मॉस्को,5 अगस्त (युआईटीवी)- रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। मंगलवार को यहाँ के विश्व प्रसिद्ध और यूरेशिया महाद्वीप के सबसे ऊँचे सक्रिय ज्वालामुखी क्ल्युचेव्स्कॉय से जबरदस्त राख का गुबार निकलते देखा गया,जिसने वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों और रूसी विज्ञान अकादमी ने पुष्टि की है कि यह राख समुद्र तल से करीब 7 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँच गई और धीरे-धीरे दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रशांत महासागर की ओर बढ़ने लगी।
कामचटका क्षेत्र की आपातकालीन स्थिति मंत्रालय की स्थानीय शाखा ने अपने टेलीग्राम चैनल पर यह जानकारी साझा की कि राख के इस विशाल बादल की दिशा में कोई आबादी वाला क्षेत्र फिलहाल मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक कहीं भी राख गिरने की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है,जिससे स्थानीय निवासियों को कोई सीधा खतरा नहीं है। राहत की बात यह भी रही कि इस समय ज्वालामुखी के आसपास कोई भी पर्यटकों का समूह मौजूद नहीं था,जिससे जानमाल की हानि की आशंका भी नहीं रही।
हालाँकि,ज्वालामुखीय गतिविधियों के विशेषज्ञों ने इस घटना को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ज्वालामुखी को फिलहाल नारंगी विमानन चेतावनी स्तर पर रखा गया है,जिसका अर्थ है कि यह राख विमानों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। इस स्तर पर उड़ानों को प्रभावित करने वाली ज्वालामुखीय गतिविधियों की प्रबल संभावना बनी रहती है। इसके चलते क्षेत्रीय हवाई यातायात पर बारीकी से निगरानी रखी जा रही है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार,सोमवार को ही इस ज्वालामुखी में हलचल तेज हो गई थी। रूस की विज्ञान अकादमी की जिओफिजिकल सर्विस की कामचटका शाखा ने बताया कि उन्होंने क्ल्युचेव्स्कॉय ज्वालामुखी से चार अलग-अलग राख के गुबार रिकॉर्ड किए,जिनमें से सबसे ऊँचा गुबार समुद्र तल से 9 किलोमीटर ऊपर तक पहुँचा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी तीव्र गतिविधि इस क्षेत्र में बहुत कम देखने को मिलती है।
अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि इस क्षेत्र के कई अन्य सक्रिय ज्वालामुखियों से भी 6 से 10 किलोमीटर तक राख का उत्सर्जन हो सकता है,जिससे पर्यावरण और परिवहन प्रणाली दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे ज्वालामुखियों के 10 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश न करें,ताकि किसी भी आकस्मिक घटना से बचा जा सके।
उल्लेखनीय है कि क्ल्युचेव्स्कॉय ज्वालामुखी रूस के कामचटका प्रायद्वीप के उस्त-कामचत्स्की जिले में स्थित है और इसकी ऊँचाई 4,754 मीटर है। यह न केवल रूस बल्कि पूरे यूरेशिया का सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। इसकी सक्रियता लंबे समय से वैज्ञानिकों की निगरानी में रही है,लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसे और गंभीर बना दिया है।
ज्वालामुखी की यह अप्रत्याशित गतिविधि उस भयंकर भूकंप के बाद शुरू हुई है,जो 30 जुलाई को कामचटका क्षेत्र में दर्ज किया गया था। यह भूकंप 8.8 तीव्रता का था,जो 1952 के बाद सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। इस भूकंप के झटके उत्तर में स्थित कुरील द्वीप समूह तक महसूस किए गए,जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई और सेवेरो-कुरीलस्क जिले में आपातकाल घोषित कर दिया गया।
इस घटनाक्रम को लेकर रूसी विज्ञान अकादमी की सुदूर पूर्वी शाखा के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान के निदेशक एलेक्सी ओजेरोव ने रूसी समाचार एजेंसी टास (टीएएसएस )से बातचीत में बताया कि कामचटका में इतनी गंभीर ज्वालामुखीय गतिविधि आखिरी बार 1737 में देखी गई थी,जब इस क्षेत्र में 9 तीव्रता का भूकंप आया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान आँकड़ों के अनुसार,ज्वालामुखी और भूकंप के बीच परस्पर संबंध को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
एलेक्सी ओजेरोव का मानना है कि इस बार का भूकंप,जो बेहद शक्तिशाली था, ज्वालामुखी के अंदर दबी ऊर्जा को मुक्त करने का कारण बन सकता है,जिससे इतनी तेज राख का उत्सर्जन हुआ है। वैज्ञानिक अब इस पूरे क्षेत्र में गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और डेटा इकट्ठा कर रहे हैं,ताकि यह समझा जा सके कि भविष्य में और क्या खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
इस बीच,रूस सरकार और स्थानीय प्रशासन आपदा प्रबंधन के सभी संसाधनों को तैयार रखे हुए हैं। हवाई यातायात नियंत्रकों को विशेष अलर्ट पर रखा गया है,जबकि मौसम और वायुमंडलीय निगरानी एजेंसियाँ राख के बादलों की दिशा और ऊँचाई पर नज़र बनाए हुए हैं।
कामचटका,जो अपने बर्फीले ज्वालामुखियों,गर्म पानी के झरनों और वन्य जीवन के लिए जाना जाता है,एक बार फिर से प्रकृति की क्रूर ताकत का गवाह बन रहा है। हालाँकि,फिलहाल जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है,लेकिन इस प्रकार की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि मानव तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए,प्राकृतिक शक्तियों के सामने अभी भी बहुत कुछ सीखा और समझा जाना बाकी है।