मुंबई,11 अप्रैल (युआईटीवी)- फिल्मी दुनिया के चर्चित अभिनेता रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘धुरंधर : द रिवेंज’ के साथ-साथ एक विवाद को लेकर भी चर्चा में हैं। यह विवाद उनकी उस कथित टिप्पणी और अभिनय की नकल से जुड़ा है,जो उन्होंने फिल्म ‘कांतारा’ के एक दृश्य से प्रेरित होकर किया था। इस मामले में अब उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय को बताया है कि वह अपने माफीनामे के शब्दों में बदलाव करने के लिए तैयार हैं,ताकि शिकायतकर्ता की आपत्ति दूर की जा सके।
शुक्रवार को अदालत में सुनवाई के दौरान रणवीर सिंह की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि अभिनेता इस मामले में किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करना चाहते हैं और यदि शिकायतकर्ता को उनके पहले दिए गए माफीनामे से संतोष नहीं है,तो वे उसमें संशोधन करने के लिए तैयार हैं। दरअसल,शिकायतकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया था कि अभिनेता द्वारा दिया गया माफीनामा वास्तविक पश्चाताप को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाता और उसमें प्रयुक्त शब्द पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं।
यह पूरा विवाद उस घटना से जुड़ा है,जो पिछले साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के 56वें संस्करण के दौरान सामने आई थी। यह कार्यक्रम गोवा में आयोजित किया गया था,जहाँ कई नामी अभिनेता और फिल्मकार शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम के दौरान रणवीर सिंह ने कथित तौर पर फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ में अभिनेता-निर्देशक ऋषभ शेट्टी द्वारा निभाए गए एक किरदार की नकल की थी।
आरोप है कि उस प्रस्तुति के दौरान उन्होंने एक देवी से जुड़े किरदार का जिक्र करते हुए उसे ‘महिला भूत’ कह दिया था,जिससे कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। कार्यक्रम के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और अभिनेता को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने इसे धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था के प्रति असम्मानजनक बताया।
विवाद बढ़ने के बाद रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए माफी भी माँगी थी और कहा था कि उनका किसी की भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने अपने संदेश में खेद जताते हुए कहा था कि यदि उनकी किसी बात से किसी समुदाय या व्यक्ति को ठेस पहुँची है,तो वह उसके लिए दिल से माफी माँगते हैं। हालाँकि,शिकायतकर्ता का कहना था कि यह माफी पर्याप्त नहीं है और उसमें स्पष्ट रूप से पश्चाताप व्यक्त नहीं किया गया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान रणवीर सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवैया ने न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना को बताया कि अभिनेता पहले ही एक हलफनामा दाखिल कर चुके हैं,जिसमें उन्होंने अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है। वकील ने यह भी कहा कि रणवीर सिंह ने यह भरोसा दिया है कि वह संबंधित मंदिर में जाकर प्रार्थना करेंगे और स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे।
दूसरी ओर,शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि हलफनामे में प्रयुक्त भाषा पर्याप्त स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार,माफी में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि अभिनेता को अपनी गलती का एहसास है और वह भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से बचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि अभिनेता को अधिक स्पष्ट और विशिष्ट शब्दों में माफी देने के लिए निर्देश दिया जाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को फिलहाल स्थगित कर दिया है। न्यायालय ने रणवीर सिंह को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप एक संशोधित हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की है।
इस बीच,रणवीर सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए भी अदालत का रुख किया है। अभिनेता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था और यह पूरा मामला एक गलतफहमी के कारण बढ़ गया है।
इससे पहले अदालत ने रणवीर सिंह के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी थी। हालाँकि,न्यायालय ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि एक सार्वजनिक हस्ती होने के नाते उनके शब्दों और कार्यों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर बोलते समय उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक अभिनेता के बयान तक सीमित नहीं है,बल्कि यह इस बात को भी दर्शाता है कि आज के दौर में सार्वजनिक मंचों पर कही गई छोटी-सी बात भी किस तरह बड़े विवाद का रूप ले सकती है। सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण ऐसे मामलों में प्रतिक्रिया बहुत तेजी से फैलती है और कई बार विवाद कानूनी प्रक्रिया तक पहुँच जाता है।
रणवीर सिंह भारतीय फिल्म उद्योग के उन अभिनेताओं में से एक हैं,जो अपनी ऊर्जा और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई सफल फिल्मों में अभिनय किया है और अपनी अलग शैली के कारण युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं। हालाँकि,इस विवाद ने उनकी छवि को कुछ समय के लिए विवादों के घेरे में ला दिया है।
अब सबकी निगाहें 23 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं,जहाँ यह तय होगा कि संशोधित माफीनामा शिकायतकर्ता को संतोषजनक लगता है या नहीं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बन जाती है,तो संभव है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाए। फिलहाल यह विवाद फिल्मी दुनिया,सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
