मुंबई, 8 मार्च (युआईटीवी)- फिल्म निर्माता करण जौहर ने हाल ही में यह खुलासा किया कि,आज के डिजिटल युग में जहाँ हर कोई लैपटॉप और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है,वह अब भी अपने विचार,भावनाएँ और फिल्म की कहानी लिखने के लिए कागज और कलम का सहारा लेते हैं। यह बात उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर साझा की और बताया कि उन्हें टाइप करके लिखने में कुछ बनावटीपन महसूस होता है।
करण जौहर ने अपने पोस्ट में लिखा, “कागज और कलम बनाम लैपटॉप… जब मैं टाइप करता हूँ,तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कुछ बनावटी सा है। मुझे अपने विचार और भावनाओं को कागज पर लिखना अधिक पसंद है,ना कि डिजिटल तरीके से।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें प्रभात नोटबुक और फाइबर टिप पेन का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा लगता है और वह शब्दों को काटकर,उनके ऊपर नया लिखना पसंद करते हैं,बजाय इसके कि वह किसी शब्द को डिलीट करें। उनका मानना है कि लिखते वक्त कागज पर हाथ से लिखने की एक अलग भावना होती है,जो डिजिटल माध्यम से नहीं मिलती। करण ने आगे कहा कि, “मुझे पता है कि डिजिटल नोटबुक्स भी हैं,लेकिन वह न इधर की होती हैं,न उधर की। जब लिखना होता है,तो कागज पर ही लिखना अच्छा लगता है, बस लिखना ही होता है!”
उनका यह विचार डिजिटल दुनिया में एक अहम संदेश देता है,खासकर आजकल के युवाओं के लिए,जो अधिकतर अपने विचार स्मार्टफोन या कंप्यूटर पर टाइप करते हैं। करण का कहना है कि यह कागज-कलम से जुड़ी प्रक्रिया उन्हें अपनी सोच और रचनात्मकता को बेहतर तरीके से व्यक्त करने में मदद करती है। यह एक तरह से पुराने जमाने की सरलता और डिजिटल दुनिया की जटिलता के बीच के फर्क को दर्शाता है। उनके इस बयान से यह भी साबित होता है कि रचनात्मकता को महसूस करने और उसमें डूबने के लिए जरूरी नहीं है कि हम डिजिटल उपकरणों पर निर्भर हों। कभी-कभी पुराने तरीके अधिक प्रभावी होते हैं और यही करण जौहर के रचनात्मक कार्य के पीछे की भावना को समझाता है।
करण जौहर के बारे में बात करते हुए,उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘नादानियाँ’ का प्रमोशन भी किया,जो 7 मार्च को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। करण ने अपने प्रशंसकों से अपील की कि वे फिल्म देखें,महसूस करें और इसका पूरा आनंद लें। फिल्म का निर्देशन शौना गौतम ने किया है और इसे धर्माटिक एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। इस फिल्म में महिमा चौधरी,सुनील शेट्टी,दीया मिर्जा और जुगल हंसराज जैसे सीनियर कलाकार भी शामिल हैं।
‘नादानियाँ’ करण जौहर के लिए एक नई शुरुआत है,क्योंकि यह फिल्म इब्राहिम अली खान की पहली फिल्म है। इस फिल्म में सैफ अली खान के बेटे इब्राहिम अली खान अर्जुन मेहता का किरदार निभा रहे हैं,जबकि खुशी कपूर पिया जय सिंह की भूमिका में नजर आएँगी। पिया साउथ दिल्ली की एक लड़की है,जो अपनी सपनों की प्रेम कहानी बनाने की कोशिश करती है। वहीं,अर्जुन एक साधारण परिवार का लड़का है और डिबेट टीम का कप्तान बनने का सपना देखता है। फिल्म में पिया अर्जुन से अपने नकली बॉयफ्रेंड बनने के लिए कहती है और शुरू में यह सब एक नाटक होता है,लेकिन धीरे-धीरे यह कहानी उलझ जाती है और कई मोड़ों के साथ आगे बढ़ती है। यह फिल्म एक रोमांटिक कहानी को लेकर चलती है,जिसमें दोस्ती, प्रेम और जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं।
करण जौहर ने इस फिल्म के जरिए नए कलाकारों को भी फिल्म इंडस्ट्री में मौका दिया है,जो उनकी रचनात्मकता और साहस को दिखाता है। यह फिल्म युवा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है,जो आजकल की रोमांटिक और इमोशनल कहानियों को पसंद करते हैं। करण ने फिल्म के बारे में अपने प्रशंसकों से कहा कि वे इस फिल्म को देखे,महसूस करें और इसके हर एक पल का आनंद लें।
इससे पहले,करण जौहर ने एक पोस्ट शेयर किया था,जिसमें उन्होंने निर्माता गुनीत मोंगा कपूर की जमकर तारीफ की थी। गुनीत मोंगा की फिल्म ‘अनुजा’ को ऑस्कर में बेस्ट लाइव एक्शन शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। हालाँकि,फिल्म को पुरस्कार नहीं मिल सका,लेकिन करण ने गुनीत मोंगा की मेहनत और उनके काम को सराहा और उनके लिए मनीष मल्होत्रा द्वारा तैयार किए गए आउटफिट की भी प्रशंसा की। यह उनके उद्योग में एकजुटता और सकारात्मकता को बढ़ावा देने का एक उदाहरण था।
करण जौहर के ये विचार और उनकी फिल्में हमेशा से दर्शकों को प्रेरित करती आई हैं और उनके इस दृष्टिकोण ने यह साबित किया है कि रचनात्मकता में परंपरा और आधुनिकता दोनों का महत्व है।