13 अगस्त को रिलीज होगी ‘लाहौर 1947’ (तस्वीर क्रेडिट@rohitjswl01)

13 अगस्त को रिलीज होगी ‘लाहौर 1947’: सनी देओल,राजकुमार संतोषी और आमिर खान की तिकड़ी पहली बार साथ,विभाजन की पीड़ा को दिखाएगी फिल्म

मुंबई,10 फरवरी (युआईटीवी)- सनी देओल इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की जबरदस्त सफलता का आनंद ले रहे हैं। इसी बीच उनके प्रशंसकों के लिए एक और बड़ी खबर सामने आई है। मेकर्स ने सनी देओल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘लाहौर 1947’ की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 13 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। खास बात यह है कि इस फिल्म के जरिए पहली बार सनी देओल,निर्देशक राजकुमार संतोषी और सुपरस्टार आमिर खान एक साथ काम करने जा रहे हैं। आमिर खान इस फिल्म को अपने बैनर आमिर खान प्रोडक्शंस के तहत प्रोड्यूस कर रहे हैं,जिससे इसे लेकर दर्शकों की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

‘लाहौर 1947’ भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक गंभीर और भावनात्मक पीरियड ड्रामा है। साल 1947 का बँटवारा भारतीय इतिहास का सबसे दर्दनाक और संवेदनशील अध्याय माना जाता है,जिसने लाखों लोगों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। इस फिल्म में उसी दौर की पीड़ा,टूटते रिश्तों और इंसानी संवेदनाओं को खास अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश की गई है। मेकर्स का दावा है कि यह फिल्म सिर्फ इतिहास को दोहराने तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि उस समय के आम लोगों के दर्द,डर और संघर्ष को गहराई से दिखाएगी।

आमिर खान ने फिल्म को लेकर एक भावुक बयान भी दिया है। उन्होंने बताया कि ‘लाहौर 1947’ की स्क्रिप्ट दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की सबसे पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी। आमिर खान ने कहा, “यह धरम जी की बेहद पसंदीदा कहानियों में से एक थी। मुझे बेहद खुशी है कि यह फिल्म अब उसी आत्मा और संवेदनशीलता के साथ बनकर तैयार हो रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि जब यह फिल्म रिलीज होगी तो दर्शकों का इसे भरपूर प्यार मिलेगा।” आमिर खान का यह बयान फिल्म को एक भावनात्मक विरासत से भी जोड़ देता है,जो दर्शकों के लिए इसे और खास बनाता है।

फिल्म की कहानी मशहूर लेखक और नाटककार असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या,ओ जम्याई नई’ से प्रेरित है। यह नाटक विभाजन की बड़ी राजनीतिक घटनाओं के बजाय उन इंसानी रिश्तों पर फोकस करता है,जो सांप्रदायिक हिंसा,डर और जबरन विस्थापन की वजह से टूट गए थे। यही संवेदनशील दृष्टिकोण ‘लाहौर 1947’ की कहानी की आत्मा है,जो इसे पारंपरिक देशभक्ति या युद्ध आधारित फिल्मों से अलग बनाता है।

कहानी एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है,जिसे विभाजन के बाद लाहौर छोड़कर भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस परिवार को लाहौर में एक मुस्लिम परिवार द्वारा छोड़ी गई एक बड़ी हवेली मिलती है,लेकिन वहाँ एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला अब भी रह रही होती है। इसी हवेली के भीतर और आसपास की घटनाओं के जरिए फिल्म पहचान,इंसानियत,नैतिक जिम्मेदारी और साझा दर्द जैसे गहरे सवाल उठाती है। विभाजन के उथल-पुथल भरे माहौल में यह कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि मजहब और सरहदों से ऊपर इंसानी रिश्तों की अहमियत क्या होती है।

‘लाहौर 1947’ उन फिल्मों में से है,जो दिखावटी देशभक्ति या नारेबाजी से दूर रहकर विभाजन के स्थायी जख्मों पर फोकस करती है। यह फिल्म सहानुभूति,करुणा और उस दर्द को सामने लाने की कोशिश करती है,जिसे दोनों देशों के आम लोगों ने झेला था। यही वजह है कि इसे एक भावुक और गंभीर सिनेमा अनुभव माना जा रहा है,जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगा।

फिल्म की स्टारकास्ट भी इसे और मजबूत बनाती है। सनी देओल इसमें मुख्य भूमिका में नजर आएँगे,जबकि शबाना आजमी, प्रीति जिंटा और करण देओल भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगे। शबाना आजमी जैसी सशक्त अभिनेत्री का इस कहानी का हिस्सा होना फिल्म की गंभीरता को और बढ़ाता है। वहीं प्रीति जिंटा और करण देओल की मौजूदगी इसे नई पीढ़ी के दर्शकों से भी जोड़ती है।

संगीत के मोर्चे पर भी ‘लाहौर 1947’ बेहद खास मानी जा रही है। फिल्म का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है और गीतों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। रहमान और जावेद अख्तर की जोड़ी पहले भी कई यादगार गीत दे चुकी है,ऐसे में इस फिल्म के संगीत से भी दर्शकों को गहरी भावनात्मक अनुभूति की उम्मीद है।

‘लाहौर 1947’ सिर्फ एक फिल्म नहीं,बल्कि इतिहास के एक दर्दनाक सच को संवेदनशीलता के साथ याद करने की कोशिश है। 13 अगस्त को रिलीज होने जा रही यह फिल्म स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सिनेमाघरों में आकर दर्शकों को देश के अतीत से रूबरू कराएगी और शायद उन्हें इंसानियत की अहमियत भी नए सिरे से समझाएगी।