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एलआईसी को आयकर विभाग का 7,000 करोड़ से अधिक का नोटिस,कंपनी ने कहा—कानूनी चुनौती देंगे

नई दिल्ली,26 मार्च (युआईटीवी)- देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम को आयकर विभाग से बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने बुधवार को जानकारी दी कि उसे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आयकर विभाग की ओर से भारी भरकम डिमांड नोटिस प्राप्त हुआ है। इस नोटिस में कर के रूप में 6,146.71 करोड़ रुपये और अतिरिक्त ब्याज के रूप में 953.25 करोड़ रुपये की माँग की गई है। कुल मिलाकर यह राशि 7,000 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है,जिसने बाजार और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

एलआईसी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि यह डिमांड नोटिस आयकर विभाग की मूल्यांकन इकाई द्वारा किए गए आकलन के बाद जारी किया गया है। कंपनी के अनुसार,इस मूल्यांकन के दौरान कई प्रकार के समायोजन किए गए,जिनकी वजह से यह अतिरिक्त कर देनदारी सामने आई है। हालाँकि,एलआईसी ने साफ कर दिया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

कंपनी ने कहा है कि वह उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील दायर करेगी और इस मामले को आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष ले जाएगी। एलआईसी का मानना है कि टैक्स अधिकारियों द्वारा किए गए कुछ समायोजन तकनीकी और व्याख्यात्मक मुद्दों से जुड़े हैं,जिन पर अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

आयकर विभाग द्वारा जिन प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है,उनमें अंतरिम बोनस को आय के रूप में मानना शामिल है। इसके अलावा जीवन सुरक्षा कोष से हुए नुकसान को आय में जोड़ना और नेगेटिव रिजर्व को भी आय के रूप में शामिल करना जैसे कदम उठाए गए हैं। इन समायोजनों के चलते कंपनी की कर योग्य आय बढ़ गई,जिससे इतनी बड़ी टैक्स डिमांड उत्पन्न हुई।

इसके साथ ही आयकर विभाग ने एलआईसी द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80एम के तहत दावा की गई कुछ कटौतियों को भी अस्वीकार कर दिया है। यही नहीं,टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यानी टीडीएस को जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज खर्चों को भी स्वीकार नहीं किया गया है। इन सभी कारकों ने मिलकर कंपनी की कुल कर देनदारी को काफी बढ़ा दिया है।

हालाँकि,एलआईसी ने अपने निवेशकों और पॉलिसीधारकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का उसके रोजमर्रा के कारोबार या परिचालन पर कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल वित्तीय दायित्व तक सीमित है और इससे उसकी व्यवसायिक गतिविधियाँ प्रभावित नहीं होंगी। एलआईसी ने यह भी कहा कि उसके पास मजबूत वित्तीय आधार और पर्याप्त संसाधन हैं,जिससे वह इस तरह की परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

इस खुलासे को कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के नियमों के तहत किया है। सेबी के सूचीबद्धता दायित्व और प्रकटीकरण आवश्यकताएं (एलओडीआर) विनियम, 2015 के विनियम 30 के अनुसार,किसी भी सूचीबद्ध कंपनी को अपने निवेशकों और बाजार को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। एलआईसी ने इसी प्रावधान का पालन करते हुए यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी है और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई है।

दिलचस्प बात यह रही कि इतने बड़े टैक्स नोटिस के बावजूद शेयर बाजार में एलआईसी के शेयरों पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ा। बुधवार के कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयरों में मजबूती देखी गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एलआईसी का शेयर 20.90 रुपये यानी 2.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 779.60 रुपये पर बंद हुआ। यह संकेत देता है कि निवेशकों ने इस खबर को लेकर घबराहट नहीं दिखाई और कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन पर भरोसा बनाए रखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कॉरपोरेट्स के लिए इस तरह के टैक्स विवाद असामान्य नहीं हैं। अक्सर कर कानूनों की व्याख्या और उनके अनुप्रयोग को लेकर कंपनियों और कर अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होता है, जिसमें कई बार कंपनियों को राहत भी मिलती है।

एलआईसी के मामले में भी यही उम्मीद जताई जा रही है कि अपील प्रक्रिया के दौरान कंपनी अपने पक्ष को मजबूती से रखेगी और मामले का समाधान निकलेगा। फिलहाल, कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

एलआईसी को मिला यह टैक्स नोटिस निश्चित रूप से एक बड़ा वित्तीय मामला है,लेकिन कंपनी की प्रतिक्रिया और बाजार के रुख से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल इसे एक सामान्य कर विवाद के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में अपील प्रक्रिया और न्यायिक फैसलों पर इस मामले की दिशा निर्भर करेगी,जो यह तय करेगा कि कंपनी को कितनी राहत मिलती है या उसे कितनी राशि का भुगतान करना होगा।