नई दिल्ली,12 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर वॉशिंगटन की नीति पर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका का उद्देश्य ईरानी सरकार को हटाना या बदलना नहीं है,बल्कि उसका मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान के पास परमाणु हथियार न पहुँचे। अजरबैजान की यात्रा पूरी कर वॉशिंगटन लौटने से पहले एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान वेंस ने यह बात कही। उनके इस बयान को अमेरिका के हालिया रुख में आई नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका ईरान में सरकार बदलना चाहता है,तो वेंस ने साफ शब्दों में जवाब दिया कि अगर ईरानी जनता अपनी सरकार को हटाना चाहती है,तो यह उनका आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अमेरिका का ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टीम को निर्देश दिया है कि वे ऐसी डील की दिशा में काम करें,जिससे यह पक्का हो जाए कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।
वेंस ने आगे कहा कि अमेरिका कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ईरान के साथ एक समझौते की संभावना तलाश रहा है। हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर बातचीत के जरिए कोई ठोस समझौता नहीं हो पाता है,तो अन्य विकल्प भी खुले रहेंगे। उनके शब्दों में,राष्ट्रपति अपने सभी विकल्प सुरक्षित रखेंगे। यह बयान एक ओर जहाँ बातचीत की प्रतिबद्धता दिखाता है,वहीं दूसरी ओर संभावित सख्त कदमों के संकेत भी देता है।
अमेरिकी सैन्य शक्ति का उल्लेख करते हुए वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं क्योंकि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक राष्ट्रपति अलग निर्देश नहीं देते,तब तक प्रशासन बातचीत के जरिए सकारात्मक नतीजे तक पहुँचने की कोशिश जारी रखेगा। यह संकेत देता है कि फिलहाल वॉशिंगटन कूटनीति को प्राथमिक रास्ता मान रहा है,लेकिन दबाव की रणनीति को पूरी तरह छोड़ा नहीं गया है।
जेडी वेंस का यह बयान ऐसे समय आया है,जब हाल ही में अमेरिका के रुख को लेकर अलग संकेत मिल रहे थे। कुछ सप्ताह पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों से देश के संस्थानों पर “कब्जा” करने का आह्वान किया था। उस बयान को कई विश्लेषकों ने ईरान में सत्ता परिवर्तन के समर्थन के रूप में देखा था। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। हालाँकि,अब वेंस के बयान से संकेत मिलता है कि प्रशासन आधिकारिक तौर पर शासन परिवर्तन की नीति नहीं अपना रहा है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में वार्ता का दूसरा दौर होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर ईरान ऐसी डील के लिए तैयार नहीं होता,जिसमें वह अपनी परमाणु क्षमता को सीमित करे और अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी अंकुश लगाए,तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इस चेतावनी ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ाई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेंस का बयान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करने की कोशिश हो सकता है कि अमेरिका फिलहाल सैन्य टकराव नहीं चाहता। मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव का बढ़ना वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है। कूटनीतिक प्रयासों की सफलता न सिर्फ दोनों देशों के लिए,बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
ईरान ने भी अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बताया है,लेकिन पश्चिमी देश लंबे समय से इस पर संदेह जताते रहे हैं। 2015 के परमाणु समझौते के बाद कुछ समय तक तनाव कम हुआ था,लेकिन बाद में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद हालात फिर बिगड़ गए। अब नई बातचीत से उम्मीदें तो जगी हैं,लेकिन अविश्वास अभी भी गहरा है।
जेडी वेंस के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल शासन परिवर्तन की बजाय परमाणु मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी स्थायी समझौते तक पहुँच पाते हैं या नहीं। फिलहाल वॉशिंगटन ने कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति के साथ अपने विकल्प खुले रखे हैं।
