भारत-ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक एफटीए पर हुए हस्ताक्षर (तस्वीर क्रेडिट@mppchaudhary)

अप्रैल से लागू हो सकता है भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता,भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली,16 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस वर्ष अप्रैल से लागू होने की संभावना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,इस समझौते के लागू होते ही भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के बाजार में नए अवसरों के द्वार खुल जाएँगे। पिछले वर्ष जुलाई में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और अब इसके प्रभावी होने के लिए ब्रिटेन की संसद से अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।

ब्रिटेन की संसद के दोनों सदनों में इस मुक्त व्यापार समझौते पर बहस शुरू हो चुकी है। संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते के औपचारिक रूप से लागू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों ने इस समझौते को पारस्परिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया है,जिससे व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

इस एफटीए के तहत ब्रिटेन को होने वाले 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसका सीधा लाभ भारत के श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को मिलेगा। कपड़ा उद्योग,समुद्री उत्पाद,चमड़ा और जूते,खेल सामान और खिलौने, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी। इसके अलावा इंजीनियरिंग सामान,ऑटो पार्ट्स और इंजन तथा जैविक रसायन जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के लिए भी निर्यात के व्यापक अवसर खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में छूट से भारतीय उत्पादों की कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी,जिससे ब्रिटेन में उनकी माँग बढ़ सकती है।

भारत ने इस समझौते में गैर-शुल्क बाधाओं के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह में अनावश्यक प्रशासनिक या नियामक अड़चनें न आएँ। गैर-शुल्क बाधाओं का समाधान इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है,क्योंकि कई बार शुल्क कम होने के बावजूद तकनीकी मानकों या अन्य नियमों के कारण निर्यात प्रभावित होता है। दोनों देशों ने इस दिशा में पारदर्शी और संतुलित व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई है।

इस समझौते की घोषणा पिछले वर्ष मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टारमर ने की थी। दोनों नेताओं के बीच हुई फोन वार्ता के बाद एफटीए के सफल समापन की आधिकारिक पुष्टि की गई थी। इसे भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन वैश्विक स्तर पर नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश में रहा है और भारत उसके लिए एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है।

मुक्त व्यापार समझौते के साथ-साथ एक ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों और कामगारों के हितों की रक्षा करना है। इसके तहत सामाजिक सुरक्षा अंशदान को लेकर दोहरी देनदारी से राहत मिलेगी। इससे विशेष रूप से आईटी और अन्य पेशेवर सेवाओं में कार्यरत भारतीयों को लाभ होगा,जो सीमित अवधि के लिए ब्रिटेन में काम करते हैं।

सेवाओं के क्षेत्र में भी इस एफटीए से उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित सेवाएँ,वित्तीय सेवाएँ,पेशेवर सेवाएँ,अन्य व्यावसायिक सेवाएँ तथा शैक्षिक सेवाएँ जैसे क्षेत्रों में व्यापार का विस्तार हो सकता है। भारत पहले से ही आईटी सेवाओं में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है और ब्रिटेन इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। शुल्क में छूट और नियामकीय सहयोग से भारतीय कंपनियों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को विविधीकृत करने और यूरोपीय बाजार में उसकी उपस्थिति मजबूत करने में सहायक होगा। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में,जहाँ आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव हो रहा है,ऐसे समझौते रणनीतिक महत्व रखते हैं। इससे दोनों देशों के बीच निवेश,तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

अप्रैल से लागू होने की संभावना वाला भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने वाला साबित हो सकता है। यदि ब्रिटेन की संसद से मंजूरी मिल जाती है,तो यह समझौता भारतीय निर्यातकों,सेवा प्रदाताओं और कामगारों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आएगा,साथ ही भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को और गहरा करेगा।