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कर्नाटक जॉब कोटा बिल पर फोनपे के संस्थापक व सीईओ ने अपना रुख स्पष्ट किया

बेंगलुरु,22 जुलाई (युआईटीवी)- कर्नाटक के ड्राफ्ट जॉब रिजर्वेशन बिल के बारे में फोनपे के संस्थापक और सीईओ समीर निगम ने अपनी टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मकसद कभी भी राज्य या यहाँ के लोगों को अपमानित करने का नहीं था।

निगम ने एक बयान में कहा कि यदि किसी की भावनाओं को उनके द्वारा किए गए टिप्पणियों से ठेंस पहुँचा है,तो उसके लिए मुझे बहुत खेद है और मैं बिना किसी शर्त के माफ़ी माँगता हूँ।

आगे उन्होंने कहा कि उनके मन में कन्नड़ और अन्य सभी भारतीय भाषाओं के प्रति बहुत सम्मान है। फोनपे के संस्थापक और सीईओ समीर निगम ने कहा कि मेरा ऐसा मानना ​​है कि देश की भाषाई विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक समृद्ध राष्ट्रीय संपत्ति है और सभी भारतीयों को इस पर गर्व महसूस करना चाहिए। स्थानीय और सांस्कृतिक मानदंडों का सभी भारतीयों को दिल से सम्मान करना चाहिए तथा इसका जश्न मनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में फोनपे का जन्म हुआ था। सीईओ समीर निगम ने जोर देकर कहा कि हमने पूरे भारत में पिछले एक दशक में बेंगलुरु से इसका विस्तार किया है। हम पिछले एक दशक में 55 करोड़ से भी अधिक भारतीयों को सुरक्षित तथा कुशल डिजिटल भुगतान सेवा देने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की सरकार और स्थानीय कन्नड़ लोगों ने कंपनी को जो सहायक कारोबारी माहौल मुहैया करवाया है,उसके लिए हम उनके आभारी हैं।

फोनपे के संस्थापक और सीईओ ने कहा कि गूगल,माइक्रोसॉफ्ट,एप्पल,अमेजन इत्यादि जैसी ट्रिलियन डॉलर की कंपनियों से बेंगलुरु के भारतीय स्टार्टअप प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारतीय स्टार्टअप को ऐसा करने के लिए भारत में उपलब्ध सबसे बेहतरीन प्रतिभाओं को उनके दक्षता और उनके प्रौद्योगिकी कौशल के आधार पर रोजगार देने में सक्षम होना चाहिए।

सीईओ समीर निगम ने कहा कि बेंगलुरु और कर्नाटक के लिए वह लाखों नौकरियाें के सृजन में सहायता करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा ऐसा मानना है कि हम अधिक चर्चा और संवाद से ऐसे तरीकों की तलाश कर सकते हैं,जिससे हम अधिक स्थायी रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकें।

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