तिरुवनंतपुरम,20 मार्च (युआईटीवी)- केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुके हैं और राजनीतिक गतिविधियाँ अपने चरम पर पहुँच गई हैं। इस बार चुनावी मुकाबले को लेकर खास उत्सुकता इसलिए भी है क्योंकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। पार्टी ने इस चुनाव को ऐतिहासिक अवसर के रूप में लिया है और पहली बार 140 सदस्यीय विधानसभा में अपना खाता खोलने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है।
भाजपा के इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत उसका हाई-प्रोफाइल नेतृत्व है। पार्टी ने अपने शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारने का फैसला किया है,जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हैं। यह कदम साफ तौर पर इस बात का संकेत देता है कि भाजपा केरल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर कितनी गंभीर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक,वह दो त्वरित दौरों के जरिए राज्य के प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे और बड़ी रैलियों को संबोधित करेंगे। इन दौरों का उद्देश्य न केवल मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुँचाना है,बल्कि कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना भी है,ताकि चुनावी मशीनरी पूरी ताकत से काम कर सके।
भाजपा की चुनावी रणनीति विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित है,जो राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें कासरगोड,पलक्कड़,तिरुवनंतपुरम,कोल्लम और त्रिशूर जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में पार्टी उच्च दृश्यता वाले अभियानों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हाल के चुनावी प्रदर्शन ने भाजपा के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। खासकर सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर 70,000 से अधिक वोटों से मिली जीत को पार्टी एक बड़े संकेत के रूप में देख रही है। यह जीत इस बात का प्रमाण मानी जा रही है कि भाजपा धीरे-धीरे राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
इसके अलावा,दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा द्वारा तिरुवनंतपुरम निगम पर नियंत्रण हासिल करना भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह पहली बार था जब पार्टी ने राज्य के इस प्रमुख शहरी निकाय में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई,जो पारंपरिक रूप से वामपंथी और कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं।
हालाँकि,आँकड़ों की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 15.64 प्रतिशत रहा था,जो 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में थोड़ा घटकर 14.71 प्रतिशत हो गया। इसके बावजूद पार्टी इसे निराशाजनक नहीं मानती और 2021 के विधानसभा चुनावों में नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर आने को अपनी बढ़ती ताकत का संकेत मानती है।
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी विश्वास जताया है कि पार्टी इस बार न केवल अपना खाता खोलेगी,बल्कि कई सीटों पर जीत दर्ज करने में भी सफल होगी। उनका कहना है कि भाजपा का लगातार बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक मजबूती इस चुनाव में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।
फिर भी भाजपा के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। केरल की सामाजिक और जनसांख्यिकीय संरचना काफी जटिल मानी जाती है,जहाँ मुस्लिम और ईसाई समुदाय मिलकर करीब 42 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन समुदायों के बीच समर्थन हासिल करना किसी भी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है।
भाजपा के रणनीतिकार इस बात को समझते हैं और इसी कारण वे समुदाय के नेताओं के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। पार्टी का मानना है कि संवाद और विश्वास निर्माण के जरिए वह इन वर्गों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,केरल में भाजपा के लिए यह चुनाव केवल सीटें जीतने का मामला नहीं है,बल्कि यह राज्य में अपनी दीर्घकालिक राजनीतिक मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। पार्टी धीरे-धीरे अपने वोट बैंक का विस्तार कर रही है और इसे स्थायी समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है।
जैसे-जैसे चुनावी अभियान तेज हो रहा है,भाजपा का यह उच्च-ऊर्जा अभियान यह संकेत देता है कि पार्टी अब केरल में सीमित उपस्थिति से आगे बढ़कर एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनने की दिशा में काम कर रही है। यह चुनाव यह तय करेगा कि भाजपा अपने हालिया लाभ को कितनी प्रभावी ढंग से वोटों और सीटों में बदल पाती है।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 भाजपा के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने जा रहा है। पार्टी जहाँ एक ओर ऐतिहासिक सफलता की उम्मीद कर रही है,वहीं उसे राज्य की जटिल सामाजिक संरचना और मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना भी करना होगा। आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है और यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने अभियान को किस हद तक सफल बना पाती है।
