अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

ईरान पर संयुक्त कार्रवाई के बाद नेतन्याहू का बयान, ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बताया; ट्रंप ने भी दी चेतावनी

तेल अवीव,28 फरवरी (युआईटीवी)- ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे इजरायल के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई करार दिया और कहा कि यह कदम ईरान में “आतंकवादी शासन” से पैदा हुए खतरे को खत्म करने के लिए उठाया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान में उस खतरे के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया है,जो न केवल इजरायल बल्कि पूरे विश्व के लिए जोखिम बनता जा रहा था। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि इस संयुक्त अभियान के लिए वह उनका दिल से धन्यवाद करते हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन बहादुर ईरानी लोगों के लिए अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने की परिस्थितियाँ तैयार करेगा।

नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान के शासन परिवर्तन का संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई ऐसे हालात पैदा करेगी,जिनसे ईरान की जनता अपने भविष्य का फैसला खुद कर सके। उन्होंने ईरान के नागरिकों से आह्वान किया कि वे जुल्म के बोझ को हटाएँ और एक स्वतंत्र तथा मूल्यों पर आधारित शांतिपूर्ण ईरान की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाएँ। उनके इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है,क्योंकि यह सीधे तौर पर तेहरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को भी गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि ईरान की मौजूदा सरकार को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती,क्योंकि इससे न केवल मध्य पूर्व,बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा पर संकट आ सकता है। उन्होंने दोहराया कि इजरायल किसी भी सूरत में ऐसे हालात स्वीकार नहीं करेगा,जो उसके अस्तित्व को खतरे में डालें।

नेतन्याहू ने अपने नागरिकों को भी संबोधित करते हुए आने वाले दिनों को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन “लायन्स रोअर” के दौरान देशवासियों को सेना के निर्देशों का पालन करना होगा और धैर्य व साहस दिखाना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इजरायल एकजुट होकर हर चुनौती का सामना करेगा। उनके शब्दों में, “हम सब मिलकर खड़े होंगे,हम सब मिलकर लड़ेंगे और हम सब मिलकर इजरायल की हमेशा के लिए रक्षा करने में सक्षम होंगे।” यह बयान देश के भीतर एकजुटता और सतर्कता का संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

नेतन्याहू से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी वीडियो संदेश जारी कर हमलों की पुष्टि की थी। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की जनता के हित को ध्यान में रखकर की गई है। उन्होंने दावा किया कि जब यह अभियान पूरा हो जाएगा,तो ईरान के लोग सत्ता सँभाल सकते हैं। ट्रंप के इस बयान को भी ईरान में राजनीतिक परिवर्तन की दिशा में संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स को एक ‘ऑफर’ भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि वे आत्मसमर्पण कर दें,तो उन्हें पूरी माफी दी जाएगी। यह बयान कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इससे अमेरिका की रणनीति स्पष्ट होती है कि वह दबाव के साथ-साथ समझौते की गुंजाइश भी छोड़ रहा है।

इन बयानों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ईरान की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है,लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान इस संयुक्त कार्रवाई को अपनी संप्रभुता पर हमला मान सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और जटिल हो सकते हैं। पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रहा है और इस नई सैन्य कार्रवाई ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह टकराव किस दिशा में जाता है। एक ओर इजरायल और अमेरिका इसे सुरक्षा और अस्तित्व का प्रश्न बता रहे हैं,वहीं दूसरी ओर ईरान इसे बाहरी हस्तक्षेप के रूप में देख सकता है। नेतन्याहू और ट्रंप के बयानों से स्पष्ट है कि दोनों देश इस कार्रवाई को रणनीतिक और वैचारिक स्तर पर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह संयुक्त ऑपरेशन सीमित दायरे में रहता है या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेता है।