नई दिल्ली,20 दिसंबर (युआईटीवी)- शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया, जहाँ लोकसभा में पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। इस शोर-शराबे के बीच,लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसदीय कार्यवाही की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई। स्पीकर ओम बिरला ने संसद गेट पर प्रदर्शन करने को अनुचित बताया है। इस दौरान,अंबेडकर के कथित अपमान को लेकर हंगामा मच गया। इस विवाद के बाद स्पीकर ने कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
स्पीकर ने इससे पहले सांसदों से संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि,”संसद की गरिमा को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सभी को इसे मिलकर निभाना होगा। संसद परिसर में किसी भी प्रकार का धरना या प्रदर्शन करना उचित नहीं है। मैं आप सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप इसे गंभीरता से लें और किसी भी हालत में संसद परिसर में प्रदर्शन न करें। यदि आप ऐसा करते है,तो आपके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
इसके बाद,संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, “यह संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है और इस स्थिति में सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। एनडीए सांसद राहुल गांधी के आचरण को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। उन्होंने नागालैंड के सांसद का अपमान किया और इसके बाद दो सांसदों को घायल कर दिया।” रिजिजू ने इस पर जोर देते हुए कहा कि संसद परिसर में किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए और हम इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकते।
इस दौरान,संसद परिसर में प्रदर्शन कर रही प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, “यह एक डरी हुई सरकार है, जो किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने से डरती है। सरकार को अब यह डर है कि अंबेडकर जी के बारे में उनकी सच्चाई सामने आ चुकी है और इसलिए यह लोग विपक्ष से डर रहे हैं। हमारा संविधान अंबेडकर जी और इस देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने दिया है। अगर कोई हमारे संविधान निर्माता का अपमान करेगा, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी पर दर्ज की गई एफआईआर को लेकर भी टिप्पणी की और इसे सरकार की हताशा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि, “सरकार राहुल गांधी पर झूठी एफआईआर दर्ज करा रही है,जो उनकी हताशा को दिखाता है। राहुल गांधी कभी किसी को धक्का नहीं दे सकते और देश भी इस बात को अच्छी तरह से जानता है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के शीतकालीन सत्र का समापन एक विवादास्पद माहौल में किया। पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच यह तकरार संसद की गरिमा को प्रभावित करने वाली स्थिति बन गई। यह भी साफ हो गया कि विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव अब और बढ़ चुका है,खासकर अंबेडकर के अपमान के मामले में।
कुल मिलाकर,इस शीतकालीन सत्र का समापन एक ऐसे समय हुआ,जब संसद में भारी विरोध प्रदर्शन और हंगामा हुआ। लोकसभा की कार्यवाही का अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाना यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में मुद्दों पर संवाद के बजाय विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। यह सत्र ऐसे माहौल में समाप्त हुआ,जहाँ कोई भी पक्ष किसी भी कीमत पर अपनी बात को दबाना नहीं चाहता था और इसका खामियाजा अंत में संसद की कार्यवाही पर पड़ा।
