फ्लोरिडा,2 अप्रैल (युआईटीवी)- अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए नासा ने अपने बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है,बल्कि मानव अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है। करीब 50 से अधिक वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार मानवयुक्त अंतरिक्ष यान चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए रवाना हुआ है।
यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से बुधवार शाम 6:35 बजे (ईस्टर्न टाइम) किया गया। स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट,जिसके शीर्ष पर ओरियन अंतरिक्ष यान स्थापित था,ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी और चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ गया। लॉन्च से पहले काउंटडाउन के दौरान टी-10 मिनट पर कुछ समय के लिए प्रक्रिया को रोका गया था,लेकिन सभी तकनीकी जाँच पूरी होने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
इस मिशन में चार सदस्यीय दल शामिल है,जिसमें रीड वाइसमैन,विक्टर ग्लोवर,क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह दल अपने आप में ऐतिहासिक है,क्योंकि इसमें पहली महिला,पहला अफ्रीकी-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा की यात्रा करने वाला पहला कनाडाई शामिल है। यह विविधता अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में समावेशिता और वैश्विक सहयोग का प्रतीक भी है।
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक तकनीकी और संचालन संबंधी क्षमताओं का परीक्षण करना है। नासा के अनुसार,इस मिशन के तहत ओरियन अंतरिक्ष यान की जीवन-समर्थन प्रणालियों की जाँच की जाएगी,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह लंबी अवधि के मिशनों के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा,अंतरिक्ष यात्रियों को विभिन्न महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का अभ्यास करने का अवसर मिलेगा,जो भविष्य के मिशनों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से लगभग 7,400 किलोमीटर आगे तक यात्रा करेंगे और फिर पृथ्वी की ओर लौटेंगे। यह दूरी उन्हें पृथ्वी से पहले की तुलना में कहीं अधिक दूर ले जाएगी,जबकि वे चंद्रमा के बेहद करीब पहुँचेंगे। पिछले आधे शताब्दी में ऐसा मिशन नहीं देखा गया है,जिससे इसकी ऐतिहासिकता और भी बढ़ जाती है।
मिशन का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण पुनः प्रवेश यानी री-एंट्री होगा। जब ओरियन अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा,तब इसकी गति लगभग 25,000 मील प्रति घंटे होगी और इसे लगभग 5,000 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ेगा। यह प्रक्रिया अत्यंत जोखिम भरी होती है,लेकिन इसके सफल होने पर अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतर जाएगा।
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगे,विभिन्न आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे और चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से की तस्वीरें भी लेंगे। ये सभी डेटा भविष्य के मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे,खासकर आर्टेमिस III मिशन के लिए,जिसके तहत मानव को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है।
आर्टेमिस कार्यक्रम को नासा की दीर्घकालिक अंतरिक्ष रणनीति का हिस्सा माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके माध्यम से मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की तैयारी भी की जा रही है। नासा चंद्रमा पर एक स्थायी आधार स्थापित करना चाहता है,जिसे लूनर बेस कहा जाता है,ताकि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
यह कार्यक्रम अपोलो मिशन की विरासत को आगे बढ़ाता है,जिसके तहत 1968 से 1972 के बीच 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा गया था। इनमें से 12 अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था। अब आर्टेमिस कार्यक्रम उसी गौरवशाली इतिहास को आधुनिक तकनीक और नई दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।
नासा की योजना है कि इस दशक के अंत तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन भेजे जाएँ, जहाँ पानी के बर्फ के रूप में मौजूद होने की संभावना है। यह संसाधन भविष्य के मानव मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है,क्योंकि इससे ईंधन और जीवन-समर्थन प्रणालियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
आर्टेमिस II मिशन की सफलता अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है,बल्कि यह मानवता की उस जिज्ञासा और साहस का भी प्रमाण है,जो उसे नई सीमाओं को पार करने के लिए प्रेरित करता है। आने वाले वर्षों में यह मिशन अंतरिक्ष अनुसंधान के नए आयाम खोल सकता है और मानव को एक बार फिर चंद्रमा और उससे आगे की यात्रा के लिए तैयार कर सकता है।
