भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (तस्वीर क्रेडिट@DrSJaishankar)

ब्रुसेल्स में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता: भारत-ईयू संबंधों को नई दिशा देने पर जोर

ब्रुसेल्स,17 मार्च (युआईटीवी)- बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक में भाग लिया,जिसमें वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ भारत-ईयू संबंधों को नई ऊँचाई देने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह उनकी दो दिवसीय यात्रा का दूसरा दिन था,जो कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बैठक में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ व्यापार,निवेश, प्रौद्योगिकी,रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, यूक्रेन की स्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक के बाद सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों से मिलकर उन्हें खुशी हुई और यह बैठक बेहद उपयोगी रही। उन्होंने इस बैठक के लिए आमंत्रित करने पर यूरोपीय यूनियन की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास का आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि 2026 में भारत और यूरोपीय यूनियन के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हुआ है और अब समय है कि विभिन्न समझौतों को ठोस परिणामों में बदला जाए।

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी बातचीत का केंद्र व्यापार,निवेश,तकनीकी सहयोग,लोगों की आवाजाही और रक्षा सहयोग जैसे विषय रहे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं,जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत और यूरोपीय यूनियन न केवल आर्थिक,बल्कि सामरिक स्तर पर भी अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं।


बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बढ़ती समानता भी इस बैठक में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और ईयू के बीच संवाद और सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों पक्ष वैश्विक स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

इस बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी चर्चा हुई,जहाँ हाल के दिनों में तनाव लगातार बढ़ा है। इसके अलावा यूक्रेन में चल रहे युद्ध और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इन मुद्दों पर भारत और यूरोपीय यूनियन के दृष्टिकोण में काफी समानता देखने को मिली,जो भविष्य में सहयोग को और मजबूत कर सकती है।

अपनी इस यात्रा के दौरान सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल से भी मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन चर्चा हुई और दोनों नेताओं ने अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। जयशंकर ने इस मुलाकात को सार्थक बताते हुए कहा कि इस तरह के संवाद से वैश्विक मुद्दों पर बेहतर समझ विकसित होती है।

इसके अलावा उन्होंने स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार और वहाँ के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि स्लोवाकिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई गति दी है और अब इन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में विनिर्माण,रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह संकेत है कि भारत अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा नई और उभरती हुई तकनीकों में भी सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है।

इस दौरे के दौरान जयशंकर ने यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जनवरी में उनकी भारत यात्रा ने दोनों पक्षों के संबंधों में एक नया मोड़ लाया है। जयशंकर ने कहा कि उस यात्रा के दौरान हुए समझौतों को अब तेजी से लागू किया जा रहा है और दोनों पक्ष इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन के विचार बेहद महत्वपूर्ण हैं और भारत उनके साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच उच्च स्तर पर संवाद लगातार जारी है और दोनों पक्ष भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए तैयार हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की यह यात्रा भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है,जिसमें वह विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। यूरोपीय यूनियन के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

ब्रुसेल्स में हुई यह बैठक और उससे जुड़े द्विपक्षीय संवाद यह दर्शाते हैं कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।