मुंबई,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए सभी विनियमित संस्थाओं को सोशल मीडिया पर प्रतिभूति बाजार से संबंधित कोई भी सामग्री पोस्ट करते समय अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का आदेश दिया है। यह नया नियम 1 मई से प्रभावी होगा और इसका उद्देश्य निवेशकों को प्रामाणिक और अप्रमाणिक स्रोतों के बीच स्पष्ट अंतर समझने में सहायता प्रदान करना है।
सेबी के इस निर्देश का दायरा व्यापक है। यह स्टॉक ब्रोकरों,पोर्टफोलियो प्रबंधकों,म्यूचुअल फंडों,निवेश सलाहकारों,शोध विश्लेषकों,वितरकों और अन्य मध्यस्थों सहित सभी पंजीकृत संस्थाओं तथा उनके एजेंटों पर लागू होगा। नियामक के अनुसार,प्रतिभूति बाजार से संबंधित किसी भी प्रकार की सामग्री—चाहे वह वीडियो हो,लिखित पोस्ट हो,विश्लेषणात्मक टिप्पणी हो या प्रचार सामग्री—इन सभी पर यह नियम अनिवार्य रूप से लागू रहेगा।
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान यूट्यूब,टेलीग्राम,इंस्टाग्राम,फेसबुक, व्हाट्सएप,एक्स,लिंक्डइन, रेडिट और थ्रेड्स सहित सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लागू होगा। सेबी ने कहा है कि डिजिटल माध्यमों के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि निवेशकों को यह स्पष्ट रूप से पता हो कि कौन सी जानकारी किसी पंजीकृत और विनियमित संस्था द्वारा दी जा रही है और कौन सी अपंजीकृत या अनियमित स्रोत से आ रही है।
नए नियम के तहत सभी विनियमित संस्थाओं और उनके अधिकृत एजेंटों को अपने सोशल मीडिया हैंडल के होम पेज पर अपना पंजीकृत नाम और सेबी द्वारा जारी पंजीकरण संख्या प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी। इतना ही नहीं,उन्हें शेयर बाजार या निवेश से संबंधित प्रत्येक वीडियो, पोस्ट या अन्य सामग्री की शुरुआत में भी इन विवरणों का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दर्शक या पाठक तुरंत यह पहचान सकें कि सामग्री किस कानूनी और नियामक ढाँचे के अंतर्गत जारी की गई है।
सेबी ने अपने सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित समन्वित शेयर हेरफेर और तथाकथित ‘पंप-एंड-डंप’ योजनाओं में शामिल कई संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की है। इन योजनाओं में आमतौर पर कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए किसी विशेष शेयर को बढ़ावा देते हैं,जिससे खुदरा निवेशक आकर्षित होते हैं और कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ जाती हैं। इसके बाद प्रमोटर उच्च स्तर पर अपने शेयर बेचकर बाहर निकल जाते हैं,जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या ने नियामक को सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निवेशकों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश संबंधी सलाह और सिफारिशों की बाढ़ के बीच आम निवेशकों के लिए यह समझ पाना कठिन हो जाता है कि कौन सी जानकारी विश्वसनीय है। पंजीकरण विवरण की अनिवार्यता से पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इससे अनियमित और भ्रामक प्रचार करने वाले तत्वों पर भी अंकुश लगेगा।
सेबी ने उन संस्थाओं के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं,जिनके पास एक से अधिक पंजीकरण हैं। ऐसे मामलों में संबंधित संस्था को अपने सोशल मीडिया होम पेज पर एक वेब लिंक प्रदान करना होगा,जो उपयोगकर्ताओं को एक ऐसे पेज पर ले जाएगा,जहाँ उसके सभी सेबी-पंजीकृत नामों और पंजीकरण संख्याओं की सूची उपलब्ध हो। साथ ही,प्रत्येक पोस्ट या वीडियो में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि सामग्री किस विशेष पंजीकरण के तहत प्रकाशित की जा रही है। इससे भ्रम की स्थिति कम होगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
डिजिटल युग में निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और सोशल मीडिया निवेश जागरूकता का एक प्रमुख माध्यम बन गया है। ऐसे में नियामक ढाँचे को समय के साथ अद्यतन करना आवश्यक है। सेबी का यह कदम न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगा,बल्कि निवेशकों के हितों की रक्षा करने के उसके व्यापक उद्देश्य को भी मजबूत करेगा। 1 मई से लागू होने वाले इस नियम के बाद उम्मीद की जा रही है कि सोशल मीडिया पर बाजार संबंधी सामग्री अधिक जिम्मेदार और स्पष्ट पहचान के साथ साझा की जाएगी,जिससे पूँजी बाजार में विश्वास और सुदृढ़ होगा।
