ओटावा,24 फरवरी (युआईटीवी)- कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी से 7 मार्च तक भारत,ऑस्ट्रेलिया और जापान की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना होंगे। उनके कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि इस बहु-देशीय दौरे का उद्देश्य तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच व्यापार,ऊर्जा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई),उन्नत तकनीक और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश करना है। कार्नी की यह पहली भारत यात्रा होगी,जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
कार्नी अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से करेंगे,जहाँ वे प्रमुख उद्योगपतियों और व्यावसायिक नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार,ऊर्जा सहयोग,तकनीकी नवाचार,एआई,प्रतिभा आदान-प्रदान,सांस्कृतिक संबंध और रक्षा साझेदारी जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार,इस यात्रा का मकसद केवल मौजूदा संबंधों को आगे बढ़ाना ही नहीं,बल्कि नई रणनीतिक साझेदारियों की नींव रखना भी है।
भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं,लेकिन दोनों देश आर्थिक सहयोग के महत्व को समझते हुए संवाद की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में कार्नी के आमंत्रण पर शामिल हुए थे। उस मुलाकात के बाद दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को नई गति देने का संकेत दिया था। अब कार्नी की भारत यात्रा को उसी प्रक्रिया की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
आँकड़ों के अनुसार,वर्ष 2024 में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल दोतरफा व्यापार लगभग 30.8 से 31 अरब डॉलर के आसपास रहा। 2025 में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी। इस समझौते का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक पहुँचाना है। कार्नी की यात्रा के दौरान इस समझौते को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों के दौर में कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार घरेलू मजबूती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार और बड़े विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। भारत जैसे उभरते आर्थिक महाशक्ति के साथ गहरे आर्थिक संबंध इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
भारत यात्रा के बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया जाएँगे,जहाँ वे सिडनी और कैनबरा में आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। कैनबरा में उनकी मुलाकात ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ से होगी। दोनों नेता रक्षा सहयोग,समुद्री सुरक्षा,महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति,व्यापार विस्तार और एआई जैसी उन्नत तकनीकों पर साझेदारी बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह बैठक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी अहम मानी जा रही है। कार्नी ऑस्ट्रेलियाई संसद के दोनों सदनों को संबोधित भी करेंगे,जो करीब 20 वर्षों में किसी कनाडाई प्रधानमंत्री का पहला संबोधन होगा। इसे दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे विश्वास और साझा मूल्यों का प्रतीक माना जा रहा है।
अपने एशिया दौरे के अंतिम चरण में कार्नी जापान की राजधानी टोक्यो पहुँचेंगे,जहाँ वे जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में स्वच्छ ऊर्जा,उन्नत विनिर्माण,महत्वपूर्ण खनिज,खाद्य सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। जापान और कनाडा दोनों ही हरित ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं,ऐसे में यह मुलाकात दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी।
कार्नी ने अपने बयान में कहा कि कनाडा के पास ऊर्जा संसाधनों,महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रतिभाशाली मानव संसाधन की प्रचुरता है,जिसकी वैश्विक स्तर पर माँग है। उन्होंने कहा कि नए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाकर कनाडा अपनी आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करना चाहता है। उनका यह एशिया दौरा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है,जिसमें विविधीकृत व्यापारिक संबंध और विश्वसनीय साझेदारों के साथ दीर्घकालिक सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कनाडा की सक्रिय भूमिका का भी संकेत है। भारत,ऑस्ट्रेलिया और जापान तीनों ही क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली लोकतांत्रिक शक्तियाँ हैं। ऐसे में कार्नी की यह यात्रा बहुपक्षीय सहयोग,सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं और उन्नत तकनीकी साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यह एशिया यात्रा कनाडा की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति के लिए अहम मानी जा रही है। भारत के साथ व्यापार और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ रणनीतिक साझेदारी को गहराई देने की कोशिश इस दौरे की प्रमुख विशेषता होगी। आने वाले दिनों में इस यात्रा के ठोस परिणामों पर वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी रहेंगी।
