहले सर्जियो गोर इस हफ्ते की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल हुए थे। यह उनका पहला अवसर था जब उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस अनुभव को उन्होंने सम्मान और गर्व का क्षण बताया। गणतंत्र दिवस के बाद गोर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ और पहली बार इस ऐतिहासिक परेड में शामिल होकर वह खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे भारत के संविधान और लोकतांत्रिक भावना का उत्सव बताया।
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अमेरिकी निर्मित विमानों को भारतीय आसमान में उड़ते देख सर्जियो गोर विशेष रूप से उत्साहित नजर आए। उन्होंने इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की ताकत का एक शक्तिशाली प्रतीक करार दिया। उनके इस बयान को रक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है,क्योंकि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य विश्वास और तकनीकी सहयोग को दर्शाता है।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संवाद का एक और अहम उदाहरण 25 जनवरी को देखने को मिला,जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रतिनिधि माइक रोजर्स,प्रतिनिधि एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस शामिल थे। इस बैठक में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे। इस बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने,इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और यूक्रेन में जारी संघर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी कांग्रेसनल प्रतिनिधिमंडल के साथ अच्छी और सार्थक बातचीत हुई,जिसमें भारत-अमेरिका संबंधों,इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन संकट के अलग-अलग आयामों पर चर्चा की गई। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेसनल स्तर की बातचीत हमेशा से भारत-अमेरिका रिश्तों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है,क्योंकि इससे नीतिगत समझ और दीर्घकालिक सहयोग को मजबूती मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही हफ्ते में जयशंकर और सर्जियो गोर की दूसरी मुलाकात, रक्षा सचिव और कांग्रेसनल प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चाएँ और गणतंत्र दिवस जैसे प्रतीकात्मक आयोजनों में अमेरिकी भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत-अमेरिका संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों,वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों के बीच दोनों देशों के बीच रणनीतिक तालमेल और भी अहम हो गया है।
भारत और अमेरिका के रिश्ते अब केवल द्विपक्षीय व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहे,बल्कि रक्षा,तकनीक,ऊर्जा,आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। सर्जियो गोर की सक्रियता और जयशंकर के साथ उनकी लगातार मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में दोनों देश अपने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं। कुल मिलाकर,यह सप्ताह भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसने भविष्य की साझेदारी की मजबूत नींव रख दी है।
