डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम सिंह बरी,पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पलटा 2019 का फैसला

चंडीगढ़,7 मार्च (युआईटीवी)- पत्रकार हत्या के चर्चित मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा वर्ष 2019 में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को पलटते हुए यह फैसला सुनाया। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की पीठ ने शनिवार को सुनाया।

हाईकोर्ट ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद यह फैसला दिया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य राम रहीम के खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस आधार पर अदालत ने उन्हें इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया। हालाँकि,इसी मामले में दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर अपील को अदालत ने खारिज कर दिया और उनके खिलाफ विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

यह मामला दो दशक से अधिक समय से देश में चर्चा का विषय बना हुआ था। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरता रहा और इसके बाद 2019 में विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस समय अदालत ने माना था कि हत्या के पीछे डेरा प्रमुख की भूमिका थी और इस आधार पर उन्हें और अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया गया था।

विशेष सीबीआई अदालत ने 11 जनवरी 2019 को राम रहीम को दोषी करार दिया था और इसके छह दिन बाद 17 जनवरी 2019 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ राम रहीम और अन्य सह-आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। उसी अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब यह फैसला सुनाया है।

अदालत का यह निर्णय मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों की कई सप्ताह तक चली विस्तृत जाँच के बाद आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने उन सभी दस्तावेजों,गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों की समीक्षा की,जिनके आधार पर विशेष अदालत ने पहले दोषसिद्धि का फैसला दिया था। इसी समीक्षा के दौरान कुछ अहम मुद्दों पर अदालत ने गंभीरता से विचार किया।

इस मामले की जाँच के दौरान उन गोलियों को लेकर भी विवाद सामने आया था,जिनका कथित तौर पर हत्या को अंजाम देने में इस्तेमाल किया गया था। अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री की जाँच करते समय यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। अदालत ने इन गोलियों से जुड़े साक्ष्यों और जाँच की प्रक्रिया का भी विस्तार से परीक्षण किया।

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या उस समय हुई थी,जब उन्होंने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इसके बाद उन्हें गोली मार दी गई थी। यह घटना लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी रही और पत्रकार सुरक्षा तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक बहस हुई थी।

इस मामले की एक खास बात यह भी रही कि अपराध और दोषसिद्धि के बीच काफी लंबा अंतराल रहा। पत्रकार की हत्या के लगभग 16 साल बाद 2019 में विशेष अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया था। इसी कारण यह मामला लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी चर्चा होती रही।

हालाँकि,हाईकोर्ट द्वारा हत्या के मामले में बरी किए जाने के बावजूद राम रहीम फिलहाल जेल में ही रहेंगे। इसका कारण यह है कि वे एक अन्य आपराधिक मामले में सजा काट रहे हैं। वर्ष 2017 में उन्हें बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराया गया था और उसी मामले में वे वर्तमान में कारावास की सजा भुगत रहे हैं।

राम रहीम को 2017 में बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से ही वे लगातार सुर्खियों में रहे हैं। उस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद कई बार उन्हें पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आने की अनुमति भी मिली थी। इन रिहाइयों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी विवाद और बहस भी हुई थी।

पैरोल और फरलो के दौरान राम रहीम अक्सर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित अपने आश्रम में रहे। यह आश्रम डेरा सच्चा सौदा संगठन से जुड़ा है,जिसका मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में स्थित है। इस संगठन के उत्तर भारत के कई राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी हरियाणा,पंजाब,राजस्थान और आसपास के कई अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौजूद हैं। संगठन का सामाजिक और धार्मिक प्रभाव इन क्षेत्रों में लंबे समय से रहा है और इसी कारण डेरा प्रमुख से जुड़े कई मामलों ने व्यापक सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया है।

हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर राम रहीम को हत्या के मामले में राहत मिली है,वहीं दूसरी ओर अन्य आरोपियों के खिलाफ सजा बरकरार रहने से यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में उच्च अदालतों द्वारा साक्ष्यों की पुनः समीक्षा न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि दोषसिद्धि केवल मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रहे।

कुल मिलाकर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में हाईकोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़ माना जा रहा है। हालाँकि,इस निर्णय के बावजूद गुरमीत राम रहीम सिंह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएँगे,क्योंकि वे बलात्कार के मामले में दी गई सजा काट रहे हैं। वहीं इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत द्वारा दी गई सजा अभी भी प्रभावी बनी हुई है।