नई दिल्ली,13 फरवरी (युआईटीवी)- भारत में आयोजित होने जा रहे एआई इम्पेक्ट समिट 2026 को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्साह बढ़ता जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इंसियो लूला दा सिल्वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत के दौरे पर आएँगे और 19-20 फरवरी को आयोजित एआई इम्पेक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। यह दौरा भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रपति लूला 21 फरवरी को भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी होगी। इसके अलावा वे उपराष्ट्रपति समेत कई अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से भी भेंट करेंगे। राष्ट्रपति लूला अपने साथ एक उच्चस्तरीय बिजनेस डेलिगेशन और अधिकारियों की टीम भी लेकर आ रहे हैं,जिससे संकेत मिलता है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा।
भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग रहा है, चाहे वह ब्रिक्स हो,जी20 हो या संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मुद्दे। ऐसे में एआई इम्पेक्ट समिट के बहाने दोनों देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल नवाचार,तकनीकी सहयोग और स्थिर विकास जैसे क्षेत्रों में नए आयाम जुड़ने की संभावना है। एआई आज वैश्विक नीति निर्माण,उद्योग और शासन प्रणाली का अहम हिस्सा बनता जा रहा है और भारत इस क्षेत्र में खुद को एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने पहले ही घोषणा की थी कि मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक तीन दिवसीय भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच ‘हॉरिजोन 2047’ रोडमैप के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे,जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग एक प्रमुख विषय रहेगा।
भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में रक्षा,अंतरिक्ष,समुद्री सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में काफी मजबूत हुए हैं। एआई इम्पेक्ट समिट में मैक्रों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नवाचार में भी गहरे सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में समिट में हिस्सा लेंगे,जहाँ वे वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं के साथ एआई के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
मुंबई में दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन भी करेंगे। यह कार्यक्रम पूरे वर्ष 2026 तक दोनों देशों में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य नवाचार,स्टार्टअप सहयोग,शिक्षा,अनुसंधान और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देना है। इस पहल से दोनों देशों के युवाओं,वैज्ञानिकों और उद्योग जगत को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
एमईए प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि एआई इम्पेक्ट समिट में अन्य कई देशों के नेता, नीति निर्माता,उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। हालाँकि,उनके नामों की घोषणा बाद में की जाएगी। इस समिट का उद्देश्य एआई की क्षमता को गवर्नेंस,नवाचार और सतत विकास के संदर्भ में प्रदर्शित करना और उस पर वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाना है।
भारत ऐसे समय में इस समिट की मेजबानी कर रहा है,जब दुनिया भर में एआई के उपयोग,उसके नियमन और नैतिक पहलुओं को लेकर गहन चर्चा चल रही है। भारत की कोशिश है कि वह एआई को समावेशी विकास,डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सामाजिक कल्याण के साथ जोड़कर एक संतुलित मॉडल पेश करे। ब्राजील और फ्रांस जैसे प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी इस मंच को और अधिक वैश्विक महत्व प्रदान करती है।
एआई इम्पेक्ट समिट 2026 भारत के लिए न केवल तकनीकी नेतृत्व दिखाने का अवसर है,बल्कि यह उसके वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव को भी मजबूत करने का मंच बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस समिट से कौन-कौन से नए समझौते और पहलें सामने आती हैं,जो भविष्य की वैश्विक तकनीकी दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
