पेरिस,28 मार्च (युआईटीवी)- फ्रांस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर केंद्र में रही,जब विदेश मंत्री एस.जयशंकरने अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा से अहम मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात,क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब ईरान,इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है।
बैठक के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उनकी जयशंकर के साथ सार्थक और सकारात्मक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने न केवल मध्य पूर्व की स्थिति पर विचार साझा किए,बल्कि यह भी चर्चा की कि किस तरह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखी जा सकती है और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
सिबिहा ने यह भी कहा कि दोनों देशों ने भविष्य में संपर्क बढ़ाने और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में सहमति जताई है। यह संकेत देता है कि भारत और यूक्रेन के बीच संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है,खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
दूसरी ओर,जयशंकर ने भी जी7 बैठक के विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए वैश्विक मुद्दों पर भारत का स्पष्ट और संतुलित रुख सामने रखा। उन्होंने वैश्विक शासन में सुधार पर आयोजित सत्र में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार,मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधिक बनाना जरूरी है।
जयशंकर ने शांति स्थापना अभियानों को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की भी आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी है,तब शांति अभियानों का तेजी से और कुशलता से संचालन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने मानवीय सहायता की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया,ताकि संकटग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री समय पर पहुँच सके।
उन्होंने खास तौर पर “ग्लोबल साउथ” यानी विकासशील देशों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उठाया। ऊर्जा संकट,उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे आज इन देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। जयशंकर ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इन समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
जी7 बैठक के दूसरे सत्र में जयशंकर ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे,यानी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
जयशंकर ने कहा कि आईएमईसी जैसी पहल वैश्विक व्यापार को नया आयाम दे सकती है और विभिन्न क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बना सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ और यूनाइटेड किंगडम के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते इस परियोजना की उपयोगिता को और बढ़ाते हैं।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के बीच इस पहल को लेकर बढ़ते उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बहुपक्षीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह सहयोग न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा,बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी मजबूत करेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। जी7 जैसे महत्वपूर्ण मंच पर सक्रिय भागीदारी और विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है।
जयशंकर और सिबिहा की यह मुलाकात भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगी,बल्कि वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की नई संभावनाएँ भी खोलेगी।
फ्रांस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की सक्रिय भूमिका और विभिन्न देशों के साथ उसकी बातचीत यह दर्शाती है कि वह वैश्विक चुनौतियों के समाधान में एक जिम्मेदार और प्रभावशाली भागीदार के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन कूटनीतिक प्रयासों का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक स्थिरता पर क्या असर पड़ता है।
