जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री साने ताकाइची (तस्वीर क्रेडिट@ashokshera94)

जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं साने ताकाइची,पीएम मोदी ने दी बधाई — भारत-जापान साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की उम्मीद

टोक्यो,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- जापान ने अपने राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है। मंगलवार को जापान की संसद ने साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना,जिससे वहाँ की राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई देते हुए कहा कि वह भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “साने ताकाइची,जापान की प्रधानमंत्री चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई। मैं भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने के लिए आपके साथ मिलकर कार्य करने की आशा करता हूँ। हमारे गहरे होते संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति,स्थिरता और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”

ताकाइची का प्रधानमंत्री चुना जाना न केवल जापान के लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रतीकात्मक क्षण है। यह उस देश के लिए बेहद अहम है,जहाँ लंबे समय तक राजनीति पुरुषों के नियंत्रण में रही है और महिला नेताओं की भागीदारी सीमित रही है। जापान की संसद के दोनों सदनों में ताकाइची ने बहुमत हासिल किया। उच्च सदन में उन्हें 125 वोट मिले,जो आवश्यक बहुमत से केवल एक वोट अधिक थे,जबकि निचले सदन में उन्होंने 237 वोटों के साथ सहज जीत दर्ज की। यह जीत पुनः मतदान के बाद हुई,जिसमें उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए इतिहास रचा।

साने ताकाइची जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की नेता हैं और उन्होंने शनिवार को हुए पार्टी नेतृत्व चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी शिंजीरो को मात दी थी। उन्हें 185 वोट मिले,जबकि शिंजीरो को 156 वोटों पर संतोष करना पड़ा। यह मुकाबला बेहद कड़ा था,क्योंकि पहले दौर में किसी को भी आवश्यक बहुमत नहीं मिला था। ताकाइची की जीत ने न केवल उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया,बल्कि यह संदेश भी दिया कि जापान में अब राजनीति में महिलाओं की भूमिका और प्रभाव को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।

साने ताकाइची का राजनीतिक सफर काफी रोचक और प्रेरणादायक रहा है। राजनीति में आने से पहले वह एक टीवी एंकर थीं। 1993 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निचले सदन का चुनाव लड़ा और विजयी रहीं। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे जापान की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। 1996 में वह लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में शामिल हुईं,जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आधार प्रदान किया। उनका राजनीतिक करियर तब और मजबूत हुआ जब उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के नेतृत्व में पहली बार कैबिनेट में जगह मिली। उस समय उन्हें ओकिनावा और उत्तरी क्षेत्रों के मामलों की मंत्री बनाया गया था।

ताकाइची की प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए वह जल्द ही एलडीपी की नीति अनुसंधान परिषद की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। यह पद जापानी राजनीति में काफी प्रभावशाली माना जाता है और यहाँ तक पहुँचने वाली वह पहली महिला थीं। 2022 से 2024 तक ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने जापान की आर्थिक नीतियों को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ आर्थिक हितों को जोड़ने का काम किया। इसके अलावा,वह आंतरिक मामलों की मंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल वाली मंत्री भी रही हैं।

ताकाइची की यह उपलब्धि जापान की महिलाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत मानी जा रही है। पार्टी की पूर्व न्याय मंत्री मिडोरी मात्सुशिमा ने कहा कि “यह जापान के लिए गर्व का क्षण है। ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना उन सभी युवतियों के लिए एक प्रेरणा है,जो राजनीति में प्रवेश करना चाहती हैं,लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि के अभाव में हिचकिचाती हैं। यह जीत इस बात का प्रमाण है कि अब जापान में क्षमता और नेतृत्व की पहचान लिंग से नहीं,बल्कि योग्यता से होगी।”

अब साने ताकाइची को पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के कार्यकाल के शेष हिस्से को पूरा करना होगा,जो सितंबर 2027 तक चलेगा,लेकिन उनके सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। जापान फिलहाल आर्थिक मंदी,बढ़ती महँगाई और येन की गिरती कीमत जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इन चुनौतियों ने न केवल जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है,बल्कि सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की लोकप्रियता पर भी असर डाला है। हाल के चुनावों में एलडीपी को झटके लगे हैं और पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

ऐसे में ताकाइची के सामने दोहरी जिम्मेदारी है,एक ओर उन्हें आर्थिक मोर्चे पर सुधार लाना है,तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर एकजुटता बनाए रखनी है। विश्लेषकों का मानना है कि वह अपने ठोस और स्पष्ट विचारों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हमेशा जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा,आर्थिक स्वतंत्रता और पारंपरिक मूल्यों की रक्षा की वकालत की है। उनकी नीति प्राथमिकताओं में आर्थिक सुधारों को गति देना,महिलाओं की कार्य भागीदारी को बढ़ाना और युवाओं के लिए रोजगार अवसर सृजित करना शामिल है।

साने ताकाइची का प्रधानमंत्री पद पर पहुँचना भारत-जापान संबंधों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को गहराई दे चुके हैं। दोनों देशों ने सुरक्षा,प्रौद्योगिकी और आपसी व्यापार को लेकर कई अहम समझौते किए हैं। ताकाइची का नेतृत्व इस दिशा में और मजबूती ला सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश में इस बात की झलक साफ दिखाई देती है कि भारत इस ऐतिहासिक अवसर को दोनों देशों के बीच रिश्तों को और ऊँचाई तक ले जाने के अवसर के रूप में देख रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ताकाइची की वैश्विक दृष्टि और भारत के साथ सहयोग की उनकी संभावनाएँ भविष्य में एशिया की भू-राजनीति पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। जापान की विदेश नीति पर उनका रुझान हमेशा अमेरिका और भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ घनिष्ठता बढ़ाने की ओर रहा है। उनके नेतृत्व में जापान न केवल क्षेत्रीय स्थिरता,बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक सशक्त भूमिका निभा सकता है।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ,जापान ने यह साबित कर दिया है कि परिवर्तन संभव है,बस नेतृत्व में दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। साने ताकाइची अब उस परिवर्तन की प्रतीक बन चुकी हैं, जिन्होंने इतिहास की सीमाओं को तोड़ा और एक नई परंपरा की शुरुआत की है। उनके नेतृत्व में जापान किस दिशा में बढ़ेगा,यह आने वाला समय बताएगा,लेकिन इतना तो तय है कि उनका प्रधानमंत्री बनना विश्व राजनीति में महिला नेतृत्व की शक्ति का एक नया अध्याय खोल चुका है।