लक्जमबर्ग सिटी,7 जनवरी (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों यूरोप यात्रा के तहत लक्ज़मबर्ग के दौरे पर हैं,जहाँ उनका जोर दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नए आयाम देने पर है। मंगलवार को अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से मुलाकात की। इस मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा की और लिखा कि उन्हें ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से हार्दिक अभिवादन पहुँचाया और लक्ज़मबर्ग के नेतृत्व द्वारा भारत के प्रति व्यक्त सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।
जयशंकर ने कहा कि ग्रैंड ड्यूक के साथ बातचीत बेहद रचनात्मक रही और इसमें ऐसी संभावनाओं पर चर्चा हुई,जिनसे दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत-लक्ज़मबर्ग साझेदारी केवल परंपरागत क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,बल्कि इसे भविष्य की तकनीकों और नवाचार-आधारित क्षेत्रों तक विस्तार देने की जरूरत है।
इससे पहले विदेश मंत्री ने लक्ज़मबर्ग के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापक मुद्दों पर बातचीत हुई,जिसमें व्यापार,निवेश,सुरक्षा,डिजिटल अर्थव्यवस्था और उभरती तकनीकों पर सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी। जयशंकर ने बैठक के दौरान कहा कि भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ परस्पर सहयोग को और ज्यादा प्रोडक्टिव और परिणाम-उन्मुख बनाया जा सकता है। उन्होंने फिनटेक,स्पेस,डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को परिभाषित करेंगे और भारत तथा लक्ज़मबर्ग दोनों इन क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।
जयशंकर ने यह भी उल्लेख किया कि लक्ज़मबर्ग में भारतीय समुदाय सक्रिय और प्रभावशाली है,जो सांस्कृतिक सेतु के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि वह शाम को भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करेंगे और उनके अनुभवों तथा अपेक्षाओं को समझने की कोशिश करेंगे। विदेश मंत्री ने माना कि मजबूत ट्रेड अकाउंट के अलावा भी कई ऐसे आयाम हैं,जिन पर काम करके द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी जा सकती है।
बातचीत के दौरान वैश्विक परिदृश्य और बदलते भू-राजनीतिक संतुलन पर भी विचार-विमर्श हुआ। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई जटिल चुनौतियों से जूझ रही है,चाहे वह आर्थिक अनिश्चितता हो,तकनीकी प्रतिस्पर्धा हो या सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियाँ। ऐसे में खुली और ईमानदार चर्चा दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कठिन सवालों से पीछे नहीं हटेगा और अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर साझा समाधान तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्री ने लक्ज़मबर्ग सरकार द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए जेवियर बेटेल का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच भरोसा बढ़ा है और अब यह रिश्ता नए अवसरों के द्वार खोलने के लिए तैयार है। जयशंकर ने माना कि यह दौरा पुराने संबंधों को फिर से परिभाषित करने और उन्हें अधिक आधुनिक व प्रासंगिक बनाने का एक अवसर है।
भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच आर्थिक सहयोग काफी पुराना है,विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं और निवेश के क्षेत्र में। लक्ज़मबर्ग यूरोप का एक महत्वपूर्ण फाइनेंशियल हब माना जाता है और भारत के कई बड़े निवेश फंड तथा कंपनियाँ यहाँ पंजीकृत हैं। अब जब दुनिया तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है,दोनों देशों के लिए यह स्वाभाविक है कि वे फिनटेक और डिजिटल पेमेंट्स जैसी नई तकनीकों में मिलकर काम करें। जयशंकर ने कहा कि इन क्षेत्रों में सहयोग न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाएगा,बल्कि नवाचार को भी प्रोत्साहित करेगा।
स्पेस सेक्टर भी दोनों देशों के बीच सहयोग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है। भारत ने हाल के वर्षों में अंतरिक्ष तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति की है,वहीं लक्ज़मबर्ग ने अंतरिक्ष संसाधन प्रबंधन और स्पेस-इंडस्ट्री से जुड़े नियामकीय ढाँचों में महत्वपूर्ण निवेश किया है। जयशंकर का मानना है कि यदि दोनों देश अपने-अपने अनुभव साझा करें,तो इससे वैश्विक स्तर पर भी नई संभावनाएँ पैदा हो सकती हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सहयोग का मुद्दा भी चर्चाओं में प्रमुख रहा। जयशंकर ने कहा कि एआई केवल तकनीकी विषय नहीं,बल्कि नीति,नैतिकता और वैश्विक शासन से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए भारत और लक्ज़मबर्ग जैसे लोकतांत्रिक देश मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित कर सकते हैं,जिसमें नवाचार के साथ-साथ पारदर्शिता और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
जयशंकर का लक्ज़मबर्ग दौरा भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसका उद्देश्य यूरोप में नए साझेदारों के साथ संबंध गहरा करना और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस यात्रा से यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत केवल परंपरागत सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता,बल्कि वह भविष्य की अर्थव्यवस्था और तकनीक आधारित साझेदारी को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है। आने वाले समय में इस दौरे से जुड़े फैसलों का असर द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापक यूरोपीय संदर्भ में भी दिखाई दे सकता है।
